सीएम योगी का मथुरा को बड़ा तोहफा: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर 1,051 करोड़ की 229 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास

Published on 3 सित॰ 2026

उत्तर प्रदेश की राजनीति, संस्कृति और आध्यात्मिक उत्थान के केंद्र बिंदु माने जाने वाले पवित्र ब्रज क्षेत्र में भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी के पावन और ऐतिहासिक अवसर पर एक बेहद भव्य और उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिल रहा है। इस विशेष अवसर पर दो दिवसीय दौरे पर मथुरा पहुंचे उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थानीय जनता को करोड़ों रुपये की विकास सौगातें देकर ब्रजवासियों की वर्षों पुरानी उम्मीदों को पंख लगा दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अपने इस दौरे के दौरान मथुरा जिले में कुल मिलाकर 229 प्रमुख विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, जिनकी कुल अनुमानित लागत 1,051 करोड़ रुपये से अधिक है। इस विशाल विकास पैकेज में 62 पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं का सफलतापूर्वक लोकार्पण किया गया, जबकि 167 नई और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की आधारशिला (शिलान्यास) रखी गई। इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से न केवल मथुरा और वृंदावन आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि स्थानीय व्यापार, परिवहन और पर्यटन उद्योग को भी अभूतपूर्व गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि उनका यह अ सौभाग्य है कि उन्हें भगवान श्री कृष्ण की पावन जन्मस्थली और ब्रज की इस पवित्र माटी पर जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर आने और यहां की लोक परंपराओं, लोक कलाओं तथा आध्यात्मिक चेतना के साथ सीधे तौर पर जुड़ने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने इस बात पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की कि आज के इस ऐतिहासिक समारोह में महान संत और संगीत सम्राट स्वामी हरिदास के नाम पर बने अत्याधुनिक 'स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह और सभागार' का भी लोकार्पण किया गया है, जो ब्रज की संगीत और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में एक मील का पत्थर साबित होगा। उत्तर प्रदेश सरकार लगातार यह प्रयास कर रही है कि धार्मिक पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर मथुरा-वृंदावन को सर्वोच्च स्थान दिलाया जाए, और यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में बुनियादी ढांचे से लेकर सौंदर्यीकरण तक के कार्यों को मिशन मोड में पूरा किया गया है।

विकास के साथ विरासत का सम्मान: सनातन संस्कृति और प्राचीन परंपराओं का गौरवशाली इतिहास

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश के सांस्कृतिक इतिहास, सभ्यतागत संघर्षों और विकास की वर्तमान अवधारणा पर एक बहुत ही गहरा और वैचारिक वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब देश और प्रदेश में विकास को केवल बिजली, पानी और सड़कों के सीमित दायरे में देखा जाता था, और विकास के नाम पर हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का अपमान किया जाता था। विदेशी आक्रांताओं ने सुनियोजित तरीके से भारत की सनातन संस्कृति और धार्मिक आस्था के केंद्रों को नष्ट करने की चेष्टा की, लेकिन वे कभी भी भारत की मूल आत्मा और लोक स्मृतियों को मिटाने में सफल नहीं हो सके। इतिहास इस बात का गवाह है कि भारत का इतिहास केवल युद्धों या राजनीतिक उपलब्धियों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति की अटूट और अनवरत निरंतरता का महान इतिहास है।

मथुरा के ऐतिहासिक संदर्भों को याद करते हुए सीएम योगी ने कहा कि अतीत में किस प्रकार अराजकता का माहौल था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक समय मथुरा के जवाहरबाग में हुई हिंसक घटना में निर्दोष लोगों और पुलिसकर्मियों तक को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। जहां इस तरह के उपद्रव और अराजकता का बोलबाला हो, वहां विकास की कल्पना तक नहीं की जा सकती थी। लेकिन 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ और आज प्रदेश पूरी तरह से दंगा-मुक्त, कर्फ्यू-मुक्त और अपराध-मुक्त राज्य बन चुका है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि कोई भी राष्ट्र अपनी संस्कृति, अपने इतिहास और अपनी लोक स्मृतियों से ही महान बनता है। जब समाज को अपनी असली विरासत का सही बोध होता है, तभी वह दुनिया को नई दिशा दिखाने में सक्षम होता है।

काशी और अयोध्या की तर्ज पर मथुरा का विकास, वृंदावन कॉरिडोर पर बड़ा बयान

अपने ओजस्वी भाषण में मुख्यमंत्री ने काशी और अयोध्या के ऐतिहासिक कायाकल्प का जिक्र करते हुए मथुरा और वृंदावन के भविष्य के रोडमैप को भी बहुत स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखा। उन्होंने कहा कि आक्रांता औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ के मंदिर को तोड़ा था, लेकिन सनातन की परंपरा और आस्था कभी समाप्त नहीं हुई, और आज काशी विश्वनाथ धाम अपनी अद्भूत भव्यता के साथ दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। ठीक इसी प्रकार, अयोध्या में भी भगवान राम के जन्मस्थान पर विवादित ढांचा खड़ा किया गया था, लेकिन राम भक्तों की अटूट निष्ठा और कानूनी संघर्ष के बाद आज वहां भगवान श्रीराम का एक अलौकिक और भव्य मंदिर बनकर तैयार हो चुका है, जिसे दुनिया देख रही है।

वृंदावन में प्रस्तावित कॉरिडोर के मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहुत महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वृंदावन में कॉरिडोर का निर्माण कार्य पूरी तरह से वैधानिक प्रक्रिया के तहत माननीय न्यायालय के आदेशों के पालन के बाद ही आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार की मंशा है कि बांके बिहारी मंदिर और आसपास के कुंज गलियों में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की भीड़भाड़ या असुविधा का सामना न करना पड़े, और इसके लिए स्थानीय जनता, संतों और स्टेकहोल्डर्स को विश्वास में लेकर ही सभी निर्णय लिए जाएंगे। आज उत्तर प्रदेश सरकार 'विरासत भी और विकास भी' तथा 'परंपरा भी और परिवर्तन भी' के मूल मंत्र पर पूरी ईमानदारी के साथ आगे बढ़ रही है।

स्मार्ट सिटी मिशन और एक हजार करोड़ के निवेश से बदल रही है ब्रज क्षेत्र की तस्वीर

पिछले आठ वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार द्वारा ब्रज क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों का लेखा-जोखा रखते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि किस तरह स्मार्ट सिटी मिशन और विभिन्न धार्मिक पर्यटन योजनाओं के तहत मथुरा और वृंदावन का कायाकल्प किया जा रहा है। पिछले लगभग आठ वर्षों में अकेले मथुरा-वृंदावन क्षेत्र के समग्र विकास पर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली दर्जनों महत्वपूर्ण योजनाओं को धरातल पर उतारा जा चुका है। भगवान श्रीकृष्ण और माता राधा की बाल लीलाओं, उनके चरणों की धूल से पवित्र हुए सभी प्रमुख वनों, कुंजों और तीर्थ स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर विकसित किया जा रहा है, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं मिल सकें।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत तभी एक सच्चे और विकसित राष्ट्र की परिकल्पना को साकार कर सकता है जब वह अपनी जड़ों और अपनी महान सांस्कृतिक विरासत से मजबूती से जुड़ा रहे। मथुरा का यह विकास उत्सव केवल ईंट-पत्थर और सीमेंट की इमारतों का निर्माण नहीं है, बल्कि यह सनातन आस्था के पुनर्जागरण और उत्तर प्रदेश के नए स्वर्णिम भविष्य की एक स्पष्ट बानगी है। इस अवसर पर उनके साथ सांसद हेमा मालिनी, राज्य सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री, स्थानीय विधायक और देश-विदेश से आए प्रख्यात संत-महात्मा तथा हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने हर-हर महादेव और बांके बिहारी लाल के जयकारों के साथ इस ऐतिहासिक विकास पर्व का स्वागत किया।