UNSC में रूस-चीन ने ईरान से निभाई दोस्ती, अमेरिकी प्रतिबंध निगरानी प्रस्ताव को किया वीटो

Published on 18 सित॰ 2026

UNSC Veto Power: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ईरान को रूस और चीन का साथ मिला. स्थायी सदस्य होने के नाते दोनों देशों ने अमेरिकी प्रतिबंध निगरानी प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया है. इससे निगरानी समिति का कार्यकाल खत्म हो गया.

UNSC Veto Power: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ईरान को रूस और चीन का साथ मिला. स्थायी सदस्य होने के नाते दोनों देशों ने अमेरिकी प्रतिबंध निगरानी प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया है. इससे निगरानी समिति का कार्यकाल खत्म हो गया.

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Russia China use veto Power on US proposal to monitor sanctions

Russia China use veto Power

UNSC Veto Power: अमेरिका और ईरान में पिछले 6 महीनों से चल रहे संघर्ष के बीच ईरान के लिए बड़ी राहत है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ईरान को रूस और चीन का साथ मिला. स्थायी सदस्य होने के नाते दोनों देशों ने अमेरिकी प्रतिबंध निगरानी प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया है. इससे निगरानी समिति का कार्यकाल खत्म हो गया.

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, रूस और चीन ने ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों की निगरानी से जुड़े अमेरिका समर्थित प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो कर दिया. इस प्रस्ताव का मकसद ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों की निगरानी कर रहे संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों का कार्यकाल आगे बढ़ाना था. गुरुवार को हुए मतदान में प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी.

🚨 Russia and China used their #veto in the Security Council against the US-proposed draft resolution to extend the mandate of the Iran sanctions committee's panel of experts.

— IRIB (Islamic Republic of Iran Broadcasting) (@iribnews_irib) September 17, 2026

क्या था प्रस्ताव में?

इन प्रतिबंधों को पिछले साल पश्चिमी देशों ने दोबारा लागू किया था. पश्चिमी देशों ने ईरान पर 2015 के परमाणु समझौते की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था. हालांकि, ईरान लगातार इन आरोपों को खारिज करता रहा है. तेहरान का कहना है कि वह न तो परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है और न ही परमाणु समझौते का उल्लंघन किया है.

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11 सदस्यों ने पक्ष में किया वोट, पाकिस्तान ने बनाई दूरी

गुरुवार को सुरक्षा परिषद के 11 सदस्यों ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों की निगरानी के लिए मौजूदा जनादेश को आगे बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया. वहीं, पाकिस्तान और सोमालिया ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया. 

क्या बोला रूस?

मतदान के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के राजदूत वासिली नेबेंजिया ने पश्चिमी देशों को ईरान के मुद्दे पर सावधानी बरतने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की मौजूदा कार्रवाइयां फारस की खाड़ी में तनाव बढ़ा सकती हैं और संकट के समाधान की कोशिशों को और मुश्किल बना सकती हैं. उन्होंने पश्चिमी सहयोगियों से ऐसी कार्रवाइयों को रोकने की अपील की.

पिछले साल यूएन ने लिया था फैसला

सुरक्षा परिषद ने 2025 में ईरान पर लगे प्रतिबंधों के उल्लंघन की निगरानी और उसकी रिपोर्ट तैयार करने के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञों के एक पैनल को दोबारा नियुक्त करने का फैसला किया था. इस पैनल को जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई की सिफारिश करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी. हालांकि, सदस्य देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई और विशेषज्ञों की नियुक्ति नहीं हो सकी. इसके चलते 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर आम सहमति नहीं बन पाई.

ईरान ने जताया आभार

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के मिशन ने अमेरिकी प्रस्ताव का विरोध करने के लिए रूस और चीन का धन्यवाद किया. ईरान ने कहा कि दोनों देशों ने अपने रुख पर कायम रहते हुए इस प्रस्ताव के खिलाफ निर्णायक कदम उठाया. ईरान ने X पर एक पोस्ट में कहा कि रूस और चीन की कार्रवाई से अमेरिका और उसके सहयोगियों की उस कोशिश को नाकाम कर दिया गया, जिसमें सुरक्षा परिषद का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों के लिए करने का आरोप लगाया गया था.

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पिछले साल लागू हुए थे प्रतिबंध

ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध सितंबर 2025 में दोबारा लागू किए गए. फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने "स्नैपबैक" तंत्र का इस्तेमाल किया, जिसके बाद सुरक्षा परिषद के ईरान से जुड़े छह पुराने प्रस्ताव फिर से लागू हो गए. इन प्रस्तावों में ईरान के परमाणु और सैन्य कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाए गए थे.