रूस ने भारत को अपने सबसे अत्याधुनिक और 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान Su-57 का उन्नत निर्यात संस्करण Su-57E देने का प्रस्ताव रखा है। रूस न केवल इन विमानों की आपूर्ति करने को तैयार है, बल्कि 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत भारत में इसके संयुक्त उत्पादन और पूर्ण टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की भी पेशकश की है।
स्टील्थ फाइटर जेट Su-57
- Published: 12 Sep 2026, 11:15 AM IST
- Last Updated: 12 Sep 2026, 11:15 AM IST
आधुनिक युद्ध कला में हवाई श्रेष्ठता बनाए रखने के लिए 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान किसी भी वायुसेना की सबसे बड़ी जरूरत बन चुके हैं। भारतीय वायुसेना (IAF) जहाँ एक ओर अपने स्वदेशी एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर बेड़े में 5वीं पीढ़ी के जेट्स की तत्काल आवश्यकता को पूरा करने के विकल्पों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
इसी सिलसिले में भारत के दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार रूस ने अपना सबसे आधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट Su-57 भारत को ऑफर किया है। रूसी रक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि वे इस प्रोजेक्ट में भारत को सिर्फ एक खरीदार के रूप में नहीं, बल्कि तकनीक साझा करके भारत में ही इसके निर्माण की संयुक्त साझेदारी के रूप में देखते हैं।
कितना शक्तिशाली है रूस का Su-57?
रूस का Su-57 5वीं पीढ़ी का एक बहुउद्देश्यीय, सुपर-मैन्युवरेबल और अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह रडार की नजरों से बचकर दुश्मन के हवाई क्षेत्र में गहराई तक प्रवेश कर सके और हवा, जमीन या समुद्र स्थित ठिकानों को सटीक निशाना बना सके। इसका आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सेंसर सिस्टम पायलट को युद्ध के दौरान त्वरित निर्णय लेने में मदद करता है।
- रडार से छिपने की तकनीक (Stealth Capability): इसके विशेष डिजाइन, आंतरिक वेपन बे और रडार-एब्जॉर्बेंट मटेरियल (RAM) कोटिंग के कारण यह दुश्मन के रडार नेटवर्क पर बहुत छोटा सिग्नेचर छोड़ता है।
- सुपरक्रूज रफ्तार (Supercruise): यह बिना किसी आफ्टरबर्नर (अतिरिक्त ईंधन) के इस्तेमाल के ध्वनि की गति से दोगुनी की रफ्तार पर लगातार उड़ान भर सकता है।
- घातक हथियार और हाइपरसोनिक मिसाइलें: विमान की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए यह लंबी दूरी की हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों और हाइपरसोनिक हथियारों को ले जाने में सक्षम है।
- सेंसर फ्यूजन और एआई एवियोनिक्स: इसमें लगा एईएसए (AESA) रडार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम 360-डिग्री कवरेज प्रदान करता है, जिससे एक साथ कई खतरों को ट्रैक किया जा सकता है।
रूस भारत को क्यों दे रहा है यह बड़ा ऑफर?
भारत और रूस के बीच रक्षा निर्माण के क्षेत्र में सुखोई-30MKI का सफल इतिहास रहा है, जहाँ 200 से अधिक विमानों का निर्माण एचएएल द्वारा भारत में ही किया गया। रूस अब इसी स्थापित औद्योगिक ढांचे का उपयोग 5वीं पीढ़ी के Su-57 विमानों के सह-उत्पादन के लिए करना चाहता है। यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक परिदृश्य में रूस अपने रक्षा निर्यात के लिए एक भरोसेमंद और बड़े रक्षा भागीदार के साथ संबंधों को और मजबूत करना चाहता है।
- पूर्ण टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: पश्चिमी देशों के विपरीत, रूस इस फाइटर जेट का सोर्स कोड और क्रिटिकल मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी भारत को सौंपने के लिए तैयार है।
- 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा: भारत में ही असेंबल और निर्मित होने से घरेलू एयरोस्पेस इकोसिस्टम और रक्षा निर्माण क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा।
- लागत में कमी: बड़े पैमाने पर संयुक्त उत्पादन से दोनों देशों के लिए प्रति जेट लागत में कमी आएगी और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति सुनिश्चित रहेगी।
- रखरखाव में आसानी: भारतीय वायुसेना पहले से ही भारी संख्या में रूसी मूल के लड़ाकू विमानों का संचालन करती है, जिससे इसके इंफ्रास्ट्रक्चर को अपनाना आसान होगा।
भारत के लिए इसके क्या रणनीतिक मायने हैं?
भारत के लिए यह प्रस्ताव तकनीकी और समय दोनों नजरियों से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत का अपना 5वीं पीढ़ी का स्वदेशी फाइटर जेट AMCA विकास के चरणों में है और इसके पूर्ण उत्पादन व बेड़े में शामिल होने में समय लगेगा।
- क्षमता की कमी को पूरा करना: स्वदेशी AMCA के पूरी तरह तैयार होने तक Su-57 एक मजबूत अंतरिम विकल्प बन सकता है, जिससे वायुसेना की 5वीं पीढ़ी की तकनीकी जरूरतें तुरंत पूरी हो सकती हैं।
- क्षेत्रीय संतुलन: पड़ोसी देशों द्वारा अपनी वायुसेना में नई तकनीकों और उन्नत विमानों को शामिल किए जाने के बीच, भारत के पास एक विश्वसनीय और आधुनिक स्टील्थ प्लेटफॉर्म उपलब्ध रहेगा।
- तकनीकी आत्मनिर्भरता: पूर्ण टेक्नोलॉजी ट्रांसफर मिलने से भारत के स्वदेशी फाइटर जेट कार्यक्रमों को भी महत्वपूर्ण तकनीकी अनुभव और शोध में मदद मिल सकती है।