South West Direction: घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में कौन सा पौधा रखना है शुभ? जानें नैऋत्य कोने से जुड़ा नियम

Published on 29 अग॰ 2026

South West Direction Plants: वास्तु शास्त्र में घर की हर दिशा का अपना अलग महत्व बताया गया है. दक्षिण-पश्चिम यानी साउथ-वेस्ट दिशा को नैऋत्य कोण कहा जाता है, जिसे स्थिरता, मजबूती और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक माना जाता है. ये दिशा पृथ्वी तत्व से जुड़ी मानी जाती है, जो जीवन में ठहराव और सुरक्षा लाने का प्रतीक है. वास्तु की मानें तो इसे धन के संचय और बचत की महत्वपूर्ण दिशा भी माना जाता है. यही वजह है कि घर के मुखिया या दंपत्ति के लिए मास्टर बेडरूम इस दिशा में होना उत्तम माना जाता है.

नैऋत्य कोण को संतुलित और मजबूत बनाए रखने के लिए यहां भारी सामान, अलमारी, तिजोरी या भारी फर्नीचर रखने की सलाह दी जाती है. इस हिस्से के लिए पीला, सफेद या ऑफ-व्हाइट रंग शुभ माने जाते हैं. वहीं, दक्षिण-पश्चिम दिशा में घर का मेन दरवाजा होना अशुभ माना जाता है और इससे आर्थिक हानि हो सकती है.

दक्षिण-पश्चिम दिशा में कौन से पौधे रखने चाहिए?

वास्तु शास्त्र के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य कोण में ऐसे पौधे रखना शुभ माना जाता है, जो मजबूत और बड़े हों. इस दिशा का संबंध पृथ्वी तत्व और स्थिरता से माना जाता है, इसलिए यहां भारी पौधे या बड़े प्लांटर्स रखना बेहतर माना जाता है.

  • रबर प्लांट:- नैऋत्य कोण में रबर प्लांट रखना शुभ माना जाता है. इसकी मजबूत और घनी बनावट इस दिशा की स्थिरता और मजबूती के गुणों के अनुकूल मानी जाती है.
  • स्नेक प्लांट:- स्नेक प्लांट को भी दक्षिण-पश्चिम दिशा के लिए उपयुक्त माना जाता है. इसकी सीधी और मजबूत पत्तियां वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने में सहायक मानी जाती हैं.
  • जेड प्लांट:- नैऋत्य कोण में जेड प्लांट रखना भी शुभ माना जाता है. वास्तु मान्यताओं के अनुसार इसे धन के संचय और आर्थिक स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है.
  • एरिका पाम:- एरिका पाम भी इस दिशा में रखा जा सकता है, खासकर जब पौधा बड़ा और मजबूत हो. वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस तरह के पौधे नैऋत्य कोण के पृथ्वी तत्व और स्थिरता के गुणों के अनुकूल माने जाते हैं.

दक्षिण-पश्चिम दिशा का नियम

दक्षिण-पश्चिम दिशा में पौधे रखते समय भूरे, बेज या मिट्टी के रंग के गमले रखना शुभ माना जाता है. इस दिशा का संबंध पृथ्वी तत्व से होने के कारण मिट्टी या भारी गमलों को रखने की सलाह दी जाती है. वास्तु के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम दिशा यानी नैऋत्य कोण में पानी वाले पौधे, कांटेदार पौधे और बेलें रखने से बचना चाहिए. इसके अलावा, हल्के प्लास्टिक या मेटल के गमलों की जगह भारी और मजबूत गमलों का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है.

दक्षिण-पश्चिम कोने में क्या नहीं रखना चाहिए?

पानी से जुड़ी चीजें:- इस दिशा में बोरवेल, भूमिगत पानी की टंकी, सेप्टिक टैंक या पानी का कोई भी स्रोत नहीं होना चाहिए.

पूजा घर:- दक्षिण-पश्चिम कोने में पूजा कक्ष या मंदिर बनाने से बचना चाहिए.

रसोईघर:- इस दिशा में किचन या चूल्हा नहीं होना चाहिए. माना जाता है कि इससे धन हानि हो सकती है.

मुख्य दरवाजा:- घर का मुख्य प्रवेश द्वार इस कोने में नहीं होना चाहिए.

खुली जगह और बड़ी खिड़कियां:- इस दिशा को खुला नहीं छोड़ना चाहिए और न ही यहां बड़ी खिड़कियां या ज्यादा वेंटिलेशन होना चाहिए.

हल्का सामान:- नैऋत्य कोण को खाली या हल्का नहीं रखना चाहिए. यहां भारी फर्नीचर या कोई और भारी सामान रखना बेहतर माना जाता है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

सना चौधरी

सना चौधरी

सना यूपी के गाजियाबाद की रहने वाली हैं. सना ने हाईटेक इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है. पढ़ाई के साथ-साथ कंटेंट ऑप्टिमाईजेशन और वीडियो एडिटिंग भी सीखा है. जिसके बाद सना ने अलग-अलग जगहों पर डिजिटल कॉन्टेंट राइटर और वीडियो एडिटर के तौर पर काम किया.  इससे पहले सना Zee मीडिया में बतौर वीडियो और कंटेंट एडिटर काम कर चुकी हैं. उन्होंने जी न्यूज में सोशल मीडिया पेज मैनेज किया है. Zee के बाद सना ने टीवी9 भारतवर्ष की वेबसाइट TV9hindi.com में बतौर ट्रेनी ज्वाइन किया. सना को न्यूज़ एंकरिंग का भी शौक है.

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