Gorakhpur River Front: गोरखपुर में राप्ती नदी के किनारे 1303 करोड़ रुपये की लागत से रिवर फ्रंट बनाया जाएगा। राजघाट से डोमिनगढ़ तक बनने वाली इस परियोजना में बोटिंग, अर्बन हाट, ईको पार्क, योगा सेंटर और कन्वेंशन सेंटर जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
गोरखपुर जल्द ही उत्तर प्रदेश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो सकता है, जहां आधुनिक रिवर फ्रंट पर्यटन और शहरी विकास की नई पहचान बनेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर राप्ती नदी के किनारे बनने जा रहे राप्ती रिवर फ्रंट का विस्तृत खाका तैयार हो चुका है। करीब 1303 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह परियोजना राजघाट से डोमिनगढ़ तक लगभग 3.5 किलोमीटर क्षेत्र को नया स्वरूप देगी। इसमें आधुनिक सुविधाओं के साथ हरियाली, पर्यटन और मनोरंजन का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
गोमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर विकसित होगा राप्ती रिवर फ्रंट
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली है। योजना के तहत राप्ती नदी के तट से हर्बर्ट बांध फोरलेन तक करीब 150 मीटर चौड़े क्षेत्र का विकास किया जाएगा।
परियोजना पूरी होने के बाद फोरलेन सड़क तक के हिस्से को ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि नदी का प्राकृतिक स्वरूप भी सुरक्षित रहे और शहर को पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक स्थल मिल सके।
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बोटिंग, अर्बन हाट और कन्वेंशन सेंटर होंगे सबसे बड़े आकर्षण
राप्ती रिवर फ्रंट पर लोगों के लिए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां अर्बन हाट, ईको पार्क, योगा सेंटर और प्रगति मैदान की तर्ज पर आधुनिक कन्वेंशन सेंटर बनाया जाएगा। इसके अलावा लैंडस्केपिंग, पार्क, सड़क, नालियां, कियोस्क और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का भी निर्माण होगा।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राप्ती नदी में बोटिंग की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए अलग-अलग स्थानों पर विशेष प्लेटफॉर्म तैयार होंगे और सुरक्षा के भी पर्याप्त इंतजाम किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद तैयार हुई डीपीआर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद इस परियोजना पर तेजी से काम शुरू हुआ। डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी गोरखपुर विकास प्राधिकरण को दी गई थी।
आरएफपी प्रक्रिया के जरिए उस वाराणसी स्थित फर्म का चयन किया गया, जिसने नमो घाट परियोजना का भी विकास किया था। ग्राउंड सर्वे पूरा होने के बाद फर्म ने डीपीआर तैयार कर जीडीए को सौंप दी है।
बाढ़ को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी पूरी योजना
राप्ती नदी हर साल मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ने के लिए जानी जाती है। ऐसे में परियोजना को बाढ़ के प्रभाव से सुरक्षित रखने के लिए विशेष रणनीति तैयार की जा रही है।
निर्माण कार्य की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को सौंपी जाएगी। अब जीडीए और सिंचाई विभाग संयुक्त रूप से यह तय करेंगे कि बाढ़ के समय रिवर फ्रंट को सुरक्षित रखने और जलस्तर सामान्य होने पर विकास कार्य किस प्रकार संचालित किए जाएं।
तीन चरणों में पूरा होगा पूरा प्रोजेक्ट
परियोजना को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में अर्बन हाट और ईको पार्क विकसित किए जाएंगे। दूसरे चरण में हर्बर्ट बांध फोरलेन से रिवर फ्रंट तक सार्वजनिक प्रवेश मार्ग और योगा सेंटर बनाए जाएंगे। तीसरे चरण में आधुनिक कन्वेंशन सेंटर का निर्माण होगा, जहां बड़े आयोजन, प्रदर्शनियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे।
इसके साथ ही फोरलेन सड़क की ओर निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित कर पूरे क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित करने की योजना भी शामिल है।
GDA उपाध्यक्ष ने क्या कहा?
गोरखपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल के अनुसार, राप्ती रिवर फ्रंट की डीपीआर पूरी तरह तैयार है। अब सिंचाई विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर परियोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बाढ़ और नदी के जलस्तर को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य की रूपरेखा तैयार की जाएगी, ताकि यह परियोजना लंबे समय तक सुरक्षित, टिकाऊ और शहर के लिए उपयोगी साबित हो सके।
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