देश में चीनी की लगातार बढ़ती कीमतों और त्योहारी सीजन में महंगाई की मार झेल रहे उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उद्योग जगत की शीर्ष संस्था इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने स्पष्ट किया है कि भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है।
ISMA ने उम्मीद जताई है कि आगामी दिनों में बाजार में सुधारात्मक कदम देखने को मिलेंगे।
- Published: 24 Aug 2026, 04:35 PM IST
- Last Updated: 24 Aug 2026, 04:35 PM IST
घरेलू बाजार में चीनी के दाम चढ़ने से जहां आम उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ रहा था, वहीं चीनी उद्योग की प्रमुख संस्था आईएसएमए ने बाजार की वास्तविक स्थिति साफ कर दी है। संस्था ने साफ शब्दों में कहा है कि देश में चीनी का भरपूर स्टॉक मौजूद है और कमी की कोई गुंजाइश नहीं है। बाजार में बन रहे कृत्रिम दबाव के खत्म होते ही आपूर्ति सामान्य हो जाएगी और कीमतों में नरमी का दौर शुरू होगा।
सट्टेबाजी और भारी भंडारण से बढ़ीं कीमतें
आईएसएमए के अध्यक्ष नीरज शिरगाओकर ने कीमतों में आए हालिया उछाल के कारणों को विस्तार से साझा किया। उन्होंने बताया कि यह तेजी मांग और आपूर्ति के वास्तविक असंतुलन से नहीं, बल्कि बाजार में चल रही सट्टेबाजी और कुछ व्यापारियों द्वारा किए जा रहे अत्यधिक भंडारण (होर्डिंग) की वजह से आई है। इस जमाखोरी के कारण बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बना और खुदरा कीमतें ऊपर चढ़ गईं।
मौसम की चुनौतियों से प्रभावित हुआ उत्पादन
संस्था के अनुसार, जमाखोरी के साथ-साथ मौसमी प्रतिकूलताओं ने भी बाजार में मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया। बेमौसम बारिश, अत्यधिक गर्मी और सूखे जैसी मौसम संबंधी चुनौतियों ने गन्ने की फसल को आंशिक रूप से प्रभावित किया, जिससे चीनी का कुल उत्पादन शुरुआती अनुमानों से थोड़ा कम रहा। हालांकि, यह कमी इतनी बड़ी नहीं थी कि देश में संकट खड़ा हो, लेकिन सटोरियों ने इसे भुनाने का प्रयास किया।
उपभोक्ताओं को जल्द मिलेगी राहत
आईएसएमए ने उम्मीद जताई है कि आगामी दिनों में बाजार में सुधारात्मक कदम देखने को मिलेंगे। संस्था का कहना है कि सरकार और संबंधित एजेंसियों की निगरानी के चलते जमाखोरी पर लगाम लगेगी और सट्टेबाजी की गतिविधियों में गिरावट आएगी। देश के पास घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, जिससे आने वाले हफ्तों में खुदरा कीमतें स्थिर होकर नीचे की ओर रुख करेंगी।