Sridevi के पति बोनी कपूर, बेटी जाह्नवी और खुशी को सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस, क्या है मामला?

Published on 17 सित॰ 2026

Time Published: Thursday, September 17, 2026, 12:36 [IST]

Sridevi Property Dispute: बॉलीवुड की दिवंगत एक्ट्रेस श्रीदेवी और उनके परिवार से जुड़ा एक पुराना प्रॉपर्टी विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। चेन्नई की एक जमीन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म प्रोड्यूसर बोनी कपूर (Boney Kapoor) और उनकी दोनों बेटियों जाह्नवी कपूर (Janhvi Kapoor) और खुशी कपूर (Khushi Kapoor) समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। ये मामला चेन्नई में स्थित करीब 2.70 एकड़ जमीन के एक हिस्से पर दावे से जुड़ा है।

श्रीदेवी की चेन्नई स्थित प्रॉपर्टी से जुड़ा पुराना विवाद
IANS की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पिल्लई की बेंच ने एम.सी. शिवकामी और उनके भाई एम.सी. नटराजन की याचिका पर सुनवाई की है। दोनों याचिकाकर्ताओं ने विवादित संपत्ति के एक हिस्से पर अपना अधिकार होने का दावा किया है।

Sridevi Property

प्रॉपर्टी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिया ऐसा निर्देश

-इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को अगली सुनवाई तक विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया यानी फिलहाल जमीन की मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने इस विवाद को आपसी बातचीत या मध्यस्थता के जरिए सुलझाने का सुझाव भी दिया है।

-इसके लिए हाई कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज की निगरानी में मध्यस्थता की प्रक्रिया कराने का प्रस्ताव रखा गया है। अब मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर 2026 को होगी। उस दौरान सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा करेगा।

मद्रास हाई कोर्ट ने पहले कपूर परिवार के पक्ष में दिया था फैसला

-इस मामले में इससे पहले मद्रास हाई कोर्ट का फैसला कपूर परिवार के पक्ष में आया था। 20 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट ने कपूर परिवार की रिविजन याचिका को मंजूर करते हुए शिवकामी और उनके भाई द्वारा दायर सिविल मुकदमे को खारिज कर दिया था।

-हाई कोर्ट ने अपने फैसले में माना था कि साल 1988 में हुए प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन को चुनौती देने वाला मुकदमा समय-सीमा के कारण आगे नहीं बढ़ सकता। अदालत ने ये भी माना कि उसके सामने रखी गई दलीलों के आधार पर दावों में पर्याप्त कानूनी आधार नजर नहीं आया। इसके बाद शिवकामी और नटराजन ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अब शीर्ष अदालत ने इस याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।

चेन्नई के शोलिंगनल्लूर में है विवादित जमीन

-ये पूरा विवाद चेन्नई के शोलिंगनल्लूर इलाके में स्थित सर्वे नंबर 1/1B की करीब 2.70 एकड़ जमीन से जुड़ा है। मद्रास हाई कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक याचिकाकर्ताओं ने खुद को स्वर्गीय एम.सी. चंद्रशेखरन का कानूनी वारिस बताया है।

-याचिकाकर्ताओं ने संपत्ति को 5 बराबर हिस्सों में बांटने की मांग की है। उनका दावा है कि उन्हें इसमें 5वां हिस्सा मिलना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने 19 अप्रैल 1988 को राजेश्वरी, श्रीलता और श्रीदेवी के पक्ष में किए गए सेल डीड को भी चुनौती दी है।

-याचिकाकर्ताओं ने संपत्ति से जुड़े बाद के लेन-देन को भी अमान्य घोषित करने की मांग की है। हालांकि ये सभी दावे अदालत के सामने रखे गए पक्ष हैं और मामले में अंतिम कानूनी स्थिति अदालत की कार्यवाही के आधार पर तय होगी।

कपूर परिवार की ओर से क्या दलील दी गई?

-सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने हाई कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए अपनी दलीलें रखीं। उनका कहना था कि हाई कोर्ट ने ये तय करने की कोशिश की कि याचिकाकर्ता वास्तव में कानूनी वारिस हैं या नहीं और चंद्रशेखरन की कथित दूसरी शादी वैध थी या नहीं। याचिकाकर्ताओं के वकील के मुताबिक उस स्तर पर अदालत के सामने मुख्य सवाल ये होना चाहिए था कि क्या मुकदमे को शुरुआती चरण में ही खारिज किया जा सकता है।

-वहीं कपूर परिवार की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मामले की समय-सीमा पर जोर दिया। उन्होंने अदालत को बताया कि जिस मूल प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन को चुनौती दी जा रही है, वो साल 1988 का है जबकि इससे जुड़ा मौजूदा मुकदमा साल 2025 में दायर किया गया था।

साल 1988 के लेन-देन से जुड़ा है विवाद

-इस पूरे मामले की जड़ करीब 37 साल पुराने प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन में है। याचिकाकर्ताओं की ओर से साल 1988 के सेल डीड और उसके बाद हुए संपत्ति से जुड़े लेन-देन पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं कपूर परिवार की ओर से मामले की कानूनी समय-सीमा का मुद्दा उठाया गया है।

-फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने के साथ-साथ बातचीत और मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ने का सुझाव दिया है। अब 18 दिसंबर 2026 को होने वाली सुनवाई में इस मामले की आगे की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।