पति को 'अनपढ़-गंवार' कहकर पत्नी ने किया अपमानित, अब SC ने दी तलाक को मंजूरी

Published on 2 सित॰ 2026

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2003 को हुई शादी के एक मामले में कपल के तलाक को मंजूरी दे दी है. अपीलकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय में एमपी हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी.

Written By : कार्तिक सागर समाधिया |  Updated at : 02 Sep 2026 07:33 PM (IST)

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Supreme Court granted divorce an estranged couple residing separately since December 2005 पति को 'अनपढ़-गंवार' कहकर पत्नी ने किया अपमानित, अब SC ने दी तलाक को मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने तलाक से जुड़े मामले में एक अहम फैसला सुनाया है. यहां एक अलग-अलग रह रहे जोड़े को तलाक को मंजूरी दे दी है. कोर्ट ने माना है कि कपल दिसंबर 2005 से अलग रह रहे थे और महिला ने वैवाहिक रिश्ते को खत्म कर दिया था. जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस चंद्रशेकर की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि महिला को स्थायी गुजारा भत्ते के तौर पर 7 लाख रुपए दिए जाएं. 

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पिछले फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि हालांकि वैवाहिक कानून का मुख्य मकसद शादी का संरक्षण करना है, लेकिन जब पक्ष लंबे समय तक अलग रहते हैं, तो कानून को ऐसी स्थिति की सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए. बेंच ने कहा है कि हमारे समाने मौजूद मामले में सच्चाई यह है कि दोनों पक्ष अलग-अलग रह रहे हैं. भले प्रतिवादी यानी पत्नी ने अपने बयान में कहा है कि वह वैवाहिक दायित्वों के निभाने के लिए तैयार थी. बेंच ने कहा है कि सिर्फ कहने भर से काम नहीं चलेगा, जब उनका व्यवहार कुछ और दिखाता हो. बेंच ने शीर्ष अदालत के एक फैसले का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया था कि लंबे समय तक अलग रहना इस बात का आकलन करने में एक अहम कारक होगा, कि क्या वैवाहिक बंधन को फिर से बहाल किया जा सकता है या नहीं. 

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को दी थी पति ने चुनौती

बेंच ने उस व्यक्ति की पिटिशन पर अपना फैसला सुनाया है, जिसमें उसने मध्यप्रदेश की हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने कहा था कि वह क्रूरता और परित्याग साबित करने में नाकाम रहा, इसलिए उसे तलाक की डिक्री नहीं मिल सकती. कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के सामने यह साबित हो चुका था कि दोनों पक्ष दिसंबर 2005 से एक साथ नहीं रह रहे थे. इसलिए हमारी राय में हाईकोर्ट का यह निष्कर्ष गलता था कि पत्नी का अपीलकर्ता यानी पति को छोड़ने का कोई इरादा नहीं था. 

कोर्ट ने माना: दोनों पक्ष शादी में बने रहना न्याय के मकसद को पूरा नहीं करेगा

बेंच ने कहा कि रिकॉर्ड से जानकारी मिलती है कि पति अपनी पत्नी को ससुराल ले जाने गया था, लेकिन उसने बिना किसी ठोस वजह के उनके साथ जाने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने पूरे केस में यह भी ध्यान रखा कि शादी से कोई बच्चा नहीं हुआ था. सुलह की सभी कोशिशें नाकाम हो रही थीं. ऐसे हालात में दोनों पक्षों को शादी में बने रहने के लिए मजबूर करना, न्याय के मकसद को पूरा नहीं करेगा. इस तरह हम मानते हैं कि प्रतिवादी पत्नी ने शादी के रिश्ते खत्म कर दिए थे. अपीलकर्ता ने परित्याग का आधार सफलतापूर्वक साबित कर दिया है. 

पति की शैक्षणिक योग्यता को लेकर दूर हो गई थी पत्नी

कोर्ट ने गौर किया है कि यह शादी जून 2003 में हुई थी. शादी के तुरंत बाद पत्नी पति की शैक्षणिक योग्यता को लेकर उससे दूर हो गई थी. यहां तक उसने पति को अनपढ़ और गंवार कहकर अपमानित किया. महिला नवंबर में 2005 में अपने मायके चली गई थी. जून 2007 में पति ने हिंदू मैरिज एक्ट 1955 की धारा 13 के तहत पत्नी के घर छोड़कर चले जाने और मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका दायर की थी. 

नवंबर 2025 एबीपी न्यूज नेटवर्क में बतौर कंसल्टेंट अपनी भूमिका निभा रहा हूं. मीडिया का अनुभव करीबन साढ़े 8 साल का है. देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुका हूं. पिछले कुछ सालों में बतौर मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर, कंटेंट एडिटर, सब एडिटर और रिजनल टीवी चैनल में प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव के तौर पर अपनी सेवाएं दी हैं. लेखन, ग्राफिक्स और वीडियो प्रोडक्शन की बारीक समझ है. नेशनल-इंटरनेशनल डेस्क की भी जिम्मेदारी संभाल चुका हैं. मजा ग्राउंड या एक्सक्लूसिव रिपोर्ट कवर करने में आता है. साल 2016 में माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी भोपाल से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया और पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा. साहित्य पढ़ना, फिल्में देखना, कहानियां-कविताएं लिखना और घूमना विशेष रुचियों में दर्ज है.

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Published at : 02 Sep 2026 07:33 PM (IST)

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