World ORS Day: मानसून में भी हो सकता है डिहाइड्रेशन का खतरा, जानिए ORS कब बनता है सबसे बड़ा सहारा

Published on 29 जुल॰ 2026

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मानसून में कितना फायदेमंद है ORS!

World ORS Day: बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं अपने साथ कई संक्रामक बीमारियां भी लेकर आता है। इस दौरान दूषित पानी, बासी खाना और गंदगी के कारण डायरिया (दस्त), उल्टी और पेट के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं। इन बीमारियों में सबसे बड़ा खतरा संक्रमण से ज्यादा डिहाइड्रेशन का होता है। ऐसे समय में एक छोटा-सा ORS (Oral Rehydration Solution) का पैकेट कई बार अस्पताल जाने की नौबत तक टाल सकता है। हालांकि ORS का सही समय और सही तरीका जानना भी उतना ही जरूरी है। आज ORS Day के मौके पर हम आपको बताएंगे कि कब ORS आपके लिए फायदेमंद होता है।

मानसून में पेट का संक्रमण क्यों बढ़ जाता है

बारिश के मौसम में नमी और गंदा पानी बैक्टीरिया, वायरस और परजीवियों के पनपने के लिए अच्छा वातावरण बनाते हैं। इस मौसम में बाहर का खुला और अधपका खाना या दूषित पानी पीने से पेट का संक्रमण हो सकता है। इसके कारण बार-बार दस्त, उल्टी, पेट दर्द और बुखार जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यदि समय रहते शरीर में पानी की कमी पूरी न की जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

क्यों जरूरी है ORS

डिहाइड्रेशन होने पर आपको ध्यान रखना चाहिए कि ORS केवल पानी नहीं है। इसमें ग्लूकोज और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे- सोडियम, पोटैशियम आदि का संतुलित मिश्रण होता है, जो शरीर में खोए हुए लिक्विड और मिनिरल्स की भरपाई करने में मदद करता है। यही कारण है कि दुनिया भर में डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए ORS को सबसे प्रभावी और किफायती उपायों में गिना जाता है।

ध्यान रखें कि, ORS दस्त या संक्रमण की दवा नहीं है, बल्कि यह डिहाइड्रेशन से बचाने का माध्यम है। यदि आपको किसी तरह के संक्रमण की आशंका है तो, डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इलाज होना चाहिए।

कब ORS सबसे ज्यादा फायदा देता है?

यदि किसी व्यक्ति को बार-बार दस्त हो रहे हों, उल्टी के कारण शरीर में पानी की कमी हो रही हो, तेज बुखार के साथ अत्यधिक पसीना आ रहा हो या गर्मी और नमी के कारण कमजोरी महसूस हो रही हो, तो ऐसी स्थिति में ORS काफी मददगार साबित हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक होता है। इसलिए इन लोगों में दस्त या उल्टी शुरू होते ही डॉक्टर की सलाह के साथ ORS देना महत्वपूर्ण माना जाता है।

ORS का सही इस्तेमाल कैसे करें

ORS का पैकेट हमेशा निर्धारित मात्रा में ही घोलें। पानी कम या ज्यादा ORS मिलाने से घोल का संतुलन बिगड़ सकता है और उसका असर कम हो सकता है। आमतौर पर ORS के 1 पैकेट को 1 लीटर पानी में घोलने के लिए बनाया जाता है। इस तरह घोल तैयार होने के बाद इसे 24 घंटे के भीतर इस्तेमाल कर लें। इसके बाद बचा हुआ घोल फेंक दें और जरूरत पड़ने पर नया घोल बनाएं।

दस्त या उल्टी के दौरान थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार ORS पिलाना बेहतर माना जाता है। छोटे बच्चों को चम्मच-चम्मच करके देना अधिक सुरक्षित रहता है।

ORS के इस्तेमाल में ये गलतियां न करें

कई लोग ORS में अतिरिक्त चीनी या नमक मिला देते हैं, जो सही नहीं है। कुछ लोग पैकेट को आधे गिलास पानी में घोलकर पी लेते हैं, जबकि कई लोग तैयार घोल को दो-तीन दिन तक इस्तेमाल करते रहते हैं। ये सभी गलतियां ORS के प्रभाव को कम कर सकती हैं। इसके अलावा ORS को कोल्ड ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक या सिर्फ ग्लूकोज ड्रिंक का विकल्प समझना भी गलत है। इन ड्रिंक्स में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन ORS जैसा नहीं होता है।

कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए

यदि बार-बार उल्टी होने के कारण ORS भी पेट में नहीं रुक रहा हो, दस्त के साथ खून आ रहा हो, तेज बुखार हो, व्यक्ति बहुत सुस्त हो जाए, आंखें धंस जाएं, पेशाब बहुत कम होने लगे या छोटे बच्चे लगातार रो रहे हों और आंसू न निकल रहे हों, तो केवल ORS पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

मानसून में कैसे रखें सेहत का ख्याल

बारिश के मौसम में उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं, ताजा और गर्म भोजन खाएं, सड़क किनारे खुले खाद्य पदार्थों से बचें तथा खाने से पहले और शौचालय के बाद साबुन से हाथ जरूर धोएं। यदि घर में छोटे बच्चे या बुजुर्ग हैं, तो फर्स्ट एड किट में ORS के पैकेट रखना एक अच्छी तैयारी हो सकती है।

gulshan kumar

गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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