Published: Monday, September 21, 2026, 17:13 [IST]
Apple Area Manager Vivek Tiwari Murder Case: राजधानी लखनऊ के बहुचर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड में अदालत ने दोषी बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी को 10 साल की जेल की सजा सुनाई है। करीब आठ साल तक चले मुकदमे के बाद अदालत ने 17 सितंबर को प्रशांत चौधरी को IPC की धारा 304 पार्ट-II (गैर इरादतन हत्या) का दोषी माना था। सोमवार, 21 सितंबर को अदालत ने सजा का ऐलान किया।
वहीं, मामले में सह-आरोपी रहे सिपाही संदीप कुमार को अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर बरी कर दिया था। विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी ने अदालत के फैसले पर असंतोष जताते हुए हाईकोर्ट जाने की बात कही है।
पहले समझिए पूरा मामला
विवेक तिवारी एपल कंपनी में एरिया सेल्स मैनेजर थे। 29 सितंबर 2018 की देर रात वह अपनी सहकर्मी सना सिद्धीकी को कार से घर छोड़ने जा रहे थे। करीब रात 1:30 बजे गोमतीनगर एक्सटेंशन में मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास बाइक सवार सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने उनकी SUV को रुकने का इशारा किया।
अभियोजन के मुताबिक, कार के नहीं रुकने के बाद पुलिसकर्मियों ने उसका पीछा किया और प्रशांत चौधरी ने गोली चला दी। गोली विवेक तिवारी को लगी। इसके बाद उनकी कार डिवाइडर से टकरा गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
हत्या की धारा में नहीं, गैर इरादतन हत्या में दोषी
मामले में प्रशांत चौधरी पर शुरुआत में IPC की धारा 302 यानी हत्या का आरोप लगाया गया था। हालांकि करीब आठ साल चली सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें हत्या का दोषी नहीं माना और धारा 304 पार्ट-II के तहत दोषी ठहराया।
धारा 304 पार्ट-II ऐसे मामले में लागू होती है, जहां आरोपी के कृत्य से मौत होती है और उसे यह जानकारी होती है कि उसके कृत्य से मौत होने की संभावना है, लेकिन अदालत हत्या के लिए जरूरी इरादा साबित नहीं मानती। इस प्रावधान में अधिकतम 10 साल की जेल या जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है।
दूसरे सिपाही संदीप कुमार को क्यों मिली राहत?
मामले में प्रशांत चौधरी के साथ मौजूद सिपाही संदीप कुमार भी आरोपी थे। अदालत ने सुनवाई के दौरान सामने आए साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं पाया और उन्हें बरी कर दिया। अदालत के फैसले के बाद विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी ने असंतोष जताया। परिवार की ओर से कहा गया कि फैसले की विस्तृत प्रति देखने के बाद हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।
आठ साल तक कैसे चला मुकदमा?
इस मामले में अदालत ने अभियोजन पक्ष के आठ गवाहों के बयान दर्ज किए। इनमें घटना की प्रत्यक्षदर्शी सना सिद्धीकी, विवेक की पत्नी कल्पना तिवारी, पुलिसकर्मी, डॉक्टर, मजिस्ट्रेट और जांच अधिकारी शामिल थे। बचाव पक्ष ने भी फोरेंसिक विशेषज्ञों समेत अपने साक्ष्य पेश किए। दोनों आरोपियों के बयान CrPC की धारा 313 के तहत 26 नवंबर 2024 को दर्ज किए गए थे। इसके बाद मामले में अंतिम बहस और फैसला हुआ।
घटना के बाद क्या हुआ था?
विवेक तिवारी की मौत के बाद मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था। दोनों आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया और मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम गठित की गई थी। प्रशांत चौधरी ने गोली चलाने को आत्मरक्षा से जोड़ते हुए अपना पक्ष रखा था, जबकि पुलिस की चार्जशीट में उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था।