Vande Bharat Express: वंदे भारत एक्सप्रेस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें रेलवे की शानदार सुविधाओं और साफ-सफाई के बावजूद कुछ यात्रियों द्वारा फैलाई गई गंदगी को दिखाया गया है, जिसने सिविक सेंस पर नई बहस छेड़ दी है।
Vande Bharat Train: वंदे भारत एक्सप्रेस का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट में लोगों की जिम्मेदारी और सिविक सेंस पर एक नई बहस छेड़ दी है। इसमें साफ दिख रहा है कि रेलवे की शानदार सुविधाओं और यात्रियों के बर्ताव में कितना बड़ा अंतर है।
इंस्टाग्राम पर कंटेंट क्रिएटर सुनील आर (Sunil R) ने अपने हैंडल @maskedguyslife से यह वीडियो शेयर किया है। वीडियो की शुरुआत में वंदे भारत ट्रेन का प्रीमियम अनुभव दिखाया गया है। रेलवे स्टाफ यात्रियों को न्यूजपेपर और खाना दे रहा है। कोच, वॉशरूम और बाकी जगहें एकदम साफ-सुथरी नजर आ रही हैं।
लेकिन वीडियो के आखिर में नजारा बिल्कुल बदल जाता है। ट्रेन में साफ-सफाई की लगातार सुविधा और कचरा उठाने वाले स्टाफ के होने के बावजूद, कुछ यात्रियों ने अपनी सीट के पास कचरे का ढेर लगा दिया। इस वीडियो को अब तक लाखों लोग देख चुके हैं। इसके बाद इंटरनेट पर यह बहस तेज हो गई है कि क्या पब्लिक ट्रांसपोर्ट को साफ रखने की जिम्मेदारी सिर्फ सफाई कर्मचारियों की है, या इसमें यात्रियों का भी कोई रोल है।
साल 2019 में शुरू हुई वंदे भारत ट्रेनें भारतीय रेलवे की सबसे खास सेवाओं में से एक बन चुकी हैं। इन ट्रेनों को मॉडर्न ट्रैवल एक्सपीरियंस देने के लिए डिजाइन किया गया है। इनमें बेहतरीन सीटें, ऑनबोर्ड कैटरिंग, लगातार साफ-सफाई और शानदार इंटीरियर जैसी सुविधाएं मिलती हैं। वायरल वीडियो में ये सारी सुविधाएं काम करते हुए दिख रही हैं। रेलवे कर्मचारी कोच में घूम-घूम कर न्यूजपेपर और खाना बांट रहे हैं। बाद में वही स्टाफ खाली ट्रे, बचा हुआ खाना और सफर के दौरान निकला कचरा इकट्ठा करने भी आता है। वीडियो के ज्यादातर हिस्से में कोच एकदम साफ और व्यवस्थित दिखता है।
सुविधाओं और यात्रियों के बर्ताव में दिखा बड़ा अंतर
बहस तब ज्यादा तेज हो गई जब वीडियो में दिखा कि लगातार सफाई होने के बावजूद कोच में कचरा पड़ा हुआ है। खाली पानी की बोतलें, स्नैक्स के रैपर, कोल्ड ड्रिंक के कैन और खाने की पैकिंग को सीटों के नीचे और सीट पॉकेट में ठूंसा गया था। यह सब तब हुआ जब हाउसकीपिंग स्टाफ पूरे सफर के दौरान यात्रियों से कचरा मांग कर इकट्ठा कर रहा था। वीडियो देखने वाले कई लोगों का मानना है कि सफर के दौरान कचरा निकलना आम बात है। लेकिन असली सवाल यह है कि जब कचरा फेंकने की सुविधा मौजूद थी, तो कुछ यात्रियों ने उसका इस्तेमाल क्यों नहीं किया।
फुटेज में साफ दिख रहा है कि सफाई कर्मचारी मौजूद थे और उन तक पहुंचना आसान था। फिर भी लोगों ने ऐसी जगहों पर कचरा छोड़ दिया जहां से बाद में सफाई कर्मचारियों को उसे अपने हाथों से निकालना पड़ेगा। सोशल मीडिया पर यही बात चर्चा का मुख्य विषय बन गई।
कई यूजर्स ने कमेंट किया कि सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर करने से सफाई नहीं आ सकती, जब तक यात्री खुद पब्लिक प्रॉपर्टी को साफ रखने की जिम्मेदारी न लें। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि जब लोग जानबूझकर गलत जगह कचरा फेंकेंगे, तो रेलवे स्टाफ भी आखिर क्या कर लेगा। क्रिएटर ने अपने कैप्शन में इसे कुछ यात्रियों के 'सिविक सेंस' (नागरिक समझ) की कमी बताया। यह शब्द देखते ही देखते ऑनलाइन चर्चा का केंद्र बन गया।
ट्रेन से आगे तक पहुंची बहस
जैसे-जैसे वीडियो वायरल हुआ, यह चर्चा सिर्फ वंदे भारत तक सीमित नहीं रही। यह पब्लिक बिहेवियर को लेकर एक बड़ी बहस में बदल गई। कई यूजर्स ने कहा कि भारत ने हाल के सालों में ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने में भारी निवेश किया है। लेकिन इन सुविधाओं की कामयाबी इस बात पर भी निर्भर करती है कि यात्री इनका इस्तेमाल और देखभाल कैसे करते हैं। बाद में क्रिएटर ने सफाई दी कि इस वीडियो का मकसद भारतीय रेलवे या वंदे भारत की बुराई करना नहीं था। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ एक मॉडर्न, साफ-सुथरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम और उसमें सफर करने वाले कुछ यात्रियों की हरकतों के बीच का अंतर दिखाना चाहते थे। उनकी यह बात कई दर्शकों को सही लगी।
वंदे भारत ट्रेनों को अक्सर वर्ल्ड-क्लास ट्रैवल एक्सपीरियंस के तौर पर प्रमोट किया जाता है, जिसमें आराम, सफाई, स्पीड और सुरक्षा पर जोर होता है। लेकिन इन स्टैंडर्ड्स को बनाए रखने के लिए सर्विस देने वालों और यात्रियों, दोनों के सहयोग की जरूरत है।
इसलिए यह वायरल क्लिप अब सिर्फ एक ट्रेन सफर की बात नहीं रह गई है। यह पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े उस पुराने सवाल को फिर से उठा रही है: क्या कोई भी सुविधा तब तक साफ और बेहतर रह सकती है, जब तक उसे इस्तेमाल करने वाले लोग खुद सहयोग न करें?
हालांकि ऑनलाइन लोगों की राय अलग-अलग थी, लेकिन इस वीडियो ने पब्लिक रिस्पॉन्सिबिलिटी (सार्वजनिक जिम्मेदारी) के एक बड़े मुद्दे की तरफ सबका ध्यान खींचने में कामयाबी हासिल की है。