कोटा जिले से गुजर रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर 1100 करोड़ की लागत से बनी मुकंदरा टनल में पहली बारिश में ही पानी भर गया। टनल में पहाड़ों से जगह-जगह से पानी रिसकर सोमवार को इसमें भरता रहा। इससे टनल से गुजरने वाले वाहनों के टायर डूब गए। वहीं इस लापरवा
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दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर बनी टनल सुरक्षा के लिहाज से देश की सबसे एडवांस है। यह सुरंग देश में 8 लेन की सबसे लंबी है। इसकी लंबाई कुल 4.9 किलोमीटर है। इसे न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से बनाया गया है। सवाल उठने लगे कि विदेशी तकनीक से बनी टनल के असेसमेंट में कहां कमी रह गई।
NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संदीप अग्रवाल ने बताया- बारिश ज्यादा थी। इस कारण सिपेज का पानी अंदर आ गया। पंप कम कैपेसिटी के थे। इस कारण पानी बाहर नहीं निकल पाया। अब पंप की कैपेसिटी बढ़ाई जाएगी।
वहीं दैनिक भास्कर ने टनल में पानी भरने के कारणों को लेकर एक्सपर्ट्स की राय जानी। जानें एक्सपर्ट ने क्या कहा।
बता दें कि इस टनल के समय पर तैयार नहीं होने का सबसे बड़ा कारण ड्रेनेज सिस्टम रहा है। निर्माण के दौरान भी पहाड़ी से लगातार पानी का रिसाव होता रहा, जो टनल के अंदर भर जाता था। उस समय टनल में लगाए गए पंप पानी बाहर नहीं निकाल पा रहे थे।
अब पहले देखें सुरंग में बदहाली के PHOTOS

बारिश का पानी मुकंदरा टनल में भरने से गाड़ियां निकालने में परेशानी होती रही।

मुकंदरा टनल की लंबाई कुल 4.9 किलोमीटर है। आधी टनल में पानी भर गया।

टनल की दीवारों में पहाड़ों से रिसकर पानी जगह-जगह से निकल रहा है।

कई जगह रिसाव से पानी का बहाव तेज है।

टनल की दीवारों से पानी रिसने से इसमें दरारें पड़ गई हैं।

पानी भरने से टनल के बाहर जाम भी लग गया है।


एक्सपर्ट ने पानी भरने के तीन मुख्य कारण बताए
एक्सपर्ट PWD के रिटायर्ड सुपरिटेंडिंग इंजीनियर और प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहे जेपी गुप्ता ने पानी भरने के ये तीन कारण बताए-
- पहला- जितनी जगह सम्प (भूमिगत चैंबर) बनाए गए थे, उतनी जगह पंप नहीं लगाए गए।
- दूसरा- जितनी जगह पंप लगाने चाहिए थे या तो उतनी जगह पंप नहीं लगाए गए। इसके अलावा जितनी कैपेसिटी के पंप लगाने चाहिए थे, उतनी कैपेसिटी के नहीं लगाए गए।
- तीसरा- ओपन एरिया से आने वाले पानी को रोकने के लिए कवरिंग नहीं की गई।
विशेषज्ञ बोले- पंपिंग कैपेसिटी के असेसमेंट में कमी
PWD के रिटायर्ड सुपरिटेंडिंग इंजीनियर और प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहे जेपी गुप्ता ने बताया- टनल में पानी भरने का कारण इनफ्लो वाटर को निकालने के लिए पंपिंग कैपेसिटी के असेसमेंट में कमी रही है। पानी के इनफ्लो को ध्यान में रखकर ही पंप लगाकर ड्रेन आउट करना आवश्यक है। बरसाती पानी को टनल में घुसने से रोकने के लिए सम्प (गहरे चैंबर) बनाए गए हैं। इन्ही सम्प से पंपिंग के जरिए पानी को निकाला जाता है। ताकि टनल में पानी नहीं घुसे। पानी भरने की समस्या के समाधान के लिए पंप की कैपेसिटी बढ़ानी चाहिए।
दूसरा टनल के दोनों तरफ खुली ढलान है। अगर ओपन एरिया से ज्यादा पानी आ रहा है, तो उस पानी को रोकने के लिए कवरिंग पर भी विचार करना चाहिए। ताकि टनल में ओपन एरिया का पानी नहीं आ सकें।
दरारों से पानी अंदर आया, पंपों की कैपेसिटी बढ़ाएंगे
NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संदीप अग्रवाल ने बताया- बारिश के बाद सिपेज (दरार) से पानी अंदर आ गया। पंपों के जरिए पानी कम निकल रहा था, इसीलिए पानी भर गया। क्योंकि पानी का इनफ्लो ज्यादा था और आउटफ्लो कम था। फिलहाल कोई विशेष दिक्कत नहीं है। पानी निकल जाएगा। हम पंप की कैपेसिटी बढ़ा रहे हैं।
अग्रवाल ने बताया- ट्यूब 1 और ट्यूब 2 में 30 पंप लगे हैं। यह 10- 25 हॉर्स पावर के हैं। कुछ पंपों की कैपेसिटी बढ़कर 35 हॉर्स पावर की जाएगी। ये कैपेसिटी पानी और डिजाइन के हिसाब से बढ़ाई जाएगी। पहले जो डिजाइन में एसेस किया था, वह कैपेसिटी में कम रह गए। यह टेक्निकल चीज है।
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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा- एक लाख 10 हजार करोड़ रुपए खर्च करके दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का 80% निर्माण पूरा हो गया है। दो साल के अंदर दिल्ली से लेकर नरीमन पॉइंट (मुंबई) और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट तक आप गाड़ी में 12 घंटे में पहुंच जाएंगे। ऐसा हाईवे हम पूरा करके देंगे। (पूरी खबर पढ़ें)