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हिंदी न्यूज़ऐस्ट्रोVishwakarma Puja 2026: विश्वकर्मा पूजा का 7:58 वाला समय निकल गया? जानिए अब किस समय पूजा कर सकते हैं
Vishwakarma Puja 2026 Muhurat: विश्वकर्मा पूजा में 7:58 बजे का समय निकल गया? जानें संक्रांति क्षण और पूजा मुहूर्त का अंतर, अभिजित मुहूर्त और राहुकाल का समय.
Written By : Hirdesh Kumar Singh | Updated at : 17 Sep 2026 11:23 AM (IST)

विश्वकर्मा पूजा 2026
Source : abplive
Vishwakarma Puja 2026: फोन की घड़ी में आठ बज चुके हैं और आपने विश्वकर्मा पूजा शुरू नहीं की? परेशान होने की जरूरत नहीं है. सोशल मीडिया पर सुबह 7:58 बजे का समय देखकर कई लोगों को लग रहा है कि पूजा का मुहूर्त निकल गया. असल में 7:58 बजे पूजा खत्म होने का समय नहीं, बल्कि कन्या संक्रांति का पल है.
7:58 बजे क्या हुआ?
विश्वकर्मा पूजा सौर कैलेंडर के अनुसार कन्या संक्रांति पर मनाई जाती है. यह वह समय है, जब सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करते हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार नई दिल्ली में 17 सितंबर 2026 को कन्या संक्रांति का समय सुबह 7:58 बजे है.
इसी समय को कई जगह विश्वकर्मा पूजा का मुख्य मुहूर्त बताया जा रहा है. यहीं से कन्फ्यूजन शुरू होता है. संक्रांति क्षण ग्रह परिवर्तन के सटीक समय से जुड़ा होता है, जबकि पूजा मुहूर्त एक अवधि हो सकती है. इसलिए घड़ी में 7:59 बजते ही पूजा का अवसर खत्म नहीं हो जाता.
अब कितने बजे कर सकते हैं पूजा?
पंचांगों में विश्वकर्मा पूजा के लिए सुबह 7:15 बजे से शाम 4:15 बजे तक का समय बताया गया है. इसका मतलब है कि 7:58 बजे पूजा नहीं कर पाए तो सुबह या दोपहर में भी विधि पूरी की जा सकती है.
यह भी पढ़ें- Vishwakarma Puja 2026: मशीनों की सफाई से पूजा तक, जानें क्या करें और क्या नहीं
नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार दोपहर 11:51 बजे से 12:40 बजे तक अभिजित मुहूर्त रहेगा. सुबह की पूजा छूट गई हो तो यह सुविधाजनक विकल्प हो सकता है. वहीं दोपहर 1:48 बजे से 3:20 बजे तक राहुकाल है, इसलिए परंपरा मानने वाले लोग इस दौरान नई पूजा शुरू करने से बच सकते हैं.
अगर राहुकाल से पहले पूजा संभव न हो तो दोपहर 3:20 बजे के बाद उपलब्ध समय में पूजा की जा सकती है. हालांकि मुहूर्त शहर के सूर्योदय और स्थानीय गणना के अनुसार बदलता है. इसलिए अपने शहर का पंचांग जरूर देख लें.
ऑफिस या फैक्ट्री देर से खुले तो क्या करें?
हर दुकान, गैराज या फैक्ट्री सुबह आठ बजे नहीं खुलती. ऐसे में घर से भगवान विश्वकर्मा का स्मरण कर सकते हैं और कार्यस्थल पहुंचकर पूजा पूरी कर सकते हैं. पूजा के लिए मशीन को खोलना या उसके अंदर हाथ डालना जरूरी नहीं है.
सबसे पहले कार्यस्थल की सफाई करें. भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर रखें. दीपक जलाकर रोली, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करें. इसके बाद औजारों और मशीनों पर सुरक्षित तरीके से तिलक लगाएं. बिजली से चलने वाली मशीन बंद करके ही पूजा करें.
क्या देर से पूजा करने पर फल नहीं मिलेगा?
धार्मिक परंपराओं में मुहूर्त का महत्व है, लेकिन पूजा केवल घड़ी के एक मिनट पर निर्भर नहीं मानी जाती. साफ-सफाई, सुरक्षा, श्रद्धा और अपने काम के प्रति सम्मान भी विश्वकर्मा पूजा का अहम हिस्सा हैं.
इसलिए 7:58 का समय निकलने पर जल्दबाजी न करें. खासकर मशीन या बिजली के उपकरण की पूजा करते समय सुरक्षा से समझौता बिल्कुल न करें. सही स्थानीय समय देखकर शांत मन से पूजा करें.
FAQ
क्या 7:58 बजे के बाद विश्वकर्मा पूजा कर सकते हैं?
हां. 7:58 बजे नई दिल्ली के अनुसार कन्या संक्रांति का क्षण है, पूजा समाप्त होने का समय नहीं.
सुबह की पूजा छूट जाए तो अगला शुभ समय कौन सा है?
नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार सुबह की पूजा छूटने पर 11:51 बजे से 12:40 बजे तक अभिजित मुहूर्त उपयोगी विकल्प हो सकता है.
विश्वकर्मा पूजा के दिन राहुकाल कब है?
नई दिल्ली में राहुकाल दोपहर 1:48 बजे से 3:20 बजे तक बताया गया है. दूसरे शहरों में समय बदल सकता है.
क्या ऑफिस खुलने के बाद विश्वकर्मा पूजा कर सकते हैं?
हां. कार्यस्थल खुलने के बाद निर्धारित स्थानीय मुहूर्त में सुरक्षित तरीके से औजारों और मशीनों की पूजा की जा सकती है.
क्या 7:58 बजे पूजा नहीं करने से पूजा अधूरी मानी जाएगी?
नहीं, यह संक्रांति का समय है. पूजा स्थानीय पंचांग में उपलब्ध शुभ टाइम और पारिवारिक परंपरा के अनुसार की जा सकती है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader
'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'
हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.
वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.
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हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है.
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वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.
डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.
उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.
श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.
ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.
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Published at : 17 Sep 2026 07:10 AM (IST)
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