पंजाब- पेट्रोल पंपों पर UPI पेमेंट कम हो सकती है: डीलर बोले- नए नियम से खर्च बढ़ने पर कैश लेना पड़ेगा, LPG एजेंसियों पर भी असर - Ludhiana News

Published on 18 सित॰ 2026

देश में डिजिटल पेमेंट और इंवेस्टमेंट को आसान बनाने वाले UPI के मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 15 अक्टूबर 2026 से नए UPI MDR नियम लागू होंगे। इससे लुधियाना में पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी संचालकों की चिंता बढ़ गई है।

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उन्होंने कहा कि यदि चुनिंदा UPI ट्रांजेक्शन पर MDR लागू किया गया तो कम मार्जिन में काम करने वाले डीलरों के लिए अतिरिक्त शुल्क वहन करना मुश्किल होगा। ऐसे में उन्हें UPI भुगतान सीमित कर दोबारा कैश लेन-देन की ओर लौटना पड़ सकता है।

लुधियाना पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक कुमार सचदेवा ने कहा कि पेट्रोल पंप डीलरों के लिए प्रस्तावित व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है। ग्राहक जितना ईंधन डलवाता है, उसकी मात्रा और भुगतान की सटीक राशि डिस्पेंसिंग मशीन के मीटर पर दिखती है।

पेट्रोलियम कंपनियों से समाधान की मांग सचदेवा के मुताबिक, एसोसिएशन ने इस मुद्दे को पेट्रोलियम कंपनियों के समक्ष उठाया है और समाधान की मांग की है। अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो डीलरों के सामने UPI भुगतान सीमित करने और कैश में भुगतान लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

LPG एजेंसियों पर भी पड़ेगा असर MDR को लेकर गैस एजेंसी संचालकों ने भी चिंता जताई है। फेडरेशन ऑफ LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स पंजाब के अध्यक्ष गुरपाल सिंह मान ने कहा कि बड़ी संख्या में गैस एजेंसियां वर्तमान में अपने ज्यादातर भुगतान UPI के जरिए प्राप्त कर रही हैं। MDR लगने के बाद डिजिटल भुगतान जारी रखना वितरकों के लिए अतिरिक्त वित्तीय बोझ बन सकता है।

डिजिटल भुगतान के चलन पर असर उन्होंने कहा कि यदि यह शुल्क लागू हुआ तो एजेंसियों को मजबूर होकर कैश भुगतान स्वीकार करने की व्यवस्था बढ़ानी पड़ सकती है। इससे LPG सेक्टर में पिछले वर्षों के दौरान बढ़े डिजिटल भुगतान के चलन पर असर पड़ सकता है।

कैश कलेक्शन में सुरक्षा का खतरा भी खन्ना की रेशम गैस सर्विस के मालिक रवजोत सिंह ने बताया कि उनकी एजेंसी ने सुरक्षा कारणों से भी UPI भुगतान को बढ़ावा दिया था। पहले सेल्समैन जब ग्राहकों से कैश कलेक्ट करके लौटते थे तो बदमाशों द्वारा उन्हें निशाना बनाए जाने की घटनाएं हुई थीं। ऐसे में डिजिटल भुगतान से कैश संभालने और ले जाने का जोखिम कम हुआ था।

इससे क्या असर पड़ेगा, आइए 11 सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं…

सवाल: UPI के नए MDR नियम क्या हैं और यह कब से लागू हो रहे हैं? जवाब: नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और सरकार के नए फ्रेमवर्क के तहत 15 अक्टूबर 2026 से UPI ट्रांजेक्शन पर नए MDR नियम लागू होंगे। इसके तहत पर्सन-टू-पर्सन (P2P) और ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट पर कोई MDR नहीं लगेगा।

हालांकि, ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% और कैपिटल मार्केट- म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार आदि के ट्रांजेक्शन पर 0.02% (अधिकतम ₹300) का रियायती MDR तय किया गया है।

सवाल: क्या मेरे म्यूचुअल फंड की मंथली SIP महंगी हो जाएगी? जवाब: नहीं। अगर आपकी SIP 'UPI AutoPay' या ऑटोमेटेड रिकरिंग मैन्डेट से चल रही है, तो उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बजाजकैपिटल के जॉइंट चेयरमैन और एमडी संजीव बजाज के मुताबिक, रिकरिंग मैन्डेट्स यानी ऑटोमैटिक कटने वाले पेमेंट को इस नए MDR नियम से बाहर रखा गया है। इसलिए ग्रो, जेरोधा के कॉइन या ET मनी जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए जाने वाली आपकी SIP की राशि और फ्रीक्वेंसी में कोई बदलाव नहीं होगा।

सवाल: ऑटोमैटिक SIP और एकमुश्त UPI पेमेंट में क्या अंतर है? जवाब: आनंद राठी वेल्थ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मुकेश कुमावत के अनुसार, अगर आप UPI AutoPay से ₹5,000 की मंथली SIP करते हैं, तो वह पूरी तरह से MDR फ्री है। लेकिन यदि आप उसी म्यूचुअल फंड में मैन्युअल रूप से एक बार में ₹10,000 का लंप-सम यानी एकमुश्त निवेश करते हैं, तो वह ट्रांजेक्शन 0.02% वाले कैपिटल-मार्केट MDR के दायरे में आएगा।

सवाल: यदि मैं ₹1 लाख का लंप-सम म्यूचुअल फंड निवेश करता हूं, तो कितना MDR बनेगा? जवाब: 0.02% की दर से ₹1 लाख के निवेश पर कुल MDR ₹20 बनेगा (₹1,00,000 × 0.02% = ₹20)।

सवाल: क्या यह ₹20 का चार्ज सीधे मेरी जेब से कटेगा? जवाब: नहीं, यह चार्ज सीधे ग्राहक (निवेशक) से नहीं लिया जा सकता। सरकार और RBI के नियमों के अनुसार, MDR का भुगतान पेमेंट हासिल करने वाली कंपनी (AMC या प्लेटफॉर्म) को करना होता है। बैंकों और UPI एप्स को सख्त निर्देश हैं कि वे व्यापारियों या प्लेटफॉर्म्स को यह चार्ज ग्राहकों पर पास करने की इजाजत न दें।

सवाल: शेयर खरीदने के लिए ट्रेडिंग अकाउंट में UPI से पैसा ट्रांसफर करने पर क्या चार्ज लगेगा? जवाब: जब आप ट्रेडिंग अकाउंट में पैसे ऐड करते हैं, तो वह कैपिटल मार्केट ट्रांजेक्शन माना जाता है और उस पर 0.02% MDR लागू होता है। उदाहरण के लिए ₹50,000 ट्रांसफर करने पर ₹10 का MDR बनेगा।

सराफ एंड पार्टनर्स के सीनियर पार्टनर वैभव कक्कड़ के मुताबिक, यह चार्ज फंड ट्रांसफर करने पर लगता है। एक बार वॉलेट या ट्रेडिंग अकाउंट में पैसे आ जाने के बाद शेयर या ETF खरीदने पर अलग से कोई UPI MDR नहीं लगेगा।

सवाल: इस नियम से स्टॉक ब्रोकर्स क्यों चिंतित हैं? जवाब: जेरोधा के को-फाउंडर और CEO नितिन कामथ ने सोशल मीडिया पर चिंता जताई कि ब्रोकर्स के लिए समस्या यह है कि ग्राहक के पैसे ट्रांसफर करने के बाद यह जरूरी नहीं कि वह ट्रेड (खरीद-बिक्री) करे ही।

ब्रोकर को पैसे मिलते ही पेमेंट कॉस्ट यानी MDR चुकानी पड़ेगी, भले ही पैसा ट्रेडिंग अकाउंट में बिना इस्तेमाल के पड़ा रहे। OneBanc के फाउंडर विभोर गोयल का कहना है कि जो एक्टिव ट्रेडर्स दिन में कई बार पैसे ट्रांसफर करते हैं, उनसे ब्रोकर्स की लागत काफी बढ़ जाएगी।

सवाल: UPI से ETF खरीदने पर कितना MDR कटेगा? जवाब: ETF शेयर बाजार में ट्रेड होते हैं। यदि ट्रेडिंग अकाउंट में पहले से बैलेंस मौजूद है, तो खरीदारी पर कोई MDR नहीं लगेगा। लेकिन अगर सीधे UPI से ट्रांसफर करके ETF खरीदा जा रहा है, तो 0.02% MDR लगेगा।

ट्रांजेक्शन वैल्यू (रुपए में)0.02% की दर से MDR
₹5,000₹1
₹10,000₹2
₹50,000₹10
₹1 लाख₹20
₹5 लाख₹100

(नोट: ₹300 की अधिकतम कैप ₹15 लाख या उससे ऊपर के ट्रांजेक्शन पर लागू होती है।)

सवाल: फिक्स्ड डिपॉजिट कराने पर UPI नियमों का क्या असर होगा? जवाब: अगर आप अपने बैंक के एप से सीधे FD खोलते हैं, तो वह बैंक का इंटरनल ट्रांसफर होता है, उस पर मर्चेंट MDR लागू नहीं होता। हालांकि, अगर किसी थर्ड-पार्टी फिनटेक एप के जरिए UPI से FD कराई जाती है, तो उस पर क्या नियम लागू होंगे, इस पर NPCI कुछ दिनों में स्थिति पूरी तरह साफ करेगी।

सवाल: क्या ब्रोकर्स या एप्स भविष्य में ग्राहकों से किसी अन्य तरीके से फीस ले सकते हैं? जवाब: नियमों के तहत UPI MDR के नाम पर अलग से कोई सरचार्ज या हिडन फीस नहीं ली जा सकती। हालांकि, एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि निवेशकों को अपने ब्रोकर्स और फिनटेक एप्स के ओवरऑल ब्रॉडर प्राइसिंग मॉडल या प्लेटफॉर्म फीस डिस्क्लोजर पर नजर रखनी चाहिए कि कहीं वे अपनी बढ़ी हुई लागत की भरपाई अन्य सर्विस चार्जेस से तो नहीं कर रहे हैं।

सवाल: आम निवेशकों को नए नियमों के बाद किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब: रिटेल निवेशकों के लिए 5 मुख्य बातें जरूरी हैं…

  • अपनी SIP को हमेशा 'UPI AutoPay' या NACH मैन्डेट से चलाएं।
  • एकमुश्त निवेश और ट्रेडिंग अकाउंट में पैसा डालने के अंतर को समझें।
  • अपने ब्रोकर्स द्वारा जारी चार्ज संबंधित नियमों की जांच करते रहें।
  • फिनटेक एप्स से FD कराते समय पेमेंट टर्म्स ध्यान से पढ़ें।
  • यदि कोई एप आपसे अलग से 'UPI MDR' या 'UPI Surcharge' के नाम पर पैसे मांगे, तो सतर्क रहें।

जानें क्या है मर्चेंट डिस्काउंट रेट? MDR वह फीस है जो कोई व्यापारी या प्लेटफॉर्म अपने ग्राहक से डिजिटल पेमेंट जैसे- UPI, क्रेडिट कार्ड से स्वीकार करने के लिए बैंक और पेमेंट गेटवे को चुकाता है। यह सरकार द्वारा लगाया गया टैक्स नहीं है।

रीडर्स के लिए टिप्स

  • बार-बार ट्रेडिंग अकाउंट में थोड़ा-थोड़ा पैसा ट्रांसफर करने के बजाय एक ही बार में जरूरी फंड ट्रांसफर करें।
  • मंथली इन्वेस्टमेंट्स को मैन्युअल करने के बजाय हमेशा AutoPay/NACH मोड पर सेट करें ताकि वह MDR के दायरे से बाहर रहे।