भारत ने एंड्योरएयर और बीईएल द्वारा विकसित स्वदेशी मल्टी-ड्रोन मदरशिप सिस्टम 'वाहक-6' लॉन्च किया है।

भारतीय सेना को मिला वाहक-6 मल्टी-ड्रोन सिस्टम

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए 'वाहक-6' ( VAHAK-6) नाम का एक स्वदेशी मल्टी-ड्रोन मदरशिप सिस्टम विकसित किया है।
निजी कंपनी एंड्योरएयर और सरकारी उपक्रम भारत इल्क्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने इसे संयुक्त रूप से तैयार किया है। यह सिस्टम भारतीय सेना की युद्ध क्षमता को कई गुना बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है।
क्या है VAHAK-6?
VAHAK-6 मूल रूप से एक टू-टियर (दो स्तरीय) अनमैन्ड एरियल सिस्टम है जो हवा में उड़ते हुए एक ड्रोन कैरियर की तरह काम करता है। इसमें 'सबल 20' (SABAL 20) नाम का एक बड़ा हेलीकॉप्टर-नुमा मदरशिप होता है, जो अपने साथ अलख (ALAKH) नाम के कई छोटे माइक्रो-ड्रोन्स को लादकर ले जाता है।
आमतौर पर छोटे ड्रोन अपनी सीमित बैटरी और रेंज के कारण लंबी दूरी तय नहीं कर पाते, लेकिन यह सिस्टम इस चुनौती को पूरी तरह खत्म कर देता है।

सबल-20 मदरशिप छोटे अलख ड्रोन्स को दुश्मन के ठिकाने या मिशन जोन के करीब तक ले जाकर हवा में ही लॉन्च कर देता है। इससे छोटे ड्रोन्स की ऊर्जा बचती है और वे अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल सीधे निगरानी या स्ट्राइक मिशन में कर पाते हैं।
अलग-अलग काम कर सकते हैं ड्रोन्स
IIT कानपुर के सहयोग से विकसित किया गया 'अलख' छोटा और फुर्तीला नैनो/माइक्रो-ड्रोन है, जो मात्र 2x2 फीट की तंग खिड़की या संकरे रास्तों से भी इमारत में दाखिल हो सकता है।
यह बंद कमरों, गुफाओं या आतंकी ठिकानों के भीतर घुसकर लाइव FPV (फर्स्ट पर्सन व्यू) फुटेज भेजने के साथ-साथ 400 ग्राम तक का विस्फोटक पेलोड ले जाने में सक्षम है।

VAHAK-6 की सबसे बड़ी खासियत इसकी बहुउपयोगी क्षमता है, जहां एक ही मदरशिप से छूटे 6 ड्रोन्स अलग-अलग काम कर सकते हैं।
इनमें से कुछ ड्रोन इलाके की रेकी और निगरानी करते हैं, जबकि अन्य ड्रोन जरूरत पड़ने पर आत्मघाती हमला करके दुश्मन के ठिकानों को तबाह कर सकते हैं।

भारतीय सेना के लिए गेम-चेंजर
आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के दौर में यह तकनीक भारतीय सेना के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। दुश्मन द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली GPS जैमिंग का इस पर असर नहीं होता क्योंकि अलख ड्रोन बिना GPS के भी पूरी सटीकता से काम करने में सक्षम हैं।
इसके अलावा, एक साथ 6 ड्रोन्स का झुंड बनाकर काम करने से यह एक ही समय में कई दिशाओं में निगरानी नेटवर्क तैयार कर लेता है।

4,000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई वाले दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों, लद्दाख-अरुणाचल जैसी सीमाओं और शहरी युद्ध के माहौल में सैनिकों को सीधे खतरे में डाले बिना यह सिस्टम सटीक जानकारी और सुरक्षा प्रदान करता है।
क्या-क्या हैं चुनौतियां?
स्वदेशी VAHAK-6 मदरशिप सिस्टम की क्षमताएं प्रभावशाली हैं, लेकिन बेहद जटिल और युद्ध के माहौल में इसके संचालन के दौरान कुछ गंभीर चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है।
सबसे पहली और बड़ी चुनौती भारत की दुर्गम सीमाओं पर मौसम का मिजाज है। लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले पर्वतीय इलाकों में जमने वाली ठंड, हवा का कम दबाव और अचानक बहने वाली तेज हवाएं मदरशिप और विशेष रूप से हल्के माइक्रो-ड्रोन्स की उड़ान क्षमता, स्थिरता और बैटरी लाइफ पर सीधा असर डालती हैं।
दूसरी चुनौती दुश्मन की इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता और संचार बाधाएं हैं। हालांकि यह सिस्टम जीपीएस-मुक्त माहौल में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।
लेकिन आधुनिक युद्धक्षेत्र में दुश्मन के भारी इलेक्ट्रॉनिक हमलों और एडवांस सिग्नल जैमिंग के कारण मदरशिप और छोटे ड्रोन्स के बीच का डेटा-लिंक तथा मेश नेटवर्क बाधित होने का जोखिम हमेशा बना रहता है।
वहीं एयर डिफेंस और एंटी-ड्रोन सिस्टम से जुड़ी समस्याएं भी हैं। SABAL 20 मदरशिप आकार में काफी बड़ा प्लेटफॉर्म है, जिसकी वजह से दुश्मन के एडवांस रडार इसे आसानी से ट्रैक कर सकते हैं।
दुश्मन की एंटी-एयरक्राफ्ट गन, लेजर हथियारों और एंटी-ड्रोन मिसाइलों द्वारा इसे समय रहते निशाना बनाए जाने का खतरा रहता है।