दिल्ली की नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट सामने आने के बाद 31 अगस्त को जारी सूची में करीब 47.5 लाख नाम हटाए गए थे, जबकि दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया में 15 सितंबर तक केवल 62,583 फॉर्म-6 ही जमा हुए हैं.
Written By : अभिषेक नयन, दिल्ली | Updated at : 17 Sep 2026 12:27 PM (IST)

दिल्ली SIR में नाम जुड़वाने के लिए 15 दिन में 62 हजार आवेदन
दिल्ली की नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट सामने आने के बाद जिन लोगों के नाम हटे हैं, उनके पास उन्हें वापस जुड़वाने का मौका है, लेकिन शुरुआती 15 दिनों के आंकड़े कुछ और कहानी बता रहे हैं. 31 अगस्त को जारी सूची में करीब 47.5 लाख नाम हटाए गए थे, जबकि 30 सितंबर तक चलने वाली दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया में 15 सितंबर तक केवल 62,583 फॉर्म-6 ही जमा हुए हैं.
4.75 लाख आवेदन की उम्मीद, अभी आंकड़ा काफी पीछे
चुनाव कार्यालय के अनुमान के मुताबिक करीब 4.75 लाख लोग नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं. यह संख्या ड्राफ्ट सूची से हटाए गए 47.5 लाख नामों की लगभग 10 फीसदी है. फिलहाल 15 दिनों में आए 62,583 आवेदन इस अनुमान से काफी कम हैं.
यहां एक और आंकड़ा ध्यान खींचता है. ड्राफ्ट सूची जारी होने से पहले ही दिल्ली में 2.12 लाख फॉर्म-6 जमा किए जा चुके थे. यानी 31 अगस्त के बाद शुरू हुई दावे-आपत्तियों की अवधि में आवेदन की गति पहले के मुकाबले धीमी रही है.
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किस जिले में कितने लोगों ने नाम जुड़वाने के लिए किया आवेदन
जिलेवार तस्वीर देखें तो पश्चिमी दिल्ली में सबसे ज्यादा 7834 फॉर्म-6 जमा हुए हैं. इसके बाद उत्तर-पश्चिम जिले में 6384 और पूर्वी दिल्ली में 6297 आवेदन आए हैं. उत्तर-पूर्वी दिल्ली से 5585 और दक्षिण-पश्चिम जिले से 5436 लोगों ने आवेदन किया है. बाहरी उत्तर जिले में 4287 और मध्य-उत्तर में 4188 आवेदन दर्ज किए गए हैं. मध्य जिले में 2647 और पुराने दिल्ली क्षेत्र में 2547 फॉर्म-6 जमा हुए हैं. सबसे कम आवेदन नई दिल्ली जिले से आए हैं, जहां यह संख्या सिर्फ 1203 रही.
एसआईआर की प्रक्रिया अभी केवल उन 47.5 लाख नामों तक सीमित नहीं है, जिन्हें ड्राफ्ट सूची से हटाया गया है. प्रारूप सूची में जगह पाने वाले करीब 33 लाख मतदाताओं को भी अलग-अलग विसंगतियों के संबंध में नोटिस भेजे जा रहे हैं. ड्राफ्ट सूची में करीब 97 लाख मतदाता शामिल हैं. ऐसे में 33 लाख लोगों को नोटिस मिलना कुल संख्या के एक-तिहाई से भी ज्यादा है. इन मामलों में दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तस्वीर और बदल सकती है.
दिल्ली में लगातार बदलता रहता है लोगों का ठिकाना
चुनाव अधिकारियों का मानना है कि दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों के आने-जाने का असर भी इस पूरी प्रक्रिया पर पड़ रहा है. खासकर सरकारी कर्मचारियों समेत कई लोग कुछ वर्षों तक दिल्ली में रहने के बाद नौकरी या दूसरी वजहों से अपने मूल राज्य या किसी अन्य राज्य में चले जाते हैं.
एसआईआर के दौरान करीब 47 लाख लोगों की ओर से गणना प्रपत्र भी जमा नहीं किया गया था. अब 30 सितंबर तक चलने वाली दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया में हटाए गए नामों में से कितने लोग वापस अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करते हैं यह इस प्रक्रिया के समापन के बाद स्पष्ट होगा.
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अभिषेक नयन का पत्रकारिता में लंबा अनुभव है. साल 2011 से ABP News से जुड़े हैं. दिल्ली-NCR की राजनीतिक, सामाजिक और नागरिक समस्याओं की जमीनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग करते हैं.
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Published at : 17 Sep 2026 12:27 PM (IST)
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