अन्नू कपूर फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' के साथ 24 जुलाई को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाले हैं। 'उत्तर दा पुत्तर' की कहानी इतनी मजेदार है, जो आपको बिल्कुल भ ...और पढ़ें

उत्तर दा पुत्तर मूवी रिव्यू/ फोटो- Instagram

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। कहते हैं कि जब आधुनिक विज्ञान का तर्क, अध्यात्म की आस्था और वास्तु शास्त्र की दिशाओं से टकराता है, तो एक अनोखा संगम बनता है। अब इस संगम में या तो इंसान की जिंदगी संवर जाती है या फिर फूटता है हंसी का बम, वो भी नई उलझनों के साथ! कुछ ऐसी ही कहानी लेकर आई है हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर', जिसके मुख्य पात्र दिग्गज अभिनेता अन्नू कपूर हैं।
क्या है 'उत्तर दा पुत्तर' की कहानी?
फिल्म की कहानी फिजिक्स के टीचर साईं टुटेजा (अन्नू कपूर) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनका मानना है कि जिंदगी परफेक्ट तभी बन सकती है, जब घर का वास्तु सही हो। वह खुद के लिए एक परफेक्ट वास्तु वाला घर ढूंढते हैं और अपने ससुराल वालों को भी यह यकीन दिलाते हैं कि सही वास्तु उनकी जिंदगी की सभी तकलीफों को दूर कर देगा, लेकिन तभी उनके घर का पंखा नीचे गिर जाता है।
प्रोफेसर की इस 'हर चीज में वास्तु' तलाशने की सनक से तंग आकर उनकी पत्नी गिन्नी (रुखसार रहमान) गुस्से में घर छोड़कर चली जाती हैं। अपनी पत्नी को वापस लाने और जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की उम्मीद में प्रोफेसर अपने दोस्त के साथ एक 'परफेक्ट वास्तु' वाले घर की खोज में निकलते हैं। इस बीच कई ऐसी मजेदार घटनाएं घटती हैं, जो कहानी को एक अलग और मनोरंजक मोड़ पर ले जाती हैं।

आम आदमी को खुद से जोड़ती है कहानी
किसी भी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत उसकी कहानी होती है, जिससे दर्शक खुद को कनेक्ट कर सकें। 'उत्तर दा पुत्तर' का निर्देशन रविंदर सिवाच ने किया है, जिनकी तारीफ करनी बनती है। उन्होंने मूवी में बेवजह कुछ भी ठूंसने की कोशिश नहीं की है और बिना समय गंवाए सीधे 'वास्तु' से जुड़े मुद्दे को दिखाया है। फिल्म की कहानी संदीप कपूर ने लिखी है, जिन्होंने इस बात का पूरा ध्यान रखा है कि हर आम आदमी को यह फिल्म अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से रिलेटेबल लगे।
आम जीवन में अधिकतर लोग 'वास्तु' का ध्यान रखते हुए ही घर खरीदते हैं या उसे डिजाइन करवाते हैं। मेकर्स ने इस बात का पूरा ख्याल रखा है कि कहानी दर्शकों के लिए कहीं भी बोरिंग न बने। उन्होंने तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास जैसी चीजों को कॉमेडी के अंदाज में पिरोकर 'उत्तर दा पुत्तर' को बेहद एंटरटेनिंग बनाया है।

प्रोफेसर के रूप में छा गए अन्नू कपूर
अन्नू कपूर एक मंझे हुए कलाकार हैं, इस बात में कोई दोराय नहीं है। 'उत्तर दा पुत्तर' में प्रोफेसर बनकर उन्होंने अपने किरदार में जो जान फूंकी है, वह काबिल-ए-तारीफ है। इसके अलावा, रुखसार रहमान ने गिन्नी के किरदार को बखूबी पर्दे पर उतारा है। इश्तियाक खान सीमित स्क्रीनटाइम मिलने के बावजूद अपने किरदार में एकदम फिट लगे हैं, वहीं एस.बी. सिद्धू के रोल को जीवेशु अहलूवालिया ने पूरे कॉन्फिडेंस से निभाया है। कुल मिलाकर यह फिल्म काफी एंटरटेनिंग और मजेदार है, जो आपको लगभग हर सीन में हंसाती है।