Wimbledon 2026: लिंडा नोस्कोवा बनीं नई चैंपियन, मुचोवा को हराकर जीता पहला ग्रैंड स्लैम खिताब| Navbharat Live

Published on 12 जुल॰ 2026

Updated On: Jul 12, 2026 | 11:12 AM IST

विज्ञापन

सार

Linda Noskova Won Grand Slam Title: चेक गणराज्य की 21 वर्षीय लिंडा नोस्कोवा ने अपनी ही देश की कैरोलिना मुचोवा को 6-2, 5-7, 6-3 से हराकर विंबलडन 2026 महिला एकल का खिताब जीत लिया है।

Wimbledon 2026: Linda Nosková becomes the new champion; wins first Grand Slam title by defeating Muchová.

लिंडा नोस्कोवा (सोर्स- सोशल मीडिया)

विस्तार

Linda Noskova Wimbledon Champion 2026: विंबलडन 2026 के महिला एकल फाइनल में चेक गणराज्य की 21 वर्षीय लिंडा नोस्कोवा ने अपने देश की ही खिलाड़ी कैरोलिना मुचोवा को 6-2, 5-7, 6-3 से हराकर टेनिस इतिहास में अपना पहला ग्रैंड स्लैम और पहला विंबलडन खिताब जीत लिया। करीब दो घंटे तक चले इस मुकाबले में नोस्कोवा ने दबाव के बावजूद शानदार संयम दिखाया और करियर की सबसे बड़ी जीत हासिल की।

दूसरे सेट में गंवाई लीड

नोस्कोवा ने पहले सेट में शानदार शुरुआत करते हुए 6-2 से जीत दर्ज की। दूसरे सेट में वो एक समय जीत के बेहद करीब थीं और 5-2 की बढ़त भी बना चुकी थीं, लेकिन मुचोवा ने शानदार वापसी करते हुए लगातार गेम जीतकर सेट 7-5 से अपने नाम कर लिया। इसके बाद मुकाबला आर या पार की स्थिती से तीसरे सेट में पहुंच गया।

नतीजे वाले सेट में नहीं दोहराई गलती

तीसरे सेट में नोस्कोवा ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और 5-2 की बढ़त बना ली। मुचोवा ने एक गेम जीतकर वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन इस बार नोस्कोवा ने कोई गलती नहीं की। उन्होंने दूसरी बार मैच सर्व करते हुए जीत अपने नाम की और कोर्ट पर खुशी से भावुक होकर बैठ गई।

सम्बंधित ख़बरें

आंकड़ों में भी रहीं आगे

पूरे मैच में नोस्कोवा का प्रदर्शन हर विभाग में बेहतर रहा। उन्होंने 10 ऐस लगाए, जबकि मुचोवा सिर्फ 6 ऐस ही लगा सकीं। पहली सर्विस पर भी नोस्कोवा ने 74 प्रतिशत अंक जीते और 13 में से 4 ब्रेक प्वाइंट भुनाए। मैच में उन्होंने कुल 109 अंक जीते, जबकि मुचोवा के खाते में 92 अंक आए।

ये भी पढ़े:- FIFA World Cup: सेमीफाइनल में पहुंचा अर्जेंटीना, स्विट्जरलैंड को 3-1 से हराया; एक्स्ट्रा टाइम में पलटा मैच

नोस्कोवा ने रचा नया इतिहास

इस जीत के साथ लिंडा नोस्कोवा अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने में सफल रहीं। वह चेक दिग्गज पेट्रा क्वितोवा के बाद सबसे कम उम्र में विंबलडन महिला एकल चैंपियन बनने वाली खिलाड़ी भी बन गई हैं। क्वितोवा ने 2011 में अपना पहला विंबलडन खिताब जीता था और इस बार वह सेंटर कोर्ट में बैठकर नोस्कोवा की ऐतिहासिक जीत की गवाह बनीं। इस खिताब के बाद उम्मीद है कि नई डब्ल्यूटीए रैंकिंग में नोस्कोवा अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ सातवीं रैंकिंग पर पहुंच जाएंगी।

Follow Navbharatlive whatsapp