प्रथम अपील के बाद जागा वन विभाग : RTI की समय-सीमा और कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल - Haribhoomi

Published on 20 जुल॰ 2026

डोमा गांव में वन विभाग की भूमि पर कब्जे के बारे में RTI के माध्यम से जानकारी देने में विलंब के बाद आवेदक ने जब प्रथम अपील दायर की तब विभाग की नींद खुली।

Delay in RTI response raises questions over Forest Department

RTI आवेदन में देरी से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल।

  • Published: 20 Jul 2026, 07:02 PM IST
  • Last Updated: 20 Jul 2026, 07:02 PM IST

रायपुर। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत नागरिकों को निर्धारित समय-सीमा में सूचना उपलब्ध कराना प्रत्येक लोक प्राधिकरण की कानूनी जिम्मेदारी है। लेकिन रायपुर वन विभाग की कार्यप्रणाली ने इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि, सूचना का अधिकार आवेदन दायर होने के बाद एक माह से अधिक समय तक विभाग ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद जब आवेदक ने प्रथम अपील दायर की, तभी विभाग हरकत में आया और आवेदन पर कार्रवाई शुरू की गई।

अनावश्यक देरी की गई
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, बलबीर सिंह ने सूचना का अधिकार के तहत आवेदन मूल रूप से रायपुर वन विभाग को प्रस्तुत किया गया था। निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद न तो मांगी गई सूचना उपलब्ध कराई गई और न ही यह बताया गया कि, मामला अन्य वनमंडल के अधिकार क्षेत्र से संबंधित है। आवेदक द्वारा प्रथम अपील दायर किए जाने के बाद ही रायपुर वन विभाग ने आवेदन को वनमंडल गरियाबंद स्थानांतरित किया, क्योंकि अभनपुर क्षेत्र वर्तमान में गरियाबंद वनमंडल के अधिकार क्षेत्र में आता है।

तुरंत क्यों नहीं दे दी गई सूचना
यहीं सबसे बड़ा प्रश्न खड़ा होता है कि, यदि संबंधित प्रकरण प्रारंभ से ही गरियाबंद वनमंडल के अधिकार क्षेत्र का था, तो आवेदन प्राप्त होने के तुरंत बाद सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप उसे संबंधित लोक प्राधिकरण को स्थानांतरित क्यों नहीं किया गया? विभाग ने एक माह तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? प्रथम अपील दायर होने के बाद ही फाइलें क्यों चलीं?

यह सूचना का अधिकार की मूल भावना पर चोट 
सूचना अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि, यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि सूचना का अधिकार अधिनियम की समयबद्ध व्यवस्था की भावना पर भी प्रश्नचिह्न है। अधिनियम नागरिकों को समय पर सूचना दिलाने के लिए बनाया गया है, न कि उन्हें पहले इंतजार करने और फिर प्रथम अपील दायर करने के लिए मजबूर करने के लिए।

विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
कानूनी विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि कोई आवेदन किसी अन्य लोक प्राधिकरण से संबंधित हो, तो उसका समयबद्ध स्थानांतरण विभाग की वैधानिक जिम्मेदारी है। आवेदन को लंबित रखना और प्रथम अपील के बाद ही उसे स्थानांतरित करना विभागीय जवाबदेही और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि, क्या सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत कार्रवाई तभी शुरू होती है, जब आवेदक प्रथम अपील का सहारा ले? यदि प्रथम अपील नहीं की जाती, तो क्या आवेदन इसी प्रकार लंबित पड़े रहते?

समय सीमा पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई
अब निगाहें इस बात पर हैं कि, संबंधित वन विभाग सूचना का अधिकार अधिनियम की मंशा के अनुरूप समयबद्ध एवं पारदर्शी ढंग से सूचना उपलब्ध कराता है या नहीं। साथ ही यह भी अपेक्षा की जा रही है कि, संबंधित अधिकारी यह स्पष्ट करें कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्रवाई क्यों नहीं की गई और प्रथम अपील के बाद ही प्रक्रिया शुरू होने की नौबत क्यों आई।

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