UP में बेखौफ दवा माफिया: महाराष्ट्र और हिमाचल से आ रहा कोडीन सीरप, बिहार से बांग्लादेश तक फैला तस्करी का जाल;

Published on 13 अक्टू॰ 2026

UP में बेखौफ दवा माफिया: महाराष्ट्र और हिमाचल से आ रहा कोडीन सीरप, बिहार से बांग्लादेश तक फैला तस्करी का जाल;

उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में कड़े प्रशासनिक प्रतिबंधों और नशीली दवाओं पर रोक के दावों के बावजूद प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सीरप का अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकारी आदेशों को ताक पर रखकर दवा माफिया का यह सिंडिकेट आज भी बेहद सक्रिय और बेखौफ होकर काम कर रहा है। हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तराखंड जैसे दवा निर्माता राज्यों की फैक्ट्रियों से निकलने वाली प्रतिबंधित दवाओं की अवैध खेप सीधे एनसीआर के खुफिया ठिकानों पर पहुंचाई जा रही है और फिर उत्तर प्रदेश को एक बड़ा ट्रांजिट कॉरिडोर बनाकर इसे बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात और यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कराकर बांग्लादेश तक धड़ल्ले से खपाया जा रहा है। हाल ही में गाजियाबाद के साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र में एक गुप्त गोदाम पर हुई छापेमारी ने इस पूरे अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की परतें उधेड़ कर रख दी हैं।

कागजों पर दिल्ली का पता और साहिबाबाद में गोदाम: दो महीने से चल रहा था खेल

साहिबाबाद पुलिस और नारकोटिक्स विंग की संयुक्त टीम द्वारा सोमवार देर रात की गई बड़ी कार्रवाई में कोडीन युक्त सीरप की एक विशाल खेप बरामद की गई। प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि दवा माफिया कानूनी एजेंसियों और जांच अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए बेहद शातिराना तरीका अपना रहा था। कागजों और बिलिंग दस्तावेजों में इन दवाओं की डिलीवरी का आधिकारिक पता दिल्ली का दर्शाया गया था, जबकि असलियत में इसका अवैध भंडारण गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके में स्थित एक गोपनीय गोदाम में किया गया था। पुलिस की गहन तफ्तीश में खुलासा हुआ है कि तस्करों ने यह गोदाम महज दो महीने पहले ही किराए पर लिया था। पिछले साठ दिनों के भीतर इस गोदाम से लगातार बड़ी-बड़ी खेपें लोड करके सड़क मार्ग के जरिए बिहार, गुजरात, बंगाल और सीमावर्ती इलाकों से बांग्लादेश भेजी जा रही थीं। पुलिस की विशेष जांच टीम अब हिमाचल प्रदेश स्थित संबंधित दवा निर्माता कंपनी के हेडक्वार्टर और प्लांट पर जाकर अधिकारियों से विस्तृत रिकॉर्ड तलब करने और पूछताछ करने की तैयारी में है कि आखिर बिना वैध परमिट के इतनी बड़ी तादाद में प्रतिबंधित सीरप निजी हाथों में कैसे पहुंच रहा था।

एनडीपीएस एक्ट के दायरे में आने के बाद भी नहीं टूटी सप्लाई चेन

एक दौर था जब कोडीन युक्त सीरप और इससे मिलती-जुलती कई अन्य कफ दवाएं नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के सख्त दायरे से बाहर थीं। उस समय कोई भी आम नागरिक या युवा बिना किसी डॉक्टर के पर्चे के किसी भी सामान्य मेडिकल स्टोर से इन्हें आसानी से खरीद लेता था और इसकी खुली बिक्री पर कोई कानूनी रोक नहीं थी। इसी छूट का फायदा उठाकर दवा माफिया ने उत्तर प्रदेश और एनसीआर के जिलों में एक बेहद गहरी और संगठित सप्लाई चेन खड़ी कर ली थी। हालांकि, जैसे ही युवाओं में इसके नशे की लत की भयावहता को देखते हुए सरकार ने इसे एनडीपीएस कानून के कड़े दायरे में लाकर खुली बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया, तब से दुकानों पर इसकी सामान्य बिक्री तो रुक गई, लेकिन भूमिगत स्तर पर इसका काला कारोबार और तेजी से फलने-फूलने लगा। भारी मुनाफे के लालच में दवा सिंडिकेट ने इसे अंडरग्राउंड नेटवर्क में बदल दिया, जिसके चलते उत्तर प्रदेश और एनसीआर आज इन नशीली दवाओं की आपूर्ति का सबसे बड़ा ट्रांजिट हब बनकर उभरे हैं।

हापुड़ से गाजियाबाद तक पुराना है नेटवर्क: करोड़ों की खेप पहले भी हुई हैं बरामद

एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाके दवा माफिया के लिए हमेशा से मुफीद ठिकाने रहे हैं और यह कोई पहला मामला नहीं है जब इतनी भारी मात्रा में कोडीन सीरप की खेप पकड़ी गई हो। साल 2023 में हापुड़ जिले के मेरठ रोड पर स्थित एक फ्लाईओवर के नीचे ट्रांसपोर्ट कंपनी के ठिकाने पर छापा मारकर पुलिस ने प्रतिबंधित फेनसीड्रिल कफ सीरप की 15,200 बोतलें जब्त की थीं। इसके बाद साल 2024 में हाफिजपुर थाना क्षेत्र के भटियाना गांव के पास स्थित एक गोदाम से भी 800 बोतल कोडीन सीरप पकड़ा गया था। वहीं वर्ष 2025 में गाजियाबाद क्राइम ब्रांच ने एक ऐतिहासिक कार्रवाई करते हुए मेरठ रोड स्थित मछली गोदाम परिसर के पास एक ट्रांसपोर्ट हब पर छापा मारा था, जहां चार बड़े ट्रकों में छिपाकर रखी गई 3.40 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कफ सीरप की खेप बरामद कर आठ शातिर तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा गया था। हरियाणा के पलवल और नूंह मेवात जैसे क्षेत्रों में भी यह गोरखधंधा चरम पर था, जहां मेडिकल स्टोर से लेकर पान के खोखों तक यह नशीला सीरप बिकता था, जिस पर 2023 में बड़े मीडिया स्टिंग के बाद पुलिस ने सघन अभियान चलाकर 17 लोगों को दबोचा था और 5,688 बोतलें बरामद की थीं।

सख्त निगरानी के बावजूद पुलिस और ड्रग विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

पूर्व में कई बड़े खुलासों, एफआईआर और तस्करों की सिलसिलेवार गिरफ्तारियों के बावजूद माफिया का नेटवर्क इतनी मजबूती से कैसे काम कर रहा है, यह स्थानीय पुलिस प्रशासन और राज्य औषधि नियंत्रण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जिस तरह से हिमाचल और महाराष्ट्र की फैक्ट्रियों से गाड़ियां सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर कई राज्यों के चेकपोस्ट पार करते हुए एनसीआर के गोदामों तक पहुंच जाती हैं, वह अंतरराज्यीय सीमाओं पर निगरानी की पोल खोलता है। बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के कारण वहां नशे के विकल्प के तौर पर कोडीन सीरप की मांग आसमान छू रही है, जिसका सीधा फायदा यह माफिया उठा रहा है और तीन से चार गुना ऊंचे दामों पर इसे बिहार और बांग्लादेश की सीमाओं तक पहुंचा रहा है। साहिबाबाद पुलिस का कहना है कि वे इस मामले में न केवल स्थानीय स्तर पर माल छिपाने वालों बल्कि पूरे नेटवर्क के सरगनाओं, ट्रांसपोर्टरों और उत्पादक कंपनियों के खिलाफ सख्त गैंगस्टर और एनडीपीएस धाराओं के तहत कार्रवाई करने जा रहे हैं।