Simhastha 2028:उज्जैन में अप्रैल 2028 में होने वाले सिंहस्थ को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए सड़क, रेलवे, ट्रैफिक, घाट, स्वच्छता और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। सरकार का फोकस शहर को बड़े धार्मिक आयोजन के लिए पहले से तैयार करने पर है।
उज्जैन में अभी से क्यों हो रही तैयारी?
उज्जैन में हर 12 साल में Simhastha का आयोजन होता है। 2028 में होने वाले सिंहस्थ में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इसी वजह से आखिरी समय में दबाव न बढ़े, इसके लिए शहर और आसपास के इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चरको मजबूत करने की तैयारी पहले से शुरू कर दी गई है।सरकार की तैयारियों में सिर्फ मेला क्षेत्र ही नहीं, बल्कि शहर की सड़कें, रेलवे कनेक्टिविटी, ट्रैफिक व्यवस्था, साफ-सफाई, पानी, शौचालय और श्रद्धालुओं की आवाजाही जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
रेलवे कनेक्टिविटी पर भी फोकस
सिंहस्थ के दौरान उज्जैन पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या काफी बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए रेलवे ने भी तैयारियां शुरू की हैं।उज्जैन बायपास रेल लाइन के तहत नैखेड़ी से चिंतामन गणेश तक 8.60 किलोमीटर की लाइन का प्रोजेक्ट करीब 189.04 करोड़ रुपये की लागत का है। इसका उद्देश्य ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर करना और उज्जैन जंक्शन पर ट्रेन संचालन की दिक्कतों को कम करना है। रेलवे ने इसे 2028 के सिंहस्थ के मद्देनजर महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट बताया है। इसके अलावा इंदौर-देवास-उज्जैन रेल सेक्शन के दोहरीकरण जैसे प्रोजेक्ट भी मध्य प्रदेश की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में हैं।
सड़क और ट्रैफिक व्यवस्था होगी मजबूत
सिंहस्थ के दौरान सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही को संभालना होगी। इसे देखते हुए उज्जैन को दूसरे शहरों से जोड़ने वाली सड़कों को बेहतर बनाने पर भी काम हो रहा है।उज्जैन से जुड़े कई सड़क प्रोजेक्टों का उद्देश्य ट्रैफिक को सुगम बनाना और प्रमुख धार्मिक आयोजन के दौरान बढ़ने वाले दबाव को संभालना है।
सफाई और कचरा प्रबंधन पर खास जोर
इस बार सिंहस्थ की तैयारियों में Zero Waste पर भी जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने जून 2026 में उज्जैन में हुई समीक्षा के दौरान सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का उल्लेख करते हुए कचरा प्रबंधन, पर्याप्त शौचालय और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया था। यानी मेले के दौरान सिर्फ श्रद्धालुओं की भीड़ संभालना ही चुनौती नहीं होगी, बल्कि इतने बड़े आयोजन से पैदा होने वाले कचरे और गंदगी को नियंत्रित करना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी।
करोड़ों की भीड़ के लिए पहले से तैयारी क्यों जरूरी?
सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन में लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही एक साथ बढ़ सकती है। ऐसे में अगर सड़क, रेलवे, पार्किंग, पानी, शौचालय और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था पहले से तैयार न हो तो शहर पर अचानक बहुत ज्यादा दबाव पड़ सकता है।
इसी वजह से 2028 का आयोजन अभी दूर होने के बावजूद तैयारी तेजी से की जा रही है। लक्ष्य यही है कि आयोजन के समय श्रद्धालुओं की आवाजाही ज्यादा व्यवस्थित रहे और शहर की मूल सुविधाओं पर भी ज्यादा दबाव न पड़े।
• शहर और आसपास की सड़क कनेक्टिविटी में सुधार
• रेलवे नेटवर्क और ट्रेन संचालन को बेहतर बनाने की कोशिश
• ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था
• घाट और श्रद्धालु सुविधाओं का विस्तार
• शौचालय और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करना
• कचरा प्रबंधन पर विशेष फोकस
• उज्जैन को बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी
सिंहस्थ 2028 के लिए हो रहा यह विकास आने वाले समय में उज्जैन की तस्वीर बदल सकता है। हालांकि अलग-अलग प्रोजेक्ट की लागत, समय सीमा और अंतिम रूप में क्या-क्या काम होंगे, यह संबंधित विभागों की स्वीकृति और प्रगति के अनुसार बदल सकता है।
ये भी पढ़ें: भोपाल में 34 देशों से आएंगे 100 विदेशी मेहमान आएंगे, 15 राज्यों के 180 टूर ऑपरेटर्स भी होंगे शामिल, 1100 करोड़ से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव