अमेरिकी शेयर बाजार में सोमवार को खुलते ही बड़ी गिरावट देखी जा रही है, जिससे वैश्विक बाजारों का मूड और बिगड़ सकता है, इससे पहले जापान और दक्षिण कोरिया की मार्केट में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.
दरअसल सोमवार को भारतीय बाजार गणेश चतुर्थी की वजह से बंद है. लेकिन मंगलवार को इसका असर भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिलेगा. हालांकि गिफ्ट निफ्टी बड़ी गिरावट का संकेत नहीं दे रहा है.
वहीं सबसे ज्यादा अमेरिकी टेक कंपनियों के शेयरों में यानी Nasdaq में शुरुआती गिरावट दर्ज की गई है. सोमवार की शाम Nasdaq 100 में एक फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. खासकर एआई (AI) स्टॉक्स में बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने दुनिया भर के वित्तीय बाजारों को हिलाकर रख दिया है.
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इससे पहले एशियाई बाजारों खासकर जापान के निकेई और दक्षिण कोरिया के कोस्पी (Kospi) में 1% से ज्यादा देखी गई. ऐसे में मंगलवार को बाजार खुलते ही इस वैश्विक गिरावट का सीधा असर भारतीय बाजार पर दिखने की पूरी संभावना है. वैश्विक बाजारों में गिरावट के 3 बड़े कारण हैं.
1. AI स्टॉक्स में मंदी और टेक शेयरों में बिकवाली
एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमायदेई, सैम एल्टमैन और एलन मस्क जैसे टेक दिग्गजों द्वारा AI के अनियंत्रित विकास को धीमा करने की अपीलों से निवेशकों में डर का माहौल बन गया है. इस बयान के बाद सैमसंग, चिपमेकर एनवीडिया, सॉफ्टबैंक और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में 4% से 10% तक की भारी गिरावट देखी गई.
2. कच्चे तेल की उछलती कीमतें
मध्य पूर्व में तनाव और सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन पर हमलों के कारण ब्रेंट क्रूड $107 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है. साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता जा रहा है.
3. अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने का डर
इसी हफ्ते अमेरिकी केंद्रीय बैंक की बैठक होनी है. कच्चे तेल की वजह से बढ़ती महंगाई के कारण ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका से वैश्विक निवेशक घबराए हुए हैं.
भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर होगा?
भारतीय शेयर बाजार पहले से ही लगातार 5 हफ्तों से दबाव में चल रहा है, जहां निफ्टी 23,400 के करीब और सेंसेक्स 74,780 के स्तर पर फिसल चुके हैं. अमेरिका और एशिया के टेक शेयरों में जारी गिरावट का असर भारत की दिग्गज आईटी कंपनियों (TCS, Infosys, Wipro) पर पड़ेगा.
भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है. क्रूड $107 प्रति बैरल पहुंचने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर चालू खाता घाटे (CAD) और महंगाई का बोझ बढ़ेगा, जिसका सीधा असर ऑटो, पेंट और कंज्यूमर स्टॉक्स पर पड़ेगा. अमेरिकी बाजार में अस्थिरता के कारण विदेशी निवेशक भारतीय जैसे उभरते बाजारों (Emerging Markets) से पैसा निकालकर सुरक्षित संपत्तियों (जैसे डॉलर या गोल्ड) में लगा सकते हैं.
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