Walt Disney ki Kahani: वॉल्ट डिज़्नी की कहानी हैरान करने वाली है. उन्हें 302 बार रिजेक्शन मिला, बिजनेस ठप हो गया और 'क्रिएटिव नहीं हो' कहकर नौकरी से भी निकाल दिया गया. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और मिकी माउस और डिज़्नीलैंड जैसी दुनिया रच दी.
Walt Disney ki Success Story: दुनिया में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो, जिसने मिकी माउस और डिज्नीलैंड का नाम न सुना हो। बच्चों से लेकर बड़ों तक, डिज्नी की कहानियों और किरदारों ने करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बनाई है। लेकिन इस जादुई दुनिया के पीछे की कहानी संघर्ष, असफलता और बार-बार मिली ठोकरों से भरी है।
जिस शख्स ने डिज्नी जैसी विशाल कंपनी की नींव रखी, उसे कभी नौकरी से यह कहकर निकाल दिया गया था कि उसमें कल्पना की कमी है और वह आलसी है। यही शख्स आगे चलकर दुनिया के सबसे मशहूर एंटरटेनमेंट ब्रांड्स में से एक बनाने में सफल हुआ।
नौकरी से निकाला गया, कहा गया- ‘तुममें कल्पना नहीं है’
वॉल्ट डिज्नी को बचपन से ही ड्राइंग और कार्टून बनाने का शौक था। करीब 22 साल की उम्र में उन्हें एक अखबार में कार्टूनिस्ट की नौकरी मिली। हालांकि, वहां उनका सफर ज्यादा लंबा नहीं चला। उनके बॉस ने उन्हें नौकरी से निकालते हुए कथित तौर पर कहा कि उनमें पर्याप्त कल्पनाशक्ति नहीं है और वे आलसी हैं।
यह झटका वॉल्ट के लिए बड़ा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी रचनात्मक सोच पर भरोसा करते हुए खुद का एनिमेशन स्टूडियो शुरू करने का फैसला किया।
पहला बिजनेस हुआ फ्लॉप, आर्थिक तंगी में गुजरे दिन
वॉल्ट डिज्नी ने Laugh-O-Gram Studio शुरू किया, लेकिन यह कारोबार ज्यादा समय तक नहीं चल सका और बुरी तरह असफल हो गया। इसके बाद वॉल्ट भारी आर्थिक संकट में फंस गए। हालात इतने खराब हो गए कि उनके पास किराया और खाने तक के पैसे नहीं थे।
कई किस्सों में दावा किया जाता है कि इस दौर में उन्होंने बेहद मुश्किल परिस्थितियों में दिन गुजारे और कभी-कभी जानवरों का खाना तक खाने की नौबत आ गई। वह अपने स्टूडियो के फर्श पर सोने को मजबूर थे। लेकिन इन्हीं मुश्किल दिनों में उन्होंने अपने सबसे बड़े सपने की नींव रखी।
एक चूहे ने बदल दी पूरी जिंदगी
कहा जाता है कि वॉल्ट डिज्नी के स्टूडियो में एक चूहा अक्सर दिखाई देता था। उसकी हरकतों ने वॉल्ट का ध्यान खींचा और उनके दिमाग में एक कार्टून किरदार का विचार आया। इसी विचार ने आगे चलकर मिकी माउस का रूप लिया।
मिकी माउस के शुरुआती सफर में भी वॉल्ट को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। शुरुआत में इस किरदार को लेकर लोगों ने संदेह जताया, लेकिन वॉल्ट अपने आइडिया पर भरोसा करते रहे। 1928 में मिकी माउस पर्दे पर आया और धीरे-धीरे यह किरदार दुनियाभर में लोकप्रिय हो गया।
डिज्नीलैंड का सपना भी नहीं था आसान
मिकी माउस की सफलता के बाद वॉल्ट डिज्नी ने एक ऐसे मनोरंजन पार्क का सपना देखा, जहां बच्चे और बड़े पूरे परिवार के साथ समय बिता सकें। इसी विचार ने Disneyland को जन्म दिया।
लेकिन इस सपने को हकीकत में बदलना आसान नहीं था। प्रोजेक्ट के लिए फंड जुटाने में उन्हें लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई बार बैंकों और निवेशकों ने उनके प्रस्ताव को खारिज किया। इसके बावजूद वॉल्ट पीछे नहीं हटे और आखिरकार डिज्नीलैंड का सपना साकार हुआ।
असफलताओं से सीखकर बनाया दुनिया का बड़ा ब्रांड
16 अक्टूबर 1923 को शुरू हुई वॉल्ट डिज्नी की कंपनी ने धीरे-धीरे एनिमेशन से आगे बढ़कर फिल्मों, टेलीविजन, थीम पार्क और मनोरंजन के कई क्षेत्रों में अपना विस्तार किया।
आज डिज्नी दुनिया के सबसे पहचानने योग्य एंटरटेनमेंट ब्रांड्स में शामिल है। मिकी माउस से लेकर डिज्नीलैंड तक, इसके किरदार और प्रोडक्ट दुनियाभर में लोकप्रिय हैं।
वॉल्ट डिज्नी की कहानी यही बताती है कि एक असफलता या किसी का आपको ‘निकम्मा’ कहना आपकी मंजिल तय नहीं करता। अगर अपने आइडिया पर भरोसा हो और कोशिश जारी रहे, तो वही रिजेक्शन कभी-कभी सफलता की सबसे बड़ी वजह बन सकता है।