UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज? ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर मर्चेंट फीस लगाने की तैयारी में सरकार

Published on 17 जुल॰ 2026

UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज? ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर मर्चेंट फीस लगाने की तैयारी में सरकार

Upi Payment Image Credit source: Thomas Fuller/SOPA Images/LightRocket via Getty Images

भारत में डिजिटल क्रांति की रीढ़ बन चुके यूपीआई (UPI) को लेकर एक बड़ी खबर आ रही है. हालिया रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार बड़े कॉरपोरेट और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए 2,000 रुपए से अधिक के UPI पेमेंट्स पर मर्चेंट फीस (Merchant Fee) यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है. अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो यह देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में अब तक का सबसे बड़ा नीतिगत (Policy) बदलाव हो सकता है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर यूपीआई फीस को लेकर किस तरह की खबर सामने आई है.

एमडीआर लागू करने पर विचार

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार कि सरकार बड़े मर्चेंट्स (व्यापारियों) को किए जाने वाले UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने पर विचार कर रही है. यह फीस 0.5 प्रतिशत से कम हो सकती है और 2,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर लागू हो सकती है. MDR वह फीस है जो बैंक रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने के लिए लेते हैं. सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि अभी सरकार इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है और इस पर दो हफ्ते के अंदर फैसला होने की उम्मीद है. MDR सिर्फ बड़े मर्चेंट्स और बिजनेस पर ही लगाया जाएगा.

बढ़ रही है लगातार कॉस्ट

सरकार के एक दूसरे अधिकारी ने साफ किया कि इस प्रस्ताव में ग्राहकों से UPI इस्तेमाल करने के लिए पैसे लेने की बात शामिल नहीं है. अधिकारी ने कहा कि MDR का मकसद UPI ट्रांजैक्शन के लिए ग्राहकों से पैसे लेना नहीं है. बातचीत मर्चेंट-साइड इकोनॉमिक्स और पेमेंट इकोसिस्टम की सस्टेनेबिलिटी (टिकाऊपन) के बारे में हो रही है. अधिकारियों के अनुसार, UPI का तेजी से विस्तार हुआ है, लेकिन इसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने में बैंकों और पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़े दूसरे लोगों की कॉस्ट भी बढ़ रही है. दूसरे अधिकारी ने कहा कि माना जा रहा है कि इस मॉडल को समय के साथ कमर्शियली सस्टेनेबल (व्यावसायिक रूप से टिकाऊ) होना चाहिए.

केंद्र सरकार अभी 2,000 रुपए तक के कम वैल्यू वाले UPI ट्रांजैक्शन के लिए बैंकों और दूसरे पेमेंट सिस्टम ऑपरेटरों को इंसेंटिव देती है. डिजिटल पेमेंट प्लेटफ़ॉर्म को अलग-अलग तरह के लोगों के बीच अपनाने में तेज़ी लाने, फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन को मॉडर्न बनाने और फाइनेंशियल इन्क्लूजन (वित्तीय समावेशन) को बढ़ावा देने के लिए वित्त वर्ष 2022 में “RuPay डेबिट कार्ड और कम वैल्यू वाले BHIM-UPI ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए इंसेंटिव स्कीम” शुरू की गई थी.

क्या कहती है स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट

फाइनेंस पर बनी स्टैंडिंग कमिटी की 12 मार्च, 2026 की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल ट्रांजैक्शन को सस्ता और ज़्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए ज़ीरो MDR लागू किया गया था. हालांकि, इसमें चेतावनी दी गई थी कि MDR न होने से UPI इकोसिस्टम आर्थिक रूप से सस्टेनेबल नहीं रह गया है. कमिटी ने कहा कि भारत की डेमोग्राफिक्स, आर्थिक विकास और भौगोलिक पहुंच के कारण आने वाले सालों में UPI का विस्तार दस गुना हो सकता है. अनुमान है कि यह प्लेटफ़ॉर्म अगले पांच से सात सालों में 600 मिलियन और यूजर्स जोड़ सकता है और हर महीने 100-150 बिलियन ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस कर सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि UPI की धीमी होती विकास गति और स्ट्रक्चरल फंडिंग गैप के कारण इस स्तर तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर, सिक्योरिटी और मर्चेंट ऑनबोर्डिंग में इकोसिस्टम का निवेश सीमित हो जाता है.

सौरभ शर्मा

सौरभ शर्मा

15 साल से शेयर मार्केट, इकोनॉमी और कमोडिटी कवर कर रहे हैं. टीवी9 के साथ जुड़ने से पहले डीएनए, ए​शियानेट, जनसत्ता और राजस्थान पत्रिका जैसे कई बड़े संस्थानों के साथ भी जुड़े रहे.

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