सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (20 जुलाई) को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें दिल्ली दंगों की आरोपी देवंगना कलिता को उन दस्तावेजों का निरीक्षण करने की अनुमति दी गई थी, जिन पर 2020 की हिंसा से जुड़े कथित बड़े षड्यंत्र के मामले में भरोसा नहीं किया गया था.
6 जून को दिल्ली हाईकोर्ट ने कलिता की याचिका खारिज की थी, जिसमें उन्होंने CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों के वीडियो और उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस द्वारा इस्तेमाल की गई व्हाट्सएप चैट की मांग की, क्योंकि उनमें संवेदनशील जानकारी शामिल थी. हालांकि जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने उन्हें पुलिस की कस्टडी में रखे गए उन दस्तावेज़ों को देखने की इजाज़त दी थी, जिनका इस्तेमाल नहीं किया गया. दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी थी.
सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने क्या कहा
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के सामने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि कोर्ट के दो फैसलों देबेंद्र नाथ पाधी और सरला गुप्ता में स्पष्ट तौर पर कहा गया कि आरोपी चार्ज तय होने के चरण में उन दस्तावेज़ों को देखने का हकदार नहीं है, जिनका इस्तेमाल नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि इस चरण में ऐसे दस्तावेज़ों को देखने की मांग करना सिर्फ़ ट्रायल में देरी करने की एक चाल है.
कलिता के वकील की दलील
वहीं सुनवाई के दौरान कलिता की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि वो एक ऐसे वीडियो तक पहुंच चाहते थे, जिससे पता चले कि वह शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रही थीं. उन्होंने कहा कि अगर इस बात का साफ सबूत है कि उन्होंने पत्थर नहीं फेंके तो उन्हें बरी कर दिया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा’ मैं उन वीडियो की कॉपी चाहता था जिनसे पता चले कि हम शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे. जिन भी जजों ने वो वीडियो देखे हैं, उन्होंने कहा कि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी हैं. अगर वीडियो में दिख रहा है कि मैं विरोध कर रही हूं, और उन्होंने मुझे यह नहीं बताया कि कहां तो मेरे पत्थर फेंकने की बात कैसे आ सकती है? अगर मैं शांति से बैठी हूं तो मुझे बरी कर दिया जाना चाहिए. मुझे ट्रायल से क्यों गुजरना चाहिए’.
जस्टिस कुमार ने की ये टिप्पणी
हालांकि, जस्टिस कुमार ने कहा कि यह ट्रायल के चरण में बचाव का आधार हो सकता है, लेकिन इससे पहले इन दलीलों पर विचार नहीं किया जा सकता; दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद जस्टिस कुमार ने कहा ‘आप इसके हकदार नहीं हैं. सरला गुप्ता मामले के फैसले में यही कहा गया. विवादित आदेश पर रोक रहेगी. आप गुलफिशा मामले का फैसला देखिए. आप तो अगले 10 साल में भी अपनी दलीलें पूरी नहीं कर पाएंगे और फिर आप कहते हैं कि ट्रायल में देरी हो रही है’.
दंगों में 53 लोगों की हुई थी मौत
छात्र कार्यकर्ता कलिता, नताशा नरवाल, उमर खालिद, शरजील इमाम, जामिया समन्वय समिति की सदस्य सफूरा जरगर, पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन और कई अन्य लोगों के खिलाफ उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के संबंध में विभिन्न एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें फरवरी 2020 में 53 लोग मारे गए और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे.

जूही उरूषा खान
जूही उरूषा खान पिछले 12 साल से पत्रकारिता से जुड़ी हुई हैं. भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से फिल्म जर्नलिज्म की पढ़ाई की. इसके बाद दिल्ली आकर BAG में एंटरटेनमेंट बीट पर इंटर्नशिप की. बाद में CNEB न्यूज चैनल में एंटरटेनमेंट बीट में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया, साथ ही प्रोग्रामिंग को भी देखा.<p></p>CNEB के बाद VOICE OF INDIA में एंटरटेनमेंट बीट पर बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर काम करना शुरू किया. यहां से फिर जनसंदेश न्यूज चैनल के साथ जुड़ीं और प्रोग्रामिंग में काम किया. इसके बाद 4 REAL NEWS चैनल में करीब चार साल न्यूज के साथ ही प्रोग्रामिंग और धार्मिक शोज पर काम किया.<p></p>यहां से राज्यसभा टीवी का रुख किया और प्रोग्रामिंग में काम किया. इसके साथ ही एंकरिंग करना भी शुरू की. इसके बाद सूर्या समाचार में प्रोग्रामिंग में एंटरटेनमेंट बीट पर बतौर प्रोड्यूसर काम किया.<p></p>जी बिहार झारखंड में भी काम करने का अनुभव है. फिलहाल टीवी9 भारतवर्ष से जुड़ी हुई हैं.
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