Published: Tuesday, September 1, 2026, 10:10 [IST]
Pakistan Narowal Hindu Temple: पाकिस्तान में एक बार फिर अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से जुड़े धार्मिक स्थल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पंजाब के नारोवाल जिले में 100 से 125 साल पुराने एक हिंदू मंदिर को गिराए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। हिंदू संगठनों और एक राजनीतिक दल का आरोप है कि मंदिर की जमीन पर कब्जे के मकसद से इसे ध्वस्त किया गया और बाद में मलबा भी हटा दिया गया।
हालांकि, सरकारी अधिकारियों का दावा है कि भारी बारिश के चलते जर्जर मंदिर अपने आप गिर गया। अब मंदिर के पुनर्निर्माण और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
100-125 साल पुराने मंदिर पर उठे सवाल
नारोवाल के सिराज गांव में मौजूद यह मंदिर करीब 1,000 वर्ग मीटर इलाके में फैला हुआ था। स्थानीय स्तर पर इसे 100 से 125 साल से ज्यादा पुराना बताया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक 21 अगस्त को मंदिर के ढहाए जाने की घटना सामने आई। इसके बाद अल्पसंख्यक संगठनों ने पूरे मामले की जांच की मांग उठाई। उनका कहना है कि इतने पुराने धार्मिक स्थल की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए थी।
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मंदिर की जमीन पर कब्जे का आरोप
पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी ने आरोप लगाया है कि मंदिर को गिराने के पीछे उसकी जमीन पर कब्जे की कोशिश थी। पार्टी के मुताबिक मंदिर से लगी जमीन पहले एक मदरसे के लिए लीज पर दी गई थी, लेकिन शर्तों का पालन नहीं होने के बाद लीज रद्द कर दी गई थी। इसके बावजूद कथित तौर पर संपत्ति के कुछ हिस्सों पर कब्जा बना रहा। संगठन का आरोप है कि इसी विवाद के बीच मंदिर को भी निशाना बनाया गया।
TLP से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप
मंदिर गिराए जाने के मामले में प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान यानी TLP से जुड़े लोगों पर भी आरोप लगाए गए हैं। PMMP ने पंजाब सरकार से कथित तौर पर मंदिर ध्वस्त करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पार्टी अध्यक्ष असलम परवेज सहोत्रा ने अधिकारियों को लिखित शिकायत भी दी है। उनका दावा है कि मंदिर के शिखर की धातु, निर्माण सामग्री और मलबे की ईंटें तक वहां से हटा दी गईं।
सरकार ने बारिश को बताया वजह
दूसरी तरफ सरकारी पक्ष पूरे मामले को अलग तरीके से देख रहा है। ETPB के वरिष्ठ अधिकारी राणा इफ्तिखार के मुताबिक मंदिर काफी पुराना और जर्जर था तथा भारी बारिश के कारण ढह गया। उन्होंने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में मंदिर का कोई दर्ज नाम नहीं है, हालांकि इसकी उम्र 100 से 125 साल या उससे अधिक हो सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर की जमीन किसी को लीज पर नहीं दी गई थी। पुनर्निर्माण को लेकर अंतिम फैसला उच्च अधिकारी करेंगे।
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हिंदू संगठनों ने मांगा मंदिर का पुनर्निर्माण
मंदिर गिराए जाने के बाद हिंदू समुदाय के नेताओं ने सरकार से इसे उसी स्थान पर दोबारा बनाने की मांग की है। रतन लाल समेत अल्पसंख्यक प्रतिनिधियों का आरोप है कि प्रशासन और ETPB समय रहते न तो मंदिर की सुरक्षा कर सके और न ही कथित अवैध कब्जों को हटाया गया। उनका कहना है कि केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों, सिख गुरुद्वारों और ईसाई चर्चों की संपत्तियों की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।