Sawan Shivratri Vrat Katha: कैसे एक शिकारी बना शिव भक्त? पढ़ें सावन शिवरात्रि की ये रोचक कथा

Published on 11 अग॰ 2026

Sawan Shivratri Story: सावन में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अनेक व्रत किए जाते हैं। सावन शिवरात्रि भी इनमें से एक है। सावन मास की शिवरात्रि का महत्व धर्म ग्रंथों में भी बताया गया है।

Sawan Shivratri 2026: सावन भगवान शिव को समर्पित पवित्र महीना माना जाता है, इसलिए इस दौरान पड़ने वाली शिवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। सावन शिवरात्रि का व्रत इस बार 11 अगस्त, मंगलवार को किया जाएगा। मान्यता है कि सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से भक्तों को शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस व्रत से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा भी है, जिसे सुनने के बाद ही इस व्रत का पूरा फल मिलता है। आगे पढ़िए सावन शिवरात्रि व्रत की कथा…

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सावन शिवरात्रि व्रत कथा हिंदी में

एक समय की बात है। चित्रभानु नाम का एक शिकारी था। वह जंगल में जानवरों का शिकार करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उसने एक साहूकार से कर्ज लिया था, लेकिन समय पर कर्ज न चुका पाने के कारण साहूकार ने उसे बंदी बना लिया।
संयोग से जिस दिन चित्रभानु को बंदी बनाया गया, उस दिन सावन शिवरात्रि थी। पूरे दिन भोजन और पानी न मिलने के कारण उसका व्रत भी हो गया। शाम को साहूकार ने उसे इस शर्त पर छोड़ दिया कि वह जल्द से जल्द उसका कर्ज चुका देगा।

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आजाद होने के बाद चित्रभानु रात में शिकार करने के लिए जंगल की ओर निकल पड़ा। शिकार की तलाश करते हुए वह एक बिल्व वृक्ष पर चढ़कर बैठ गया। उसे पता नहीं था कि उस वृक्ष के नीचे एक शिवलिंग स्थापित है।
रात बीतने के दौरान जब चित्रभानु पेड़ पर बैठा शिकार की प्रतीक्षा कर रहा था, तब उसके हाथों से बिल्व पत्र टूटकर नीचे स्थित शिवलिंग पर गिरने लगे। इस तरह अनजाने में ही भगवान शिव का पूजन और बिल्व पत्र अर्पण हो गया।
कुछ समय बाद वहां एक गर्भवती हिरणी आई। चित्रभानु ने जैसे ही उसे मारने के लिए धनुष पर बाण चढ़ाया, उसके हाथ से फिर बिल्व पत्र शिवलिंग पर गिर गए। हिरणी ने शिकारी से कहा कि वह गर्भवती है और इस समय उसकी हत्या करना उचित नहीं होगा। उसने वचन दिया कि प्रसव के बाद वह स्वयं उसके पास लौट आएगी। हिरणी की बात सुनकर चित्रभानु ने उसे जाने दिया।
कुछ देर बाद वहां दूसरी हिरणी पहुंची। चित्रभानु ने उसे भी शिकार बनाने के लिए धनुष पर बाण चढ़ाया। इस बार भी बिल्व पत्र शिवलिंग पर गिर पड़े। हिरणी ने शिकारी से अपने प्रिय से मिलने की बात कही और वादा किया कि इसके बाद वह स्वयं उसके पास वापस आएगी। चित्रभानु ने उसे भी जाने दिया।
इसके बाद एक हिरण वहां आया। चित्रभानु ने उसे भी निशाना बनाना चाहा, लेकिन उसके हाथ से फिर बिल्व पत्र शिवलिंग पर गिर गए। हिरण ने भी शिकारी से कुछ समय देने का अनुरोध किया और वापस आने का वचन दिया। चित्रभानु ने उसकी बात भी मान ली।
अगली सुबह वह दृश्य देखकर चित्रभानु हैरान रह गया। दोनों हिरणियां और हिरण अपने छोटे बच्चे के साथ उसके सामने आ गए। सभी अपने वचन के अनुसार उसके पास लौटे थे। उनकी सत्यनिष्ठा और प्रेम देखकर चित्रभानु का हृदय बदल गया। उसे अपने किए हुए कर्मों पर पश्चाताप हुआ और उसने उसी दिन से शिकार करना छोड़ दिया।
सावन शिवरात्रि के दिन अनजाने में ही उससे उपवास, रात्रि जागरण और भगवान शिव की पूजा हो गई थी। जिससे उसका मन पवित्र हो गया। उसने शिकार छोड़कर दूसरा काम शुरू किया और धीरे-धीरे साहूकार का कर्ज भी चुका दिया। इस प्रकार भगवान शिव की भक्ति और सावन शिवरात्रि के व्रत के प्रभाव से उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया।