छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने अप्रैल में बड़ा कदम उठाया था. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में UCC की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया था.
छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने अप्रैल में बड़ा कदम उठाया था. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में UCC की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया था.
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Bhupesh Baghel
छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज होे गई है. कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शनिवार को UCC का कड़ा विरोध किया. उन्होंने कहा कि अगर राज्य में इसे लागू किया जाता है तो इससे सबसे अधिक नुकसान आदिवासी समुदाय को उठाना पड़ सकता है.
पत्रकारों से बात करते हुए बघेल ने कहा कि वह मुख्यमंत्री के तौर पर भी इम मुद्दे पर जिंता जाहिर कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि मैंने तब भी कहा था कि UCC लागू होने पर आदिवासियों को सबसे अधिक नुकसान होगा. ऐसा नहीं होना चाहिए. बघेल की यह टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है, जब छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा UCC को लेकर गठित हाईलेवल समिति ने राज्यभर में लोगों और विभिन्न संगठनों से राय लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
UCC पर जनता की राय जुटा रही समिति
UCC समिति के सदस्य शत्रुघ्न सिंह ने एक दिन पहले यानी शुक्रवार को बताया कि हाईलेवल समिति ने राज्यव्यापी जनसंपर्क और संवाद कार्यक्रम शुरू किया. अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर स्थानीय नेताओं, राजनीतिक दलों, धार्मिक प्रतिनिधियों और संस्थाओं सहित विभिन्न वर्गों के लोगों की राय ले रही है. शत्रुघ्न के अनुसार, सरकार ने UCC की समीक्षा और उसके संभावित प्रारूप को तैयार करने के लिए हाईलेवल समिति का गठन किया है. शुरुआती चरण में समिति विभिन्न संस्थानों के प्रमुखों और उप प्रमुखों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और धार्मिक नेताओं से उनके विचार जान रही है.
उन्होंने कहा कि अलग-अलग पक्षों से प्राप्त हुए सुझावों और आपत्तियों पर समिति विचार कर रही है, जिसके बाद छत्तीसगढ़ की सामाजिक और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए UCC के संभावित मसौदे का स्वरूप तय किया जाएगा.
क्या है छत्तीसगढ़ सरकार का UCC प्लान?
छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने अप्रैल में बड़ा कदम उठाया था. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में UCC की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया था. सरकार ने UCC का मसौदा तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने को मंजूरी दी. इसके साथ ही महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से संपत्ति पंजीकरण शुल्क में 50 प्रतिशत कटौती की घोषणा भी की गई.
विवाह से लेकर विरासत तक बदल सकता है कानूनी ढांचा
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य अलग-अलग धर्मों में लागू व्यक्तिगत कानूनों की जगह विवाह, तलाक, विरासत और पारिवारिक मामलों से जुड़े नियमों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है. राज्य सरकार का तर्क है कि इससे कानूनी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल हो सकती है तथा सभी नागरिकों को समान अधिकार सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. खासतौर पर महिलाओं के अधिकारों और उनके कानूनी संरक्षण को मजबूत करने की बात सरकार की ओर से कही गई है.
हालांकि, छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बहुल और सामाजिक रूप से विविध राज्य में UCC को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं. आदिवासी समुदायों के पारंपरिक रीति-रिवाजों, सामाजिक व्यवस्थाओं और प्रथागत कानूनों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा जारी है.
आदिवासी अधिकारों पर बहस महत्वपूर्ण
भूपेश बघेल के विरोध के बाद UCC को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है. दूसरी ओर, समिति का कहना है कि अंतिम प्रारूप तैयार करने से पहले राज्य के अलग-अलग समुदायों और संस्थाओं के विचारों को सुना जाएगा. फिलहाल समिति की ओर से राय और सुझाव जुटाने की प्रक्रिया जारी है. इन सभी सुझावों पर विचार करने के बाद ही छत्तीसगढ़ में UCC के संभावित स्वरूप को अंतिम रूप दिए जाने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा.