
युवक बना सफाई की मिसालImage Credit source: Instagram/kartiksahaniii
उत्तर प्रदेश के मऊ में रहने वाले 19 साल के कार्तिक सहानी ने जब देखा कि जिस नदी पर उनके परिवार की खेती काफी हद तक निर्भर है, वही धीरे-धीरे कचरे से भरती जा रही है, तो उनसे रहा नहीं गया. उन्होंने किसी सरकारी अभियान या बड़े सफाई दल का इंतजार करने के बजाय खुद नदी में उतरने का फैसला किया. इसके बाद कार्तिक रोज कई घंटे तमसा नदी की सफाई में जुट गए.
कार्तिक सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय हैं और इंस्टाग्राम पर उनके 36 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. उन्होंने नदी की हालत को करीब से देखा तो उसे बदलने की ठान ली. इसके बाद वह हर दिन करीब तीन से चार घंटे नदी में बिताने लगे. इस दौरान वह पानी में जमा प्लास्टिक, बोतलें और दूसरे तरह का कचरा अपने हाथों से बाहर निकालते थे. कार्तिक ने लगातार 22 दिनों तक यह काम किया. इन 22 दिनों में उन्होंने नदी से 1,000 किलो से ज्यादा कचरा बाहर निकाला. यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि नदी में गंदगी किस हद तक जमा हो चुकी थी. शुरुआत में यह काम शायद एक व्यक्ति की छोटी सी कोशिश लग रही थी, लेकिन लगातार मेहनत करते रहने से यह एक बड़े सफाई अभियान में बदल गया.
बाहर निकाला 1,000 किलो से ज्यादा कचरा
तमसा नदी कार्तिक के लिए सिर्फ एक नदी नहीं है. उनके परिवार की खेती के लिए इसका पानी बेहद अहम है. परिवार की जमीन की सिंचाई इसी नदी के पानी से होती है. ऐसे में नदी को लगातार गंदा होते देखना उनके लिए सिर्फ पर्यावरण से जुड़ी चिंता नहीं थी, बल्कि इसका सीधा असर उनके परिवार की रोजी-रोटी पर भी पड़ सकता था. इसी वजह से कार्तिक ने तय किया कि सिर्फ शिकायत करने से कुछ नहीं बदलेगा. उन्होंने खुद पहल की और नदी में उतरकर सफाई शुरू कर दी. रोज वह कचरा निकालते, उसे किनारे तक लाते और फिर सफाई का काम आगे बढ़ाते. कई दिनों तक लगातार चलने वाली उनकी इस मेहनत ने आसपास के लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स का भी ध्यान खींचा.
कार्तिक की कोशिश यहीं रुकने वाली नहीं है. तमसा नदी की सफाई के बाद अब उन्होंने अपने इलाके के एक तालाब को साफ करने का जिम्मा उठाया है. यानी एक जलस्रोत की सफाई पूरी करने के बाद अब उनकी नजर अगले पानी के स्रोत पर है. कार्तिक की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने यह नहीं सोचा कि इस काम के लिए पहले कोई और आगे आए. उन्होंने अपने आसपास की समस्या देखी और खुद उसे ठीक करने की शुरुआत कर दी. 19 साल की उम्र में रोज घंटों नदी में उतरकर कचरा निकालना आसान काम नहीं है, लेकिन कार्तिक ने लगातार मेहनत करके दिखाया कि बदलाव की शुरुआत किसी बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे कदम से भी हो सकती है.
यह भी पढ़ें: न कोई ड्रामा, न दिखावा बस बच्ची का अंकल के लिए प्यार, 1.7 करोड़ व्यूज पार कर गया प्यारा VIDEO
सोशल मीडिया पर उनकी इस पहल की खूब तारीफ हो रही है. लोग उनके जज्बे और अपने इलाके के लिए कुछ करने की सोच की सराहना कर रहे हैं. तमसा नदी से 1,000 किलो से ज्यादा कचरा निकालने के बाद अब कार्तिक का अगला लक्ष्य पास का तालाब है. उनकी कोशिश जारी है और शायद यही सबसे बड़ी बात है कि उन्होंने सफाई को सिर्फ एक दिन का काम नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली जिम्मेदारी बना लिया है.
यहां देखिए वीडियो

आयुष कुमार
आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं. अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.
Read More