'खेल के बीच नहीं बदल सकते नियम', UP ITI इंस्ट्रेक्टर भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश - sc no midprocess rule change in up iti instructor recruitment

Published on 26 जुल॰ 2026

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में 2014-15 की आईटीआई इंस्ट्रक्टर भर्ती प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। ...और पढ़ें

UP ITI इंस्ट्रेक्टर भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश। (एएनआई)

UP ITI इंस्ट्रेक्टर भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश। (एएनआई)

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने आईटीआई इंस्ट्रक्टर भर्ती पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

  2. चयन समिति बीच में भर्ती नियम या कटऑफ अंक नहीं बदल सकती।

  3. 200 से अधिक उम्मीदवारों को नियुक्ति का लाभ मिलेगा।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में 2014-2015 की आईटीआई इंस्ट्रेक्टर (प्रशिक्षक) भर्ती प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया है।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि चयन समिति बीच में भर्ती नियम या कटआफ अंक नहीं बदल सकती। इसके साथ ही कोर्ट ने पात्र उम्मीदवारों पर नये सिरे से विचार करने और नियुक्ति देने का आदेश दिया है।

खेल के बीच नहीं बदल सकते नियम- सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि चयन समिति/एसओयूपी द्वारा खेल के नियमों को बीच में बदल कर कई उम्मीदवारों को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। सर्वोच्च न्यायालय ने पीड़ित उम्मीदवारों को उत्तर प्रदेश औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए दो सप्ताह में संपर्क करने को कहा है।

फैसले से 200 से ज्यादा उम्मीदवारों को लाभ की उम्मीद

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से 200 से ज्यादा उम्मीदवारों को लाभ होने की उम्मीद है। उम्मीदवारों के हक में ये फैसला न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और एजी मसीह की पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल अपीलों को स्वीकार करते अरविंद कुमार एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश एवं अन्य मामले में सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मामला उत्तर प्रदेश औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षकों की 2014-2015 की भर्ती से संबंधित था। पीठ ने फैसले में कहा कि समिति/एसओयूपी बीच में खेल के नियम बदलकर कई उम्मीदवारों का नुकसान नहीं कर सकती।

चूंकि राज्य की कार्रवाई में मनमानापन रहा है, जिससे चयन प्रक्रिया (जिसमें अपील करने वालों का चयन न होना भी शामिल है) प्रभावित हुआ है। कोर्ट ने कहा कि इसलिए 2014 के नियमों की वैधता पर जाए बिना, अपील करने वालों को राहत देने के सवाल पर विचार करना पर्याप्त है।

कोर्ट ने आदेश दिया कि अपील दाखिल करने वाली पंजीकृत सोसाइटी के सदस्य, अन्य अपीलकर्ता और पक्षकार बनाए गए उम्मीदवार दो सप्ताह के भीतर इस फैसले की एक प्रति लेकर नियुक्ति प्राधिकारी के पास जाएंगे।

नियुक्ति चाहने वाले रजिस्टर्ड सोसाइटी के सदस्यों को नियुक्ति करने वाले अधिकारी के सामने ऐसे दस्तावेज पेश करने होंगे जिनसे यह साबित हो सके कि जिस तारीख को उस सोसाइटी ने रिट याचिका दायर की थी, उस तारीख को उनकी सदस्यता वैध थी।

अपील करने वाले (जिसमें रजिस्टर्ड सोसाइटी के सदस्य भी शामिल हैं) और मामले में शामिल किये गए उम्मीदवारों पर संबंधित डिसिप्लिन/ट्रेड में अभी खाली पदों पर भर्ती के लिए विचार किया जाएगा।

अगर किसी वजह से योग्य अपीलकर्ताओं की संख्या उपलब्ध खाली पदों की संख्या से ज्यादा हो जाती है तो संबंधित डिस्प्लिन/ट्रेड में उनके लिए अतिरिक्त पद बनाए जाएं।

कोर्ट ने निर्देश दिया है कि संपर्क करने के चार महीने के भीतर नियुक्तियां दी जाएं (प्रास्पेक्टिव प्रभाव से), बशर्ते इस बात की और जांच कर ली जाए कि अपील करने वालों के पास चयन के लिए आवेदन करने की तारीखों पर जरूरी योग्यताएं थीं। अगर किसी अपील करने वाले के नियुक्ति से इनकार किया जाता है, तो कारण सहित बिना देरी आदेश जारी करना होगा।

कोर्ट ने कहा चूंकि अपील करने वालों, रजिस्टर्ड सोसाइटी के सदस्यों और मामले में शामिल किये गए उम्मीदवारों का इंटरव्यू नहीं लिया गया था, इसलिए प्रतिवादी जल्द से जल्द उम्मीदवारों का इंटरव्यू लेंगे। एक बार नियुक्ति होने के बाद, अपील करने वाले सेवा के दौरान सभी लाभों (पिछली बकाया सैलरी, सीनियरिटी, प्रमोशन को छोड़कर) के हकदार होंगे।

पेंशन के लिए भी पात्र होंगे यदि, नियुक्ति के बाद, वे मौजूदा नियमों के अनुसार पेंशन के लिए योग्य पाए जाते हैं। यदि रिटायरमेंट के समय इंस्ट्रक्टर को ग्रेज्युटी का भुगतान किया जाता है, तो अपील करने वाले भी इसके लिए योग्य होने पर, उसके हकदार होंगे।