मानसून में जलभराव, खुली नहरों और टूटे रास्तों से जूझ रहे हल्द्वानी के लिए बड़ी राहत की तैयारी शुरू हो गई है। सिंचाई विभाग ने शहर के लिए 1003.42 करोड़ रुपये की ड्रेनेज योजना बनाई है। पहले चरण में 430.23 करोड़ में से 195.64 करोड़ की सैद्धांतिक मंजूरी मिली है।
सिंचाई विभाग के अनुसार योजना के तहत रकसिया नाले के 10.25 किलोमीटर और कलसिया नाले के 1.55 किलोमीटर हिस्से का सुधार किया जाएगा। नालों की लाइनिंग की जाएगी ताकि पानी का रिसाव रुके और क्षमता बढ़े। इसके साथ ही नालों के ऊपर से गुजर रही बिजली, पानी और अन्य यूटिलिटी लाइनों की शिफ्टिंग भी होगी।
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शहर के निचले इलाकों में जलभराव रोकने के लिए नए पंपिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे। पुराने नालों को आपस में जोड़कर बरसाती पानी को सीधे नदी तक ले जाने की व्यवस्था की जाएगी। विभाग का दावा है कि इससे सड़कों पर जलभराव, ट्रैफिक जाम और जलजनित बीमारियों की समस्या में भी कमी आएगी।
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निकासी नहीं होने से उड़ जाती है लोगों की नींद
आठ अगस्त 2023 की शाम भारी बारिश के कारण कलसिया और रकसिया से काफी नुकसान हुआ। सड़क से लेकर घर तक मलबे से पट गए। कलसिया और रकसिया से नई बस्ती, देवलदूंगा, काठगोदाम के अन्य इलाकों में करीब 46 भवनों को नुकसान पहुंचा। इसके अगले साल 11 जुलाई 2024 को काठगोदाम के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के बाद * 50 से अधिक घरों में बरसाती पानी और मलबा घुस गया था।
शासन से धनराशि उपलब्ध होते ही 6 टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। पहले चरण में प्राथमिकता उन क्षेत्रों को दी जाएगी जहां हर साल सबसे ज्यादा जलभराव होता है। - संजय शुक्ल, मुख्य अभियंता, सिंचाई विभाग
कुमाऊं के अन्य शहरों भी में होना है कार्य
कुमाऊं क्षेत्र में जलभराव और बारिश के समय होने वाली दिक्कतों से निजात दिलाने के लिए तैयार 3394.22 करोड़ रुपये के ड्रेनेज प्लान को शासन ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। पहले चरण में 15 शहरों और कस्बों में नालों और जल' निकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता संजय शुक्ल ने बताया कि हल्द्वानी, रुद्रपुर और काशीपुर जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के कारण प्राकृतिक निकासी बाधित हुई है। नई योजना में इन बाधाओं को हटाकर वैज्ञानिक तरीके से जल निकासी की व्यवस्था की जाएगी।
कहां कितने का प्रोजेक्ट... हल्द्वानी की योजना 1003.42 करोड़ रुपये की है। रुद्रपुर की 786.73 करोड़ की योजना में पहले चरण के 184.41 करोड़ मंजूर हुए हैं। काशीपुर के लिए 602 में से 220.98 करोड़, सितारगंज के लिए 155.05 में से 59.41 करोड़, बागेश्वर के लिए 129.50 में से 22 करोड़, पिथौरागढ़ के लिए 87.85 में से 20 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। इसी तरह रामनगर के चोरपानी, मालधनचौड़, कपकोट, गरुड़, बनबसा और गदरपुर के विजयनगर-कालीनगर लिए भी पहले चरण की राशि मंजूर हुई है।
पूरे शहर का एक साथ हो कामः एनसी पांडेय
सिंचाई विभाग के सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता एमसी पांडेय का कहना है कि टुकड़ों में काम नहीं चलेगा। पूरे शहर का ड्रेनेज का काम एक साथ करना चाहिए। छोटे प्लान से ड्रेनेज की समस्या हल नहीं होगी। काठगोदाम से हल्दूचौड़ तक एक सिस्टम बनाकर गौला और कालाढूंगी रोड का चीन नाले, रकसिया नाले को एकसाथ मिलाते हुए भाखड़ा नदी में डालना होगा। तभी शहर का ड्रेनेज सिस्टम ठीक हो सकता है।
जलभराव वाले क्षेत्रों का सर्वे हो : दिनेश खेतवाल
सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता सिंचाई विभाग दिनेश खेतवाल ने कहा कि बिना सही सर्वे और एकीकृत योजना के ड्रेनेज की समस्या हल नहीं होगी। खेतवाल ने कहा जहां-जहां जलभराव होता है, उसके लिए पहले सर्वे किया जाए। छोटे-छोटे नालों को रकसिया, कलसिया और चीन नाले से जोड़ा जाए। रकसिया और चीन नाले की निकासी भाखड़ा और कलसिया नाले की निकासी गौला नदी में की जाए। तभी शहर का ड्रेनेज सिस्टम ठीक हो सकता है।