Who is Gulveer Singh?: सपना था फौज में जाने का, किस्मत ने बना दिया भारत का स्टार धावक; अब CWG में जीता रजत पदक

Published on 29 जुल॰ 2026

Wed, 29 Jul 2026 09:53 AM IST

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो Published by: स्वप्निल शशांक Updated Wed, 29 Jul 2026 09:53 AM IST

सार

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकला एक लड़का सिर्फ फौज की वर्दी पहनने का सपना देखता था। दौड़ उसके लिए नौकरी पाने का जरिया थी, लेकिन वही दौड़ उसे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पोडियम तक ले गई। गुलवीर सिंह की कहानी मेहनत, अनुशासन और देश के लिए कुछ कर गुजरने के जज्बे की मिसाल है।

ग्लासगो के ट्रैक पर आखिरी लैप शुरू हुआ तो भारतीय धावक गुलवीर सिंह के सामने सिर्फ एक लक्ष्य था, देश के लिए कुछ ऐसा करना, जो पहले कभी किसी भारतीय ने नहीं किया हो। कुछ ही सेकेंड बाद फिनिश लाइन पार करते हुए घड़ी 27 मिनट 49.78 सेकेंड पर रुकी। यह सिर्फ एक समय नहीं था, बल्कि वर्षों के संघर्ष, अनुशासन और सपनों का इनाम था। गुलवीर ने रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुष 10,000 मीटर दौड़ में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए, लेकिन इस ऐतिहासिक दौड़ की शुरुआत ग्लासगो से नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के एक छोटे से गांव सिरसा से हुई थी।

The Inspiring Story of Gulveer Singh, From Army Dreams to Glasgow Commonwealth Games 2026 Silver Medal

गुलवीर सिंह - फोटो : ANI/Twitter

जब सपना सिर्फ फौज की वर्दी पहनने का था
एक जून 1998 को किसान परिवार में जन्मे गुलवीर सिंह के गांव में खेलों की ज्यादा चर्चा नहीं होती थी। वहां युवाओं का सबसे बड़ा सपना भारतीय सेना में भर्ती होना था। गुलवीर भी उन्हीं युवाओं में से एक थे। उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स या एशियाई खेलों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। दौड़ना उनके लिए मेडल जीतने का नहीं, बल्कि फौज में नौकरी पाने का रास्ता था। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, 'मुझे कॉमनवेल्थ गेम्स या एशियाई खेलों के बारे में ज्यादा पता नहीं था। हमारे गांव में बहुत कम लोग इन प्रतियोगिताओं के बारे में जानते थे।'

The Inspiring Story of Gulveer Singh, From Army Dreams to Glasgow Commonwealth Games 2026 Silver Medal

गुलवीर सिंह - फोटो : ANI/Twitter

फौज ने बदल दी जिंदगी
साल 2018 में उनका बचपन का सपना पूरा हुआ। वह खेल कोटे से भारतीय सेना में भर्ती हो गए और ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट का हिस्सा बने। यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट और बाद में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के राष्ट्रीय शिविर में उन्हें समझ आया कि दौड़ सिर्फ नौकरी का साधन नहीं, बल्कि देश के लिए इतिहास बनाने का मौका भी हो सकती है। उन्होंने कहा था, 'प्रतियोगी दौड़ के बारे में मैंने वास्तव में सेना में आने के बाद ही सीखा। धीरे-धीरे मुझे इस खेल और इससे जुड़े लोगों के बारे में समझ आने लगी।'

दिन में ड्यूटी, फिर ट्रैक पर पसीना
सेना की नौकरी आसान नहीं थी। गुलवीर को अरुणाचल प्रदेश जैसे कठिन इलाकों में तैनाती मिली। गश्त, सुरक्षा ड्यूटी और सैन्य जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने अभ्यास नहीं छोड़ा। पहाड़ों की ऊंचाई, कठिन मौसम और सीमित संसाधनों ने उनके शरीर को और मजबूत बना दिया।

विज्ञापन

विज्ञापन

The Inspiring Story of Gulveer Singh, From Army Dreams to Glasgow Commonwealth Games 2026 Silver Medal

गुलवीर सिंह - फोटो : ANI/Twitter

चार साल बाद मिला पहला बड़ा इनाम
सेना में आने के बाद भी सफलता तुरंत नहीं मिली। लगातार चार साल तक उन्होंने खुद को निखारा। आखिरकार 2022 में फेडरेशन कप में 10,000 मीटर दौड़ का कांस्य पदक जीतकर उन्होंने पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। यही वह मोड़ था, जहां से उनका सफर तेजी से आगे बढ़ने लगा।

रिकॉर्ड तोड़ना बन गई पहचान

  • 2024 में गुलवीर ने अमेरिका के कोलोराडो स्प्रिंग्स में प्रशिक्षण शुरू किया। इसके बाद मानो भारतीय एथलेटिक्स को नया सितारा मिल गया।
  • उन्होंने 3000 मीटर, 5000 मीटर और 10,000 मीटर में लगातार राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़े।
  • 2025 में उन्होंने एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5000 और 10,000 मीटर दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
  • इसी दौरान उन्होंने 10,000 मीटर में 27:00.22 का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया और हाफ मैराथन 60 मिनट से कम समय में पूरी करने वाले पहले भारतीय भी बने।

विज्ञापन

The Inspiring Story of Gulveer Singh, From Army Dreams to Glasgow Commonwealth Games 2026 Silver Medal

गुलवीर सिंह - फोटो : ANI/Twitter

रिकॉर्ड नहीं, देश के लिए दौड़ते हैं गुलवीर
इतनी उपलब्धियों के बाद भी गुलवीर खुद को रिकॉर्डों से नहीं जोड़ते। उनका कहना है, 'मैं कभी रिकॉर्ड या आंकड़ों के बारे में नहीं सोचता। मेरा लक्ष्य सिर्फ अपना सर्वश्रेष्ठ देना होता है। राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनने के बाद भी मैं ज्यादा देर तक उसके बारे में नहीं सोचता।' शायद यही सोच उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है।

मां की याद में छलक पड़ती हैं आंखें
लगातार ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं के कारण गुलवीर महीनों तक घर से दूर रहते हैं। उन्होंने एक बार भावुक होकर कहा था, 'कभी-कभी मां से बात करते हुए मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं। मुझे अपने पिता, मां और बच्चों की बहुत याद आती है।' यही परिवार उन्हें हर मुश्किल समय में आगे बढ़ने की ताकत देता है।