Sep 13, 2026 11:54 am ISTलाइव हिन्दुस्तान

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस पर अधिकार को लेकर लड़ाई मची हुई है। ममता बनर्जी गुट ने पार्टी के चुनाव चिन्ह पर अपना दावा किया है। वहीं दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने भी इस पर अपना दावा ठोका है। शनिवार को चुनाव आयोग ने दोनों धड़ों से मुलाकात की।

ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी, दोनों का टीएमसी पर दावा, चुनाव आयोग ने की मुलाकात
पश्चिम बंगाल की सत्ता पर एकछत्र राज करने वाली ममता बनर्जी अपनी पार्टी को बचाने में लगी हुई हैं। ममता गुट और ऋतब्रत बनर्जी गुट के बीच बढ़ते तनाव के देखते हुए चुनाव आयोग ने एक बार फिर से दोनों को बात करने और अपने-अपने पक्ष में सबूत देने के लिए आमंत्रित किया था। शनिवार को हुई इस बैठक में ममता गुट की तरफ से पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पहुंचा, जिन्होंने साफ किया कि पार्टी में संगठनात्मक स्तर पर कोई भी विवाद नहीं है।
नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा उप चुनाव के पहले दोनों धड़ों के बीच मची तना तनी की स्थिति के बीच ममता बनर्जी की तरफ से पांच वरिष्ठ सांसदों का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग पहुंचा। इसमें डेरेक ओ 'ब्रायन, कल्याण बनर्जी, सागरिका घोष, साकेत गोखले और अधिवक्ता अभिनव सिंह शामिल थे।
निर्वाचन आयोग से मुलाकात के बाद ममता बनर्जी गुट की तरफ से जारी बयान के मुताबिक उसने आयोग से कहा कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को लेकर कोई विवाद नहीं है। विरोधी गुट का समर्थन करने वाले विधायकों ने केवल पांच महीने पहले ही टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ा था, जबकि दूसरी तरफ उस वक्त ममता बनर्जी ने पार्टी के चुनाव चिन्ह पर हस्ताक्षर किए थे।
ममता बनर्जी के गुट ने चुनाव आयोग को दिए सबूत
ममता बनर्जी गुट ने दावा किया कि आज जो लोग अलग होकर पार्टी पर अपना अधिकार जता रहे हैं। उनको चुनाव के समय पार्टी फंड से 25-25 लाख रुपए भेजे गए थे। प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को बताया कि पार्टी में संगठनात्मक चुनाव हर पांच साल में लगातार होते रहे हैं और इन चुनावों के जरिए अध्यक्ष और उसके बाद राष्ट्रीय कार्यसमिति का चुनाव किया गया। ये चुनाव 2006, 2011, 2017 और 2022 में हुए थे। तब पार्टी पर दावा करने वाले लोग कहीं नहीं थे।
बयान में कहा गया कि यह मामला ''ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी'' और ''कुछ गद्दारों के समूह'' के बीच है। इसमें विरोधी गुट होने दावा करने वालों के लिए ''गद्दारों'' शब्द का इस्तेमाल किया गया।
ऋतब्रत बनर्जी गुट ने भी रखा अपना पक्ष
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद राष्ट्रीय चर्चा में आए ऋतब्रत बनर्जी की ने भी पार्टी पर अपना दावा ठोका। बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत ने आयोग के साथ हुई अपनी बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने आयोग के सामने अपनी बात रख दी है और उन्हें भरोसा है कि टीएमसी का चुनाव चिन्ह उन्हें ही मिलेगा। उन्होंने कहा, "'हमने अपनी बातें रख दी हैं। हम आज ही कुछ और दस्तावेज जमा करेंगे। अब हमें इस सर्वोच्च संस्था के फैसले का इंतजार करना होगा।''
उन्होंने कहा कि उनके गुट ने आयोग से विशेष रूप से अनुरोध किया है कि वह इस मामले पर 16 सितंबर से पहले फैसला करें, क्योंकि यह पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख है।
गौरतलब है कि आने वाले उपचुनावों के कारण संगठनात्मक विवाद और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि उम्मीदवारों को तय समय सीमा में नामांकन दाखिल करना है।
तृणमूल कांग्रेस की टूट की टाइमलाइन
दरअसल, यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी की करारी हार के साथ शुरू हुआ था। 4 मई को आए नतीजों के बाद पार्टी में असंतोष की भावना उभरने लगी थी। 6 मई को सामने आए घटनाक्रमों ने साफ किया कि तमाम नेता हार का ठीकरा अभिषेक बनर्जी के सिर पर फोड़ते हुए नजर आ रहे थे। इसके बाद हुए घटनाक्रम में नए नवेले विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की और यहां से बगावत की खबरें तेज हो गईं।
टीएमसी की टूट में आखिरी कील उस वक्त लगी, जब ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने शिकायत की कि उन्होंने नेता प्रतिपक्ष के लिए हस्ताक्षर नहीं किए हैं। यह फर्जी तरीके से किए गए हैं। इसके बाद जांच शुरू हुई और ममता बनर्जी ने इन दोनों को पार्टी से बाहर निकाल दिया। इसके बाद तो टूट का सिलसिला शुरू हो गया। एक समय पर प्रधानमंत्री पद की दावेदार मानी जा रही ममता बनर्जी का किला भरभराकर ढ़ह गया। 2 जून को हुई खुली बगावत के बाद विधायक से लेकर सांसद एक-एक करके पार्टी से टूटते चले गए। आलम यह रहा कि लंबे समय तक पश्चिम बंगाल की गद्दी पर राज करने वाली ममता बनर्जी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद तक बागियों के हाथों गंवा बैठीं।
वर्तमान में दोनों धड़ों के बीच में पार्टी के ऊपर दावे की लड़ाई जारी है। गेंद इस समय चुनाव आयोग के पाले में हैं।