Rinmukteshwar Mahadev: वो अनोखा शिव मंदिर, जहां महादेव को है दाल चढ़ाने की पंरपरा, महाभारत काल है जुड़ा है इतिहास

Published on 20 जुल॰ 2026

Rinmukteshwar Mahadev: वो अनोखा शिव मंदिर, जहां महादेव को है दाल चढ़ाने की पंरपरा, महाभारत काल है जुड़ा है इतिहास

ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर में शिव को चढ़ती है दालImage Credit source: PTI

Debt Relief Temple: देश में महादेव के बहुत से प्राचीन मंदिर हैं, जहां शिव भक्त बड़ी संख्या में उनके दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं. हम सब जब महादेव की पूजा करते हैं, तो शिवलिंग पर जल, कच्चा दूध, बेलपत्र, शहद, गंगाजल आदि चीजें चढ़ाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में एक शिव मंदिर ऐसा भी है, जहां जल, कच्चा दूध, बेलपत्र, शहद, गंगाजल के अलावा महादेव को दाल चढ़ाई जाती है?

हैरान मत होइए मध्य प्रदेश की तीर्थ नगरी कहे जाने वाले ओंकारेश्वर में ऐसा होता है. ओंकारेश्वर अपने धार्मिक महत्व और आस्था के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है, क्योंकि यहां भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में है. यहां महादेव का एक मंदिर है, जिसका नाम है ऋणमुक्तेश्वर महादेव का मंदिर. ये मंदिर अन्य शिव मंदिरों से थोड़ा अलग है. इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा बताया जाता है.

दाल चढ़ाने से कर्जों से मिलती है मुक्ति

ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर में शिवलिंग पर दूध, बेलपत्र और गंगाजल के साथ-साथ दाल भी चढ़ाए जाने की परंपरा है. मान्यता है कि, यहां सच्ची श्रद्धा के साथ दाल चढ़ाने से कर्जों से छुटकारा मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. भगवान शिव को दाल चढ़ाने के पीछे एक प्रचलित मान्यता और भी है. माना जाता है कि मंदिर में देवताओं के गुरु कहे जाने बृहस्पति का निवास स्थान है. भगवान शिव ने यहां सभी को अलग-अलग जगह प्रदान की थी, जिसमें बृहस्पति देव को ऋणमुक्तेश्वर मंदिर में स्थान दिया गया.

ये मंदिर नर्मदा नदी के तट पर बसा है. इस प्राचीन मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन करते हैं. सोमवार, शिवरात्रि और धार्मिक उत्सवों के मौके पर ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. मंदिर में दर्शन करने से पहले भक्त नर्मदा नदी में डुबकी लगाते हैं. इसके बाद ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर में प्रवेश करके उन्हें चने की दाल चढ़ाते हैं.

पांडवों ने की थी मंदिर की स्थापना

भगवान शिव के ऋणमुक्तेश्वर मंदिर का इतिहास पांडवों से जुड़ा है. कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने ऋण से मुक्ति पाने के लिए श्रीकृष्ण के कहने पर ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर स्थापित किया था. फिर अज्ञातवास खत्म होने के बाद यहां आकर महादेव का आभार जताया था. इस मंदिर में आने वाले भक्त उसी परंपरा का अनुसरण आज भी करते हैं और शिवलिंग पर चने की दाल अर्पित करते हैं.

ये भी पढ़ें: Sawan 2026: 29 या 30 जुलाई कब से शुरू हो रहा है शिव भक्ति का महीना? सावन की तारीख को लेकर दूर करें कंफ्यूजन

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण कुमार

वरुण कुमार

वरुण कुमार पिछले पांच वर्षों से पत्रकारिता जगत का हिस्सा हैं. साल 2021 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद प्रभासाक्षी न्यूज वेबसाइट से पत्रकारिता की शुरुआत की और फिर एबीपी न्यूज का हिस्सा बने. अब TV9 डिजिटल की धर्म टीम के साथ काम कर रहे हैं.

Read More

google button