राजस्थान निकाय चुनाव: महज 0.94% वोट कम और बीजेपी से 566 वार्ड पीछे रही कांग्रेस, जोधपुर में मैच टाई... अब 5 मेयरों पर होगी लड़ाई

Published on 15 सित॰ 2026

राजस्थान निकाय चुनाव: महज 0.94% वोट कम और बीजेपी से 566 वार्ड पीछे रही कांग्रेस, जोधपुर में मैच टाई… अब 5 मेयरों पर होगी लड़ाई

राजस्थान स्थानीय निकाय चुनाव 2026

राजस्थान में निकाय चुनाव में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को बड़ी जीत मिली है. 10 में से 4 नगर निगमों पर बीजेपी का कब्जा हो गया है. पूरे राज्य में बीजेपी को 4 हजार से अधिक वार्ड में जीत मिली है. कांग्रेस का प्रदर्शन भी खराब नहीं रहा और पार्टी ने बीजेपी के कई बड़े नेताओं के गढ़ में जोरदार सेंधमारी की है. बागी से बतौर निर्दलीय मैदान में उतरे प्रत्याशियों ने कई निकायों का खेल ही बदल दिया है. बीजेपी को भले ही बड़ी जीत मिली हो, लेकिन कांग्रेस और उसके बीच वोटों का अंतर बहुत ही कम है.

चुनाव परिणाम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन को “झूठ की गूंज” पर “सच की जीत” का सबूत करार दिया. उन्होंने कहा कि नगर निकाय चुनाव में बीजेपी को प्रचंड जीत दिलाने के लिए जनता-जनार्दन का हृदय से आभार. यह झूठ की गूंज के सामने सत्य की विजय का प्रमाण है.

कांग्रेस- बीजेपी में वोट शेयरिंग 1% से कमः डोटासरा

तो वहीं राजस्थान में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने दावा किया कि शहरी निकाय चुनाव के परिणाम बीजेपी सरकार के खराब प्रदर्शन को प्रतिबिंबित करते हैं. उन्होंने यह दावा भी किया कि सत्तारूढ़ दल की कांग्रेस पर वोटर शेयरिंग की बढ़त एक फीसदी (0.94%) से भी कम रही है.

सोशल मीडिया पर किए अपने पोस्ट में डोटासरा ने दावा किया कि वसुंधरा राजे सिंधिया सरकार के दौरान (2014-16 निकाय चुनाव) बीजेपी को कांग्रेस पर 8.12 फीसदी वोटर शेयरिंग की बढ़त मिली थी, जबकि अशोक गहलोत सरकार के दौरान 2019-21 के चुनाव में कांग्रेस बीजेपी से 2.2 फीसदी वोटों से आगे रही थी. वहीं इस चुनाव में बीजेपी की कांग्रेस पर बढ़त एक फीसदी से भी कम की रही है.

अगर परिसीमन में अनियमितता नहीं होती तो…

कांग्रेस नेता का दावा है कि अगर वार्ड परिसीमन में अनियमितता नहीं बरती जाती तो पार्टी को और भी फायदा होता. इस वजह से बीजेपी को फायदा मिल गया. उनका कहना है कि अनुचित परिसीमन को अलग रखकर परिणामों को देखा जाए तो कांग्रेस बीजेपी से करीब 1,500 अधिक वार्ड जीत जाती.

डोटासरा ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस ने अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व 542 वार्ड में जीत हासिल तो बीजेपी को महज 350 वार्डों में जीत मिली. इसी तरह अनुसूचित जाति महिला के लिए रिजर्व कुल वार्ड में कांग्रेस के खाते में 261 तो बीजेपी के खाते में 186 वार्ड आए. अनुसूचित जनजाति महिला के लिए रिजर्व वार्ड में कांग्रेस ने 53 और बीजेपी ने 39 सीटों पर जीत हासिल की.

1,316 वार्डों में जीत का अंतर 100 वोटों से कम

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा परिसीमन की बेवजह आलोचना नहीं कर रहे हैं. परिसीमन की वजह से ज्यादातर वार्ड में वोटर्स की संख्या में काफी अंतर रहा. उनका दावा है कि बीजेपी द्वारा जीते गए 4 हजार से अधिक वार्ड में से 1,316 वार्डों में जीत का अंतर 100 वोटों से कम तो 772 वार्ड में यही अंतर 50 वोटों से कम का रहा. यही नहीं 13 वार्ड तो ऐसे रहे जहां बीजेपी को महज एक वोट के अंतर से जीत हासिल हुई.

कांग्रेस ने अजमेर, पाली और बीकानेर में शानदार प्रदर्शन किया. अजमेर के 80 वार्ड में कांग्रेस ने 37 तो बीजेपी ने 32 वार्ड जीते. यहां पर 11 निर्दलीयों को जीत मिली. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के गढ़ कहे जाने वाले पाली के कुल 65 वार्ड में से कांग्रेस के खाते में 29 वार्ड गए जबकि बीजेपी को महज 21 वार्ड में जीत मिली. 15 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों को जीत मिली.

बीकानेर में कांग्रेस, जोधपुर में मुकाबला टाई

बीकानेर में भी कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा रहा. यहां के 80 में से 42 वार्ड जीतकर वह बोर्ड बनाने की स्थिति में दिख रही है. बीजेपी को 27 सीटों पर तो निर्दलीय को 10 सीटों पर जीत हासिल हुई. वहीं अशोक गहलोत के क्षेत्र जोधपुर में मुकाबला टाई हो गया है . कांग्रेस ने 100 में से 44 वार्ड जीते, जबकि बीजेपी को भी इतनी ही सीटों पर जीत मिली. 10 सीट निर्दलीयों के खाते में गए. एक अन्य RLP के खाते में गई है.

हालांकि डोटासरा दावा करते हैं कि जोधपुर में उनकी सरकार बनेगी. उनके अनुसार, कांग्रेस को जोधपुर में 42.7 फीसदी तो बीजेपी को 39.8 फीसदी वोट मिले हैं. कुल मिलाकर यहां पर निर्दलीय ही निर्णायक होंगे.

CM भजन लाल के घर में भी हारी बीजेपी

जयपुर नगर निगम को लेकर कांग्रेस नेता डोटासरा ने दावा किया कि जयपुर में बीजेपी ने भले ही 150 में से 78 वार्ड जीते हैं, लेकिन कांग्रेस को भगवा पार्टी की तुलना में 10 हजार से अधिक वोट तो मिले हैं.

मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में नगर निगम चुनाव में बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा है. बीजेपी यहां 65 में से महज 20 वार्ड ही जीत सकी. निर्दलीयों ने यहां दबदबा बना लिया है और 36 लोगों ने जीत हासिल की है. कांग्रेस को भले ही 7 सीटों पर संतोष करना पड़ा हो, लेकिन बीजेपी का खेल निर्दलीय प्रत्याशियों ने खराब कर ही दिया.

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के गढ़ कहे जाने वाले झालावाड़ नगर परिषद में भी बीजेपी का प्रदर्शन गिरा है. 45 वार्ड में से बीजेपी को 13 तो कांग्रेस को 29 वार्ड में जीत मिली. 2 सीट निर्दलीय के खाते में गए.

इसके अलावा सीकर, बीकानेर, झुंझुनूं, हनुमानगढ़ और चूरू में भी कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया है. जबकि ये क्षेत्र बीजेपी के कई बड़े नेताओं और मंत्रियों से जुड़े होने की वजह से चर्चा में रहे हैं.

मकराना (डीडवाना-कुचामन) के 60 वार्डों में से 36 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी जीते हैं तो कांग्रेस के खाते में 18 और बीजेपी को 6 सीटों पर जीत मिली है. इसी तरह झुंझुनूं के पिलानी में 35 में से 30 वार्डों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल कर पूरा खेल ही बिगाड़ दिया है.

निर्दलीयों ने कई जगहों का खेल बिगाड़ा

निकाय चुनाव में इस बार बागी बनकर निर्दलीय ही मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों ने सभी दलों का खेल बिगाड़ दिया. राज्य चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार, राज्य के कुल 10,244 वार्ड में बीजेपी को 4179 वार्ड पर जीत मिली जबकि कांग्रेस के खाते में 3613 सीट आईं. कांग्रेस इस तरह से बीजेपी से 566 वार्ड कम रह गई. तीसरे नंबर पर रहे निर्दलीय जिसमें 2273 प्रत्याशियों ने जीत हासिल की. आम आदमी पार्टी ने 42 सीटों पर जीत दर्ज कराई तो बहुजन समाज पार्टी भी 19 सीट अपने नाम करने में कामयाब रही.

लेफ्ट पार्टी CPI-M ने भी शानदार प्रदर्शन किया और कुल 38 सीटों पर अपनी जीत दर्ज कराई. CPI-M ने नोखा नगर पालिका में 45 में से 29 सीटों पर जीत हासिल की. बीजेपी को 13 तो कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला. 3 सीटों पर निर्दलीय विजयी हुए. वहीं आरएलपी के खाते में 63 सीटें आई.

5 नगर निगमों में किसी को बहुमत नहीं

राजस्थान के 10 नगर निगमों में बीजेपी ने जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा में स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि बीकानेर में कांग्रेस को बहुमत मिला है. इसके अलावा 5 नगर निगमों (भरतपुर, पाली, अलवर, अजमेर और जोधपुर) में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है.

जोधपुर में बीजेपी और कांग्रेस दोनों के 44-44 पार्षद हैं, ऐसे में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो गई है. भरतपुर में भी निर्दलीय अहम स्थिति में हैं, अलवर में बीजेपी आगे जरूर है, लेकिन बहुमत से काफी दूर है. अजमेर और पाली में कांग्रेस के नंबर वन होने के बाद भी बोर्ड बनाने के लिए उसे निर्दलीयों से समर्थन जुटाना होगा. ऐसे में परिणामों के आधार पर देखें तो इस बार कई जगहों पर निर्दलीय बोर्ड के गठन में अहम भूमिका निभाने जा रहे हैं.

सुरेन्द्र कुमार वर्मा

सुरेन्द्र कुमार वर्मा

पत्रकारिता जगत में पिछले डेढ़ दशक से भी लंबे समय से सक्रिय हूं. अखबारों की दुनिया से होते हुए मैं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आया. अभी टीवी9 भारतवर्ष के साथ जुड़ा हुआ हूं. शुरुआत हरिभूमि के साथ की. फिर दैनिक जागरण गया और इसके बाद जागरण.कॉम के जरिए डिजिटल की दुनिया में आया. यहां से मैं अमर उजाला की डिजिटल टीम के साथ जुड़ा रहा. फिर इंडिया टुडे ग्रुप से नाता जुड़ा. न्यूजफ्लिक्स में रहने के बाद आजतक डॉट इन में आया. इंडिया टुडे ग्रुप में 5 साल तक  रहने के बाद इसे अलविदा कहा. फिर अपना कारवां टीवी9 के साथ जुड़ गया. अभी टीवी9 के साथ पत्रकारिता के लिए अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मैं राजनीति, खेल और मनोरंजन समेत लगभग हर विधा में लिखता हूं. सोशल मीडिया पर 50-50 का नाता है. फेसबुक पर ज्यादा जाना नहीं हो पाता है, लेकिन पहले ट्विटर और अब X पर सक्रिय रहता हूं. परवरिश गोरखपुर में हुई, लेकिन कर्मस्थली अभी नोएडा बना हुआ है.

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