Sep 10, 2026 09:31 pm ISTपीटीआई, नई दिल्ली

ताजा घटनाक्रम में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने गुरुवार को यमन के बंदरगाह शहर मोचा पर कब्ज़ा कर लिया और लाल सागर के तट से होते हुए रणनीतिक द्वीपों की ओर आगे बढ़ चुके हैं। इसके साथ ही हूतियों ने बाब अल-मंदेब पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है।

मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारतीय नौसेना का पोत आईएनएस सुदर्शिनी भूमध्यासागर जा पहुंचा है।
मिडिल-ईस्ट में फिर से जंग और तनाव गहरा गया है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने हाल के दिनों में सऊदी अरब के तेल और सैन्य ठिकानों के साथ-साथ कॉमर्शियल एयरपोर्ट और दक्षिणी शहरों पर बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। इससे जंग अब दूसरे क्षेत्रों में प्रवेश कर गया है। मुस्लिम नाटो भी इस नई जंग और तनाव पर भौंहें ताने खड़ा है। पाकिस्तान मक्का समझौते की दुहाई दे ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर बम गिराने को बेकरार है।
इन सबके बीच, भारतीय नौसेना का पोत आईएनएस सुदर्शिनी भूमध्यासागर जा पहुंचा है। हालांकि, यह एक प्रशिक्षण पोत है जो अपनी अंतरमहाद्वीपीय समुद्री यात्रा 'लोकायन-26' के अंतर्गत अब इटली के लिवोर्नो बंदरगाह शहर पर पहुंचा है। यह पोत ट्रांस-ओशनिक अभियान 'लोकायन 2026' के तहत वहां पहुंचा है। इस अभियान के दौरान पोत 10 देशों से होते हुए 17,400 नॉटिकल मील से ज़्यादा की दूरी तय कर वहां पहुंचा है। इसके साथ ही आईएनएस सुदर्शिनी भारत की समुद्री परंपराओं को बढ़ावा दे रहा है और मित्र देशों के साथ संबंध मजबूत कर रहा है।
भूमध्यसागर में संयुक्त युद्धाभ्यास
लिवोर्नो पहुँचने से पहले, इस पोत ने भूमध्य सागर में इतालवी नौसेना के ट्रेनिंग शिप ITS पैलिनुरो के साथ 'पैसेज एक्सरसाइज' (समुद्री मार्ग पर संयुक्त अभ्यास) की। इस अभ्यास में तालमेल बिठाकर जहाज चलाने और पाल (सेल) संभालने का अभ्यास शामिल था, जिससे दोनों नौसेनाओं के कर्मियों को एक-दूसरे से बातचीत करने और पेशेवर जानकारी साझा करने का मौका मिला। लिवोर्नो में भारतीय नौसैनिकों का रुकना इसलिए भी खास है क्योंकि यह शहर प्रतिष्ठित इतालवी नौसेना अकादमी का घर है और इससे भारतीय और इतालवी नौसेनाओं के बीच आगे और पेशेवर सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
पेशेवर बातचीत करने का कार्यक्रम
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक यहाँ रुकने के दौरान, भारतीय नौसेना के प्रशिक्षुओं और इतालवी कैडेटों के बीच एक-दूसरे के जहाजों का दौरा करने और पेशेवर बातचीत करने का कार्यक्रम है। INS सुदर्शिनी को आगंतुकों के लिए भी खोला जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को भारतीय नौसेना की सेल ट्रेनिंग परंपराओं को करीब से जानने का मौका मिलेगा।
तैनाती का क्या मकसद?
इस तैनाती का मकसद भारत और सहयोगी देशों के बीच आपसी भाईचारा बढ़ाना, पेशेवर आदान-प्रदान को बेहतर बनाना और समुद्री सहयोग को मजबूत करना है। बता दें कि 'लोकायन 2026' भारत की व्यापक समुद्री पहुंच और 'महासागर' (MAHASAGAR - क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र प्रगति) के विजन के अनुरूप भी है। यह अभियान समुद्री साझेदारी को आगे बढ़ाने और समुद्र के रास्ते दोस्ती, सहयोग और साझा समृद्धि का संदेश फैलाने में भारतीय नौसेना की भूमिका को रेखांकित करता है।