UP MLA Fund Report 2023-24: उत्तर प्रदेश में विधायक निधि के माध्यम से सड़क, नाली, इंटरलॉकिंग, पेयजल, विद्यालय भवन, सामुदायिक केंद्र, स्वास्थ्य सुविधाओं और सार्वजनिक उपयोग के दूसरे निर्माण कार्य कराए जाते हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में प्रदेश के सभी जिलों में हजारों विकास कार्यों की संस्तुति की गई। इनमें से बड़ी संख्या में कार्य स्वीकृत हुए, जबकि कई प्रस्ताव प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति के स्तर पर लंबित रहे।
उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास विभाग के विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि पोर्टल पर उपलब्ध राज्यस्तरीय डैशबोर्ड के अनुसार अठारहवीं विधानसभा के कार्यकाल में करीब 34,577 विकास कार्य अनुशंसित किए गए। इनमें से लगभग 28,775 कार्य स्वीकृत हुए। पोर्टल पर गत वर्ष की अवशेष राशि सहित करीब 2,336 करोड़ रुपये उपलब्ध धनराशि और लगभग 1,895.32 करोड़ रुपये की स्वीकृत धनराशि दर्ज है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि विधायक निधि प्रदेश में छोटे और मध्यम स्तर के स्थानीय विकास कार्यों के वित्तपोषण का एक बड़ा माध्यम है। हालांकि, जिला स्तर पर कार्यों की संख्या, स्वीकृति की रफ्तार और निर्माण की प्रगति में काफी अंतर दिखाई देता है।
विधायक निधि योजना क्या है?
विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि योजना के तहत विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में जनहित के विकास कार्यों की संस्तुति करते हैं। विधायक स्वयं किसी निर्माण एजेंसी को सीधे भुगतान नहीं करते। उनकी संस्तुति जिला प्रशासन के पास जाती है।
इसके बाद संबंधित विभाग या कार्यदायी संस्था प्रस्ताव का तकनीकी परीक्षण, लागत का आकलन और स्थल सत्यापन करती है। प्रशासनिक तथा वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद ही धनराशि जारी होती है।
इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से पांच चरण होते हैं—
- विधायक द्वारा विकास कार्य की संस्तुति
- जिला प्रशासन द्वारा प्रस्ताव की जांच
- तकनीकी लागत और स्थल परीक्षण
- प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति
- निर्माण, निरीक्षण और भुगतान
इसी कारण किसी जिले में अनुशंसित कार्यों और वास्तव में पूर्ण कार्यों की संख्या अलग-अलग हो सकती है।
UP MLA Fund Report 2023-24 में किन कार्यों पर खर्च हुई विधायक निधि?
विधायक निधि से सामान्यतः स्थायी प्रकृति के जनोपयोगी कार्य कराए जाते हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में जिलों से भेजे गए अधिकांश प्रस्ताव निम्न श्रेणियों से संबंधित रहे—
सड़क और संपर्क मार्ग
ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में सीसी रोड, इंटरलॉकिंग मार्ग, खड़ंजा, संपर्क मार्ग और क्षतिग्रस्त रास्तों के निर्माण के लिए बड़ी संख्या में प्रस्ताव दिए गए।
कई विधानसभा क्षेत्रों में विधायक निधि का प्रमुख हिस्सा सड़कों और गलियों पर खर्च किया गया, क्योंकि स्थानीय स्तर पर जनता की सबसे अधिक मांग इन्हीं कार्यों को लेकर रहती है।
नाली और जल निकासी
जलभराव से प्रभावित गांवों और शहरी मोहल्लों में नाली निर्माण, भूमिगत पाइप, जल निकासी व्यवस्था और पुलिया निर्माण के कार्यों को भी विधायक निधि से मंजूरी मिली।
शिक्षा से जुड़े निर्माण कार्य
सरकारी विद्यालयों में अतिरिक्त कक्ष, चहारदीवारी, शौचालय, इंटरलॉकिंग, फर्नीचर और पुस्तकालय जैसी सुविधाओं के लिए भी विधायक निधि का उपयोग किया गया।
पेयजल परियोजनाएं
हैंडपंप, सबमर्सिबल पंप, पानी की टंकी, आरओ प्लांट और पाइप पेयजल व्यवस्था से जुड़े छोटे कार्य भी विधायक निधि के महत्वपूर्ण हिस्से रहे।
सामुदायिक और सार्वजनिक भवन
बारातघर, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, यात्री शेड, अंत्येष्टि स्थल और सार्वजनिक बैठने के स्थानों के निर्माण के लिए भी विधायकों ने संस्तुतियां भेजीं।
स्वास्थ्य सुविधाएं
कुछ जिलों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, एंबुलेंस सुविधा, अस्पताल उपकरण और मरीजों के लिए प्रतीक्षालय से जुड़े प्रस्ताव भी स्वीकृत हुए।
जिला-वार रिपोर्ट में कौन-कौन से आंकड़े दर्ज होते हैं?
MLA LADS UP पोर्टल की जिला-वार कार्य रिपोर्ट में हर जिले के लिए निम्न जानकारी दी जाती है—
- कुल अनुशंसित कार्य
- 45 दिन के भीतर स्वीकृति के लिए लंबित कार्य
- 45 से 60 दिन तक लंबित कार्य
- 60 दिन से अधिक समय से लंबित कार्य
- कुल लंबित प्रस्ताव
- स्वीकृत कार्य
- प्रगतिशील कार्य
- पूर्ण कार्य
- निरस्त अथवा अस्वीकृत कार्य
इन आंकड़ों के आधार पर किसी जिले के विधायक निधि प्रबंधन की वास्तविक स्थिति समझी जा सकती है।
केवल अधिक कार्यों की संस्तुति को बेहतर प्रदर्शन नहीं माना जा सकता। यह देखना भी जरूरी है कि प्रस्ताव कितनी तेजी से स्वीकृत हुए, कितने काम जमीन पर शुरू हुए और कितने निर्धारित समय में पूरे किए गए।
बड़े जिलों में अधिक कार्य होना स्वाभाविक
लखनऊ, कानपुर नगर, प्रयागराज, वाराणसी, आगरा, गोरखपुर, मेरठ, बरेली, गाजियाबाद और सहारनपुर जैसे बड़े जिलों में विधानसभा क्षेत्रों की संख्या अधिक है। इसलिए इन जिलों में विधायक निधि से अनुशंसित कार्यों की कुल संख्या छोटे जिलों के मुकाबले अधिक होना स्वाभाविक है।
उदाहरण के तौर पर जिस जिले में नौ या दस विधानसभा क्षेत्र हैं, वहां कुल उपलब्ध विधायक निधि उस जिले से कई गुना अधिक होगी जहां केवल दो विधानसभा सीटें हैं।
इसलिए जिलों की तुलना केवल कुल कार्यों के आधार पर नहीं की जानी चाहिए। अधिक सटीक तुलना के लिए निम्न संकेतकों को देखना जरूरी है—
- प्रति विधानसभा क्षेत्र अनुशंसित कार्य
- प्रति विधायक स्वीकृत धनराशि
- स्वीकृति प्रतिशत
- पूर्णता प्रतिशत
- औसत कार्य लागत
- 60 दिन से अधिक लंबित प्रस्तावों की संख्या
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में विधायक निधि
सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, हापुड़, बुलंदशहर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर और संभल जैसे पश्चिमी जिलों में ग्रामीण संपर्क मार्ग, नाली, इंटरलॉकिंग और सामुदायिक भवनों से जुड़े प्रस्ताव प्रमुख रहते हैं।
शहरी विस्तार वाले गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर और मेरठ में विधायक निधि के कामों की प्रकृति अपेक्षाकृत अलग हो सकती है। इन जिलों में शहरी सड़क, जल निकासी, सार्वजनिक शेड और विद्यालयों के बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रस्ताव अधिक रहते हैं।
वहीं सहारनपुर, बिजनौर, शामली और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों में ग्रामीण आबादी और कृषि क्षेत्र अधिक होने के कारण गांवों के संपर्क मार्ग तथा जल निकासी से जुड़े कार्यों की मांग ज्यादा रहती है।
अवध क्षेत्र में विधायक निधि की प्राथमिकताएं
लखनऊ, सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, उन्नाव, अमेठी, सुलतानपुर, अयोध्या, बाराबंकी, बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा और बलरामपुर में ग्रामीण सड़क, इंटरलॉकिंग, स्कूल भवन और नाली निर्माण विधायक निधि की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहते हैं।
लखनऊ जैसे शहरी जिले में प्रति कार्य लागत अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। दूसरी ओर श्रावस्ती, बलरामपुर और बहराइच जैसे पिछड़े जिलों में छोटे ग्रामीण निर्माण कार्यों की संख्या अधिक लेकिन औसत लागत कम हो सकती है।
पूर्वांचल में विधायक निधि के काम
वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़, जौनपुर, गाजीपुर, बलिया, मऊ, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही और अंबेडकरनगर जैसे जिलों में विधायक निधि से ग्रामीण संपर्क, नाली, सार्वजनिक भवन और शिक्षा से जुड़े कार्य बड़ी संख्या में कराए जाते हैं।
पूर्वांचल के कई जिलों में घनी आबादी और गांवों की अधिक संख्या के कारण छोटी-छोटी परियोजनाओं की मांग अधिक रहती है। यही वजह है कि यहां कामों की संख्या अधिक होने के बावजूद औसत लागत कई बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश या बड़े शहरी जिलों से कम रह सकती है।
बुंदेलखंड में किन कार्यों की जरूरत अधिक?
झांसी, जालौन, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट में विधायक निधि के कामों की प्राथमिकता दूसरे क्षेत्रों से कुछ अलग हो सकती है।
बुंदेलखंड में पेयजल, तालाब, जल संरक्षण, संपर्क मार्ग, स्कूल भवन और सार्वजनिक सुविधाओं की जरूरत अधिक रहती है। हालांकि बड़े जलाशय या व्यापक पेयजल परियोजनाएं आमतौर पर विधायक निधि की सीमित राशि से संभव नहीं होतीं। इसलिए विधायक निधि यहां छोटे और स्थानीय स्तर के निर्माण कार्यों में अधिक उपयोगी होती है।
रुहेलखंड और मध्य यूपी की स्थिति
बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, रामपुर, मुरादाबाद, संभल तथा अमरोहा में सड़क, नाली और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य प्रमुख रहते हैं।
कानपुर नगर, कानपुर देहात, औरैया, इटावा, फर्रुखाबाद, कन्नौज और मैनपुरी में ग्रामीण तथा शहरी दोनों प्रकार के प्रस्ताव शामिल होते हैं। कानपुर नगर जैसे बड़े शहर में विधायक निधि का उपयोग शहरी बुनियादी सुविधाओं पर ज्यादा हो सकता है, जबकि कानपुर देहात और औरैया में ग्रामीण संपर्क मार्ग और पंचायत स्तरीय कार्य अधिक महत्वपूर्ण रहते हैं।
ब्रज क्षेत्र में विधायक निधि
आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, एटा, कासगंज, अलीगढ़ और हाथरस में सड़क, नाली, धार्मिक तथा पर्यटन स्थलों के आसपास सार्वजनिक सुविधाएं, विद्यालय भवन और सामुदायिक निर्माण प्रमुख जरूरतों में शामिल हैं।
आगरा और मथुरा जैसे पर्यटन प्रधान जिलों में स्थानीय जनसंख्या के साथ पर्यटकों की आवाजाही को देखते हुए सार्वजनिक सुविधाओं की मांग अधिक रहती है। हालांकि विधायक निधि से पर्यटन की बड़ी परियोजनाओं के बजाय सीमित लागत वाले स्थानीय निर्माण कार्य ही कराए जाते हैं।
अनुशंसित और स्वीकृत कार्यों में क्यों रहता है अंतर?
राज्यस्तर पर अनुशंसित कार्यों की संख्या स्वीकृत कार्यों से अधिक है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं—
तकनीकी खामी
यदि प्रस्ताव में भूमि, लंबाई, चौड़ाई, लागत या निर्माण स्थल की जानकारी स्पष्ट नहीं है तो कार्य स्वीकृति के लिए लंबित हो सकता है।
भूमि विवाद
जिस जमीन पर निर्माण प्रस्तावित है, यदि वह निजी, विवादित या किसी दूसरे विभाग की है तो कार्य को मंजूरी नहीं मिलती।
दोहरी स्वीकृति
कई बार एक ही कार्य किसी दूसरी सरकारी योजना, जिला योजना, पंचायत निधि या नगर निकाय की योजना में पहले से स्वीकृत होता है। ऐसी स्थिति में विधायक निधि का प्रस्ताव रोक दिया जाता है।
लागत सीमा से अधिक प्रस्ताव
विधायक निधि की उपलब्ध राशि से अधिक लागत वाले प्रस्ताव भी संशोधन के लिए वापस किए जा सकते हैं।
कार्यदायी संस्था की देरी
तकनीकी अनुमान तैयार करने, टेंडर जारी करने और निर्माण शुरू करने में कार्यदायी संस्थाओं की देरी के कारण प्रस्ताव लंबे समय तक लंबित रह सकते हैं।
केवल स्वीकृति नहीं, पूर्णता प्रतिशत भी महत्वपूर्ण
किसी विधायक या जिले के प्रदर्शन का आकलन केवल स्वीकृत कार्यों की संख्या से नहीं होना चाहिए। यदि बड़ी संख्या में काम स्वीकृत हैं लेकिन निर्माण अधूरा है तो जनता को वास्तविक लाभ नहीं मिलता।
अच्छे प्रदर्शन के लिए जरूरी है कि—
- प्रस्ताव समय पर भेजे जाएं
- तकनीकी अनुमान शीघ्र तैयार हो
- प्रशासनिक स्वीकृति निर्धारित समय में मिले
- पहली किस्त जारी होने के बाद काम शुरू हो
- निर्माण की नियमित निगरानी हो
- उपयोगिता प्रमाणपत्र समय पर जमा हो
- कार्य पूरा होने के बाद अंतिम भुगतान किया जाए
पोर्टल पर खर्च की गई राशि की जांच कैसे करें?
उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास विभाग का MLA LADS UP पोर्टल विधायक निधि से संबंधित कई प्रकार की रिपोर्ट उपलब्ध कराता है।
नागरिक पोर्टल पर जाकर—
- वित्तीय वर्ष चुन सकते हैं
- जिले का नाम चुन सकते हैं
- विधानसभा या विधायक का नाम चुन सकते हैं
- अनुशंसित तथा स्वीकृत कार्य देख सकते हैं
- खर्च और शेष धनराशि की जांच कर सकते हैं
- लंबित तथा पूर्ण कार्यों की स्थिति देख सकते हैं
यह व्यवस्था विधायक निधि के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।
2023-24 की विधायक निधि से क्या तस्वीर सामने आती है?
वर्ष 2023-24 की राज्यस्तरीय रिपोर्ट से तीन प्रमुख बातें सामने आती हैं।
पहली, प्रदेश में विधायक निधि से हजारों छोटे विकास कार्य प्रस्तावित किए गए। इससे स्पष्ट है कि स्थानीय बुनियादी ढांचे की जरूरतों को पूरा करने में यह योजना अहम भूमिका निभाती है।
दूसरी, अनुशंसित और स्वीकृत कार्यों की संख्या में अंतर बताता है कि बड़ी संख्या में प्रस्तावों को तकनीकी, प्रशासनिक या वित्तीय जांच से गुजरना पड़ा।
तीसरी, केवल धन आवंटित होना पर्याप्त नहीं है। विधायक निधि की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि स्वीकृत धनराशि कितनी तेजी से खर्च हुई और कितने काम जमीन पर पूरे हुए।
जिलेवार जवाबदेही क्यों जरूरी है?
हर जिले में जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी विधायक निधि के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी निर्माण की गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित करना है।
वहीं विधायक की जिम्मेदारी यह देखना है कि संस्तुतियां क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों पर आधारित हों और निधि सीमित इलाकों या प्रभावशाली लोगों तक केंद्रित न रहे।
जनता को भी विधायक निधि से संबंधित निम्न सवाल पूछने चाहिए—
- मेरे क्षेत्र में विधायक निधि से कौन-कौन से काम स्वीकृत हुए?
- इनकी लागत कितनी है?
- कार्यदायी संस्था कौन है?
- निर्माण कब शुरू हुआ?
- कार्य पूरा हुआ या अभी लंबित है?
- निर्माण की गुणवत्ता की जांच किसने की?
विधायक निधि में पारदर्शिता कैसे बढ़ सकती है?
विधायक निधि के पोर्टल पर जिला और विधायकवार आंकड़े उपलब्ध होना सकारात्मक कदम है। इसके बावजूद पारदर्शिता और बेहतर की जा सकती है।
हर स्वीकृत कार्य के साथ स्थल की तस्वीर, जीपीएस लोकेशन, स्वीकृति तिथि, निर्माण शुरू होने की तारीख, अपेक्षित पूर्णता तिथि और वर्तमान प्रगति दर्ज की जानी चाहिए।
इसके अलावा 60 दिन से अधिक लंबित प्रस्तावों की अलग सूची सार्वजनिक की जानी चाहिए। इससे यह पता चलेगा कि देरी विधायक स्तर पर है, जिला प्रशासन में है या कार्यदायी संस्था के स्तर पर।
प्रमुख राज्यस्तरीय आंकड़े
कुल उपलब्ध धनराशि: लगभग 2,336 करोड़ रुपये
कुल अनुशंसित कार्य: लगभग 34,577
कुल स्वीकृत कार्य: लगभग 28,775
कुल स्वीकृत धनराशि: लगभग 1,895.32 करोड़ रुपये
रिपोर्ट का आधार: उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास विभाग का MLA LADS UP पोर्टल
इन आंकड़ों को पोर्टल पर बाद में किए गए संशोधन, भुगतान और डेटा अपडेट के कारण परिवर्तित किया जा सकता है।
UP MLA Fund Report 2023-24 से जुड़े सवाल
विधायक निधि में एक विधायक को कितनी राशि मिलती है?
उत्तर प्रदेश में विधायक निधि की वार्षिक राशि शासन द्वारा निर्धारित की जाती है। इसमें पिछले वर्ष की बची राशि भी अगले वित्तीय वर्ष में शामिल हो सकती है।
क्या विधायक सीधे पैसा खर्च करते हैं?
नहीं। विधायक केवल काम की संस्तुति करते हैं। भुगतान जिला प्रशासन और कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से किया जाता है।
विधायक निधि से निजी काम कराया जा सकता है?
नहीं। विधायक निधि का उपयोग केवल सार्वजनिक और जनोपयोगी स्थायी कार्यों के लिए किया जा सकता है।
जिला-वार विधायक निधि का डेटा कहां देखें?
जिला-वार कार्य और खर्च का विवरण उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास विभाग के MLA LADS UP पोर्टल पर उपलब्ध है।
लंबित कार्यों का क्या अर्थ है?
लंबित कार्य वे प्रस्ताव हैं जिन्हें अभी तकनीकी, प्रशासनिक या वित्तीय स्वीकृति नहीं मिली है अथवा जिनकी जांच पूरी नहीं हुई है।
स्वीकृत और पूर्ण कार्य में क्या अंतर है?
स्वीकृत कार्य को प्रशासनिक अनुमति मिल चुकी होती है, जबकि पूर्ण कार्य का निर्माण समाप्त हो चुका होता है।
विधायक निधि के कार्य की शिकायत कहां करें?
निर्माण की गुणवत्ता, देरी या अनियमितता की शिकायत जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी या संबंधित कार्यदायी संस्था से की जा सकती है।
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