UNSC की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत करेगा दावेदारी, जयशंकर शुरू करेंगे अभियान

Published on 13 जुल॰ 2026

भारत आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 2028-29 के कार्यकाल के लिए गैर-स्थायी सदस्यता की अपनी दावेदारी का औपचारिक अभियान शुरू करेगा. विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में #India4UNSC 2028-29: Peace, Planet, Progress अभियान की शुरुआत करेंगे. इस दौरान वो संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात करेंगे.

भारत ऐसे समय यह अभियान शुरू कर रहा है जब दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रही है. नई दिल्ली का प्रयास खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति और विकासशील देशों यानी Global South की मजबूत आवाज के रूप में स्थापित करने का है.

ताजिकिस्तान से मुकाबला

संयुक्त राष्ट्र महासभा में 2027 में होने वाले चुनाव में भारत एशिया-प्रशांत समूह की एक सीट के लिए ताजिकिस्तान से मुकाबला करेगा. अगर भारत चुनाव जीतता है तो वो 2028-29 के कार्यकाल के लिए नौवीं बार सुरक्षा परिषद का गैर-स्थायी सदस्य बनेगा.

2010 में हुए चुनाव में मिले थे 187 वोट

भारत इससे पहले 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92, 2011-12 और 2021-22 में सुरक्षा परिषद का निर्वाचित सदस्य रह चुका है. 2010 में हुए चुनाव में भारत को 192 में से 187 वोट मिले थे, जो हाल के वर्षों में किसी भी उम्मीदवार के लिए सबसे मजबूत समर्थन में से एक था.

हालांकि भारत की यह कवायद केवल 2 साल के लिए गैर-स्थायी सदस्य बनने तक सीमित नहीं है. नई दिल्ली इस अभियान के जरिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की अपनी मांग को भी नई धार देगी. भारत का लगातार कहना रहा है कि 1945 में बनी 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद आज की वैश्विक हकीकत का प्रतिनिधित्व नहीं करती. इसलिए स्थायी और गैर-स्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार जरूरी है, ताकि विकासशील देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में उचित प्रतिनिधित्व मिल सके.

UNSC में सुधार की मांग

हाल ही में इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता दोहराई थी. उन्होंने कहा था कि दुनिया तेजी से बदल रही है और विकासशील देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी मिलनी चाहिए. प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि UNSC में सुधार अब और टाले नहीं जा सकते.

कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत का यह अभियान केवल एक चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है. एक तरफ भारत 2028-29 के लिए गैर-स्थायी सदस्यता हासिल करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर वो सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार के अपने एजेंडे को भी वैश्विक समर्थन दिलाने की कोशिश करेगा.

शिवांग माथुर

शिवांग माथुर

शिवांग माथुर टीवी 9 भारतवर्ष में एसोसियेट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं.

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