Published: Wednesday, September 2, 2026, 16:10 [IST]
Nepal Flood: नेपाल के रसुवा जिले में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। भोटेकोशी नदी में अचानक पानी और मलबा आने से जान-माल के साथ सड़क, पुल और जलविद्युत परियोजनाओं को भी बड़ा नुकसान हुआ। अब राहत और बचाव के बाद नेपाल ने इस नुकसान की भरपाई के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की मांग तेज कर दी है।
नेपाल का कहना है कि यह आपदा जलवायु परिवर्तन से जुड़ी है और वह लॉस एंड डैमेज फंड से आर्थिक सहायता पाने का हकदार है। ऐसे में सवाल है कि नेपाल आखिर पूरी दुनिया से मुआवजा क्यों मांग रहा है और इस मांग के पीछे क्या तर्क है?
नेपाल का तर्क- प्रदूषण कम, नुकसान ज्यादा
नेपाल सरकार का कहना है कि जलवायु संकट पैदा करने में उसका योगदान बेहद कम है, लेकिन इसके दुष्परिणाम उसे लगातार झेलने पड़ रहे हैं। विश्व बैंक के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक नेपाल का प्रति व्यक्ति सालाना कार्बन उत्सर्जन करीब 0.54 टन है। वहीं वैश्विक औसत 4.67 टन है। चीन में यह करीब 9.3 टन और अमेरिका में 13.6 टन है। इसी आधार पर नेपाल जलवायु न्याय की मांग कर रहा है।
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रसुवा की बाढ़ को जलवायु आपदा क्यों बताया?
26 अगस्त को रसुवा में भोटेकोशी नदी के इलाके में अचानक भारी बाढ़ आई। हिमालयी क्षेत्र में बर्फ, चट्टान और मलबे के बड़े हिस्से के टूटने के बाद नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा पहुंचा। इससे आसपास के इलाकों में तबाही मची। नेपाल का कहना है कि हिमालय में बढ़ता तापमान और बदलता मौसम ऐसी घटनाओं का खतरा बढ़ा रहे हैं। इसलिए इस नुकसान को जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
लॉस एंड डैमेज फंड से कैसे मिलेगी मदद?
लॉस एंड डैमेज फंड का मकसद उन विकासशील देशों की मदद करना है, जिन्हें जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे नुकसान झेलने पड़ते हैं जिन्हें केवल तैयारी या अनुकूलन से रोका नहीं जा सकता। बाढ़, तूफान, ग्लेशियर से जुड़ी घटनाओं में लोगों की मौत, घरों, सड़कों और खेती को नुकसान इसके उदाहरण हैं। 2022 में COP27 में इस फंड को बनाने पर सहमति बनी थी। नेपाल अब इसी व्यवस्था के तहत आर्थिक सहायता चाहता है।
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क्या नेपाल चीन से मुआवजा मांग रहा है?
नेपाल की इस मांग को सीधे चीन से मुआवजा मांगने के तौर पर देखना सही नहीं होगा। लॉस एंड डैमेज फंड किसी एक देश से पैसा लेकर प्रभावित देश को देने वाली व्यवस्था नहीं है। इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलवायु वित्त जुटाया जाता है और जरूरतमंद विकासशील देशों को सहायता दी जाती है। हालांकि रसुवा की घटना को लेकर चीन की भूमिका और सीमा पार आपदा की जानकारी समय पर साझा करने को लेकर सवाल जरूर उठ रहे हैं।
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नेपाल को कितनी मदद मिल सकती है?
नेपाल ने फिलहाल कोई निश्चित मुआवजा राशि तय नहीं की है। लॉस एंड डैमेज फंड से विकासशील देशों के लिए करीब 5 से 20 मिलियन डॉलर तक के प्रस्तावों की व्यवस्था है। ऐसे में नेपाल को अधिकतम करीब 20 मिलियन डॉलर यानी लगभग 3 अरब नेपाली रुपये की सहायता मिल सकती है। लेकिन नुकसान की तुलना में यह रकम काफी कम होगी। शुरुआती अनुमान के मुताबिक केवल सड़कों और पुलों के पुनर्निर्माण में करीब 50 अरब नेपाली रुपये खर्च हो सकते हैं।