कारगिल युद्ध पर आधारित 'ऑपरेशन सफेद सागर':डायरेक्टर बोले- माइनस 20 डिग्री ठंड से बीकानेर की धूप तक चली शूटिंग; मिग-21 पर डॉक्यूमेंट्री भी बनाई
1 घंटे पहले
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कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना (IAF) के अदम्य साहस और एयरफोर्स अफसरों की असल जिंदगी पर आधारित वेब सीरीज है ‘ऑपरेशन सफेद सागर’।
1999 से 2006 तक एयरफोर्स में अपनी सेवाएं दे चुके निर्देशक कुशल श्रीवास्तव ने इस सीरीज को तैयार किया है। वहीं दिग्गज कॉमेडियन दिवंगत राजू श्रीवास्तव की बेटी अंतरा श्रीवास्तव इस सीरीज की एसोसिएट डायरेक्टर और हेड रिसर्चर हैं।
दैनिक भास्कर से खास बातचीत में कुशल श्रीवास्तव और अंतरा श्रीवास्तव ने एयरफोर्स के वास्तविक कल्चर, 8 साल के लंबे संघर्ष, MiG-21 की आखिरी उड़ानों की शूटिंग और प्रोजेक्ट के दौरान राजू श्रीवास्तव जी को खोने के भावुक पलों पर खुलकर चर्चा की।

सवाल: ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ का आइडिया 2018 में आया था। इतने लंबे समय तक इस कहानी को लेकर जुनून कैसे बना रहा?
कुशल श्रीवास्तव: दरअसल, इस कहानी से मेरा जुड़ाव 2018 से भी काफी पहले का है। दिसंबर 1998 में मैंने एयरफोर्स का एग्जाम दिया था। उसी दौरान कारगिल युद्ध शुरू हो गया और मैं युद्ध से जुड़ी खबरों को बहुत बारीकी से देखने लगा। अजय आहूजा और नचिकेता के पीओडब्ल्यू बनने की घटनाएं मैंने करीब से फॉलो कीं।
वह भारत का पहला टेलीवाइज्ड वॉर था। दिसंबर 1999 में मैंने एयरफोर्स जॉइन की और 2006 में वहां से बाहर आया। इसके बाद जेपी दत्ता और अनुराग बसु को असिस्ट किया और 2011 में अपनी कंपनी शुरू कर ऐड फिल्में बनाने लगा। ‘वोडका डायरीज’ के बाद मैंने एयरफोर्स की कहानी कहने का फैसला किया।
मेरा मानना था कि एयरफोर्स की वास्तविक जिंदगी पर्दे पर उस तरह नहीं आई है। उसे हमेशा आर्मी के शैडो में देखा गया है, जबकि दोनों का कल्चर और काम करने का तरीका काफी अलग है। एयरफोर्स की अपनी एक अलग रॉयल्टी और संस्कृति है। इसी सोच से 2018 में इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया।

निर्देशक कुशल श्रीवास्तव 1999 से 2006 तक एयरफोर्स में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
सवाल: इस कहानी में ऐसी क्या खास बात थी, जिसे बड़े स्केल पर बताना जरूरी लगा?
कुशल श्रीवास्तव: मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण था एयरफोर्स के लोगों की सोच और उनकी जिंदगी को वास्तविक रूप में दिखाना। उदाहरण के लिए, एक स्क्वाड्रन का व्यक्ति फोटो रिकॉनिसेंस के लिए जाता है। उसके विमान में बम की जगह कैमरे होते हैं और वह दुश्मन की पोजीशन की तस्वीरें लेकर आता है। फिर उन्हीं तस्वीरों के आधार पर हमले की रणनीति तय होती है। नचिकेता को लेकर हुई घटना में भी एक पायलट की सोच सामने आती है कि मैं अपने आदमी को पीछे नहीं छोड़ूंगा।
मेरे लिए इसका महत्व किसी बड़े देशभक्ति के डायलॉग से ज्यादा उस सोच में है कि हम अपने साथी को पीछे नहीं छोड़ते। फाइटर पायलट के लिए देश के लिए मरने की भावना के साथ अपने साथी की नजर में प्रोफेशनल रिस्पेक्ट भी बहुत मायने रखता है। इसलिए हमने कहानी में ज्यादा जिंगोस्टिक अप्रोच नहीं लिया। हमें लगा कि अगर आप अपना काम पूरी ईमानदारी और क्षमता से कर रहे हैं तो उसमें देशभक्ति अपने आप आ जाती है।
सवाल: एयरफोर्स और आर्मी के कल्चर का अंतर सीरीज में किस तरह दिखाई देता है?
कुशल श्रीवास्तव: एयरफोर्स में वैसे वॉर क्राइज या नारे नहीं होते, जैसे आर्मी में देखने को मिलते हैं। आर्मी में एक ऑफिसर कमांड देता है और जवान लड़ने जाते हैं, जबकि एयरफोर्स में जवान विमान को तैयार करते हैं और ऑफिसर उसे लेकर उड़ता है। इसलिए पायलट के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि विमान तैयार करने वाला व्यक्ति पूरी तरह ठीक है या नहीं। वह उससे पूछता है भाई, आई यू रेडी? सब बढ़िया है? घर में सब ठीक है? क्योंकि अगर वह आदमी मानसिक रूप से ठीक नहीं है तो उसका असर सीधे पायलट की जान पर पड़ सकता है। यही आपसी निर्भरता और रिश्ते एयरफोर्स की संस्कृति को अलग बनाते हैं और हम इसे कहानी में दिखाना चाहते थे।

सवाल: शुरुआत में फिल्म के तौर पर सोचा गया प्रोजेक्ट वेब सीरीज में कैसे बदला ?
कुशल श्रीवास्तव: 2018 में मैं इसे फिल्म के तौर पर बनाना चाहता था। एक अभिनेता को साइन भी कर लिया था और स्क्रिप्ट लॉक थी। तभी कोरोना आ गया और थिएटर बंद हो गए। जिस तरह का बजट हमें चाहिए था, उसके लिए स्टार जरूरी था। मेरे सामने दो रास्ते थे- या तो कहानी को कम बजट में बनाकर समझौता करूं या इसे छोड़ दूं।
मैंने इसे छोड़ दिया और फिर नेटफ्लिक्स को अप्रोच किया। उन्हें इसमें वेब सीरीज की संभावना नजर आई। मेरे प्रोड्यूसर मैचबॉक्स ने बहुत सपोर्ट किया। मेरे को-क्रिएटर अभिजीत सिंह परमार हैं। हम दोनों क्रिएटर और शो रनर हैं। एयरफोर्स ने भी काफी सहयोग किया, जिसकी वजह से कहानी उस बड़े कैनवास पर बन सकी, जिस पर मैं इसे देखना चाहता था।
सवाल: सिद्धार्थ और जिमी शेरगिल जैसे कलाकारों ने अपने किरदारों के लिए किस तरह तैयारी की?
कुशल श्रीवास्तव: सभी कलाकारों ने बहुत मेहनत की। उन्होंने परेड ग्राउंड में परेड की, पायलट्स से मुलाकात की और एयरफोर्स बेस के अंदर काफी समय बिताया। जिमी सर मेरे साथ चंडीगढ़ में धनोआ सर के घर गए और देखा कि वह कैसे बात करते हैं और उनका व्यवहार कैसा है।
सिद्धार्थ जी अलका मैम से मिले और आहूजा सर के व्यक्तित्व को समझा। कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने दोनों को प्रोजेक्ट से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिमी शेरगिल से मेरा रिश्ता हालांकि काफी पुराना है। 2007 में जब मैं बॉम्बे आया था, तब एक छोटी फिल्म में असिस्ट किया था और उसमें जिमी मेरे हीरो थे। तब से हम संपर्क में हैं।
वह हमेशा मुझे एनकरेज करते रहे। मैं उनसे कहता था कि एक दिन आपके साथ काम करूंगा। वह आज भी बहुत सहज और फ्रेंडली इंसान हैं।

सवाल: इस पूरे प्रोजेक्ट को बनाने में सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?
कुशल श्रीवास्तव: सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि हम पहली बार ऐसा कुछ बना रहे थे, जिसका कोई रेफरेंस नहीं था। यह सामान्य वॉर फिल्म नहीं है, जहां हर समय लड़ाई चल रही हो। युद्ध इसके बैकग्राउंड में है, लेकिन कहानी में इमोशनल चीजें ज्यादा हैं। दूसरी बड़ी चुनौती MiG-21 को लेकर थी।
जिन विमानों के साथ हमें शूट करना था, वे धीरे-धीरे आउट ऑफ सर्विस जा रहे थे। बीच में उनकी उड़ान भी बंद हो गई थी। हमें लगा कि अब शायद इन्हें उड़ाया नहीं जाएगा। हमने रिक्वेस्ट की और जो आखिरी फ्लाइंग हुई, उसे अच्छे से कवर किया।
एयर वॉरफेयर सीक्वेंस भी बेहद चुनौतीपूर्ण थे। यूके से हाइड्रॉलिक बेस आया, हैदराबाद से कैमरा सिस्टम और गेमिंग टेक्नोलॉजी से लाइटिंग सिस्टम तैयार किया गया। रियल प्लेन्स, हाइड्रॉलिक मूवमेंट और वीएफएक्स को मिलाकर हमने कोशिश की कि दर्शक को हर चीज वास्तविक महसूस हो।
सवाल: अंतरा श्रीवास्तव की इस प्रोजेक्ट में क्या भूमिका रही?
कुशल श्रीवास्तव: अंतरा मेरी फर्स्ट कजिन हैं, लेकिन हमारा रिश्ता सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं है। वह मेरे हर प्रोजेक्ट में लंबे समय से एसोसिएट रही हैं। 2013-14 के आसपास उन्होंने मेरे साथ इंटर्नशिप शुरू की और फिर मेरी कंपनी जॉइन कर ली। वह लास्ट एडी से सेकंड एडी, फर्स्ट एडी और फिर एसोसिएट डायरेक्टर बनीं।
वह मेरी प्रोफेशनल कोलैबोरेटर भी हैं। ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की फिल्म वाली कहानी भी मैंने उनके साथ मिलकर लिखी थी। इस प्रोजेक्ट में वह एसोसिएट डायरेक्टर और हेड रिसर्चर हैं। इसलिए उनकी भूमिका सिर्फ पारिवारिक सहयोग की नहीं, बल्कि कहानी की रिसर्च से लेकर इसके निर्माण तक एक महत्वपूर्ण क्रिएटिव सहयोगी की है।

सवाल: एयरफोर्स अधिकारियों और मिलिट्री एक्सपर्ट्स से किस तरह इनपुट लिया गया?
कुशल श्रीवास्तव: कहानी लिखने से पहले ही हम एयर हेडक्वार्टर्स गए। मैंने वहां से वॉर हीरोज की लिस्ट ली और टीम के साथ बैंगलोर, चंडीगढ़, पुणे, दिल्ली समेत कई शहरों में जाकर उनसे मुलाकात की। प्री-प्रोडक्शन से ही डिफेंस कंसल्टेंट्स जुड़े थे। यूनिफॉर्म, फ्लाइंग और वॉर स्ट्रैटेजी के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ थे।
करीब चार-पांच कंसल्टेंट लगातार हमारे साथ रहे। उन्होंने स्टोरी राइटिंग से लेकर प्री-प्रोडक्शन और शूटिंग तक इनपुट दिया और कलाकारों को भी ट्रेन किया। इस पूरी रिसर्च का मकसद यही था कि एयरफोर्स की दुनिया पर्दे पर सिर्फ बड़ी दिखे नहीं, बल्कि वास्तविक भी महसूस हो।
सवाल: क्या ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ के बाद भी एयरफोर्स और MiG-21 से जुड़ा कुछ देखने को मिलेगा?
कुशल श्रीवास्तव: हां। हमने MiG-21 पर ‘द लास्ट सल्यूट’ नाम की करीब 80 मिनट की डॉक्यूमेंट्री भी बनाई है। MiG-21 के आउट ऑफ सर्विस होने के दौरान हमने उनके साथ शूट किया। यह भी नेटफ्लिक्स का प्रोजेक्ट है और अगस्त के आखिर में रिलीज होगी। सीरीज की शूटिंग के दौरान मिले फुटेज का इस्तेमाल इस डॉक्यूमेंट्री में भी किया गया है।
दिग्गज कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव की बेटी अंतरा श्रीवास्तव से बातचीत.…
सवाल: ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ सीरीज से आप किस तरह जुड़ी हैं? इस प्रोजेक्ट में आपकी क्या भूमिका रही है?
अंतरा श्रीवास्तव: मैं इस प्रोजेक्ट से सिर्फ जुड़ी नहीं हूं, बल्कि इसकी शुरुआत से ही इसका हिस्सा रही हूं। ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की शुरुआत मैंने और मेरे बड़े भाई जैसे कुशल दादा ने मिलकर की थी। वह मेरे सबसे बड़े ताऊजी के बेटे हैं। उन्होंने एयरफोर्स में करीब छह-सात साल सर्व किया और फिर फिल्ममेकिंग को करियर बनाया। जब वह फिल्ममेकिंग में आए, तब मैं कॉलेज में थी और उनके साथ इंटर्नशिप शुरू की।
इसके बाद हमने एडवरटाइजिंग, म्यूजिक वीडियो और फिल्म पर साथ काम किया। हमने ‘वोडका डायरीज’ भी की, जिसे कुशल दादा ने डायरेक्ट किया था और मैं उसकी एसोसिएट प्रोड्यूसर थी। इसके बाद हमारी टीम अगले सब्जेक्ट पर चर्चा कर रही थी। तभी कुशल दादा ने ‘गोल्डन एरोज’ स्क्वाड्रन और ऑपरेशन सफेद सागर से जुड़ी एक खास कहानी के बारे में बताया। हमें लगा कि यही हमारा अगला विषय होना चाहिए और हमने इस पर काम शुरू कर दिया।

कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव की बेटी अंतरा श्रीवास्तव।
सवाल: इस कहानी पर रिसर्च का सिलसिला कैसे शुरू हुआ?
अंतरा: हमने सबसे पहले ग्रुप कैप्टन तरुण कुमार सिंघा सर से संपर्क किया। वह एयरफोर्स से रिटायर्ड हैं और कुशल दादा के दोस्त रहे हैं। उनके जरिए हम इंडियन एयरफोर्स तक पहुंचे। अक्टूबर-नवंबर 2018 में हमें अनुमति मिली और फिर रिसर्च शुरू हुई। हम मिसेज अलका आहूजा से मिले, चीफ मास्टर धनोआ सर से बात की और गोल्डन एरोज के पायलट्स के अनुभव समझे। आदिल हुसैन का किरदार एयर मार्शल पटनी सर से जुड़ा है, उनसे भी बात की।
हमने सिर्फ भारतीय पक्ष नहीं, बल्कि पाकिस्तान की कहानी पर भी रिसर्च की—मुशर्रफ की प्लानिंग, नवाज शरीफ की भूमिका और दोनों के बीच की डायनेमिक्स को समझने की कोशिश की। हमारा मकसद सिर्फ एक तरफ की कहानी बताना नहीं था, बल्कि उस पूरे दौर को समझना था।
सवाल: उस समय यह प्रोजेक्ट फिल्म के रूप में बनाया जा रहा था?
अंतरा: हां। उस समय वेब सीरीज का आज जैसा क्रेज नहीं था, इसलिए हम इसे ‘गोल्डन एरोज’ नाम से फिल्म के रूप में बना रहे थे। काफी काम और प्री-प्रोडक्शन शुरू हो चुका था, लेकिन फिर कोविड आ गया। 2020-21 में पूरी दुनिया रुक गई। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री, फिल्में और थिएटर सब प्रभावित हुए और हमारा प्रोजेक्ट भी दो-तीन साल के लिए रुक गया।

सवाल: वेब सीरीज के लिए कहानी को किस तरह विस्तार दिया गया?
अंतरा: मूल कहानी गोल्डन एरोज के पायलट्स की है। इसमें विंग कमांडर टोनी धनोआ, उनके फ्लाइट कमांडर आहूजा, उनकी पत्नी मिसेज अलका आहूजा और मिसेज कमल धनोआ जैसे वास्तविक लोगों से जुड़े किरदार हैं। फिल्म की कहानी को सीरीज में विस्तार देने के लिए संदीप जैन, वरुण भुयन कश्यप और निखिल रवि को राइटर्स के तौर पर जोड़ा गया।
उन्होंने हमारे साथ मिलकर पिच डेक तैयार किया। शाफात खान डायरेक्शन टीम और राहुल कपूर प्रोडक्शन टीम में थे। ये लोग फिल्म से सीरीज तक की पूरी जर्नी में हमारे साथ रहे।
सवाल: इसी दौरान आपके पिता राजू श्रीवास्तव के निधन का दौर भी आया। उस समय आपके लिए यह सब कितना मुश्किल था?
अंतरा: यह हमारे लिए बहुत भावुक और मुश्किल समय था। जिस बड़े प्रोजेक्ट का हम वर्षों से इंतजार कर रहे थे, वह मई-जून 2022 में ग्रीनलिट हुआ और उसके दो-तीन महीने बाद अगस्त में मेरे पापा की तबीयत खराब हुई और सितंबर में वह नहीं रहे। यह हमारे लिए बहुत बड़ा झटका था।
इतने साल के इंतजार के बाद जैसे ही प्रोजेक्ट शुरू हुआ, कुछ ही महीने बाद पापा हमारे साथ नहीं रहे। इसके बावजूद हमने प्री-प्रोडक्शन का काम जारी रखा। कास्टिंग, कॉस्ट्यूम और बाकी तैयारियां चलती रहीं।
सवाल: शूटिंग कितने बड़े स्तर पर हुई?
अंतरा: हमने लगभग 110 दिन शूट किया। राजस्थान, हिमाचल, ग्वालियर, दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब और मुंबई में शूटिंग हुई। एयरपोर्ट और एयरफोर्स स्टेशनों पर भी शूट किया गया। हिमाचल में पहाड़ों पर माइनस 20 से 15 डिग्री तक के तापमान में शूट किया, वहीं राजस्थान और बीकानेर में बेहद गर्म मौसम में काम किया।
कहानी में भारत, पाकिस्तान, डिप्लोमेसी, पॉलिटिक्स, वॉर, मिलिट्री और एयरफोर्स जैसे कई पहलू हैं। इसलिए कहानी की जरूरत के मुताबिक अलग-अलग लोकेशन पर शूट करना जरूरी था।

सवाल: इतनी लंबी शूटिंग और लोकेशन के बाद पोस्ट-प्रोडक्शन कितना बड़ा रहा?
अंतरा: बहुत बड़ा। यह वीएफएक्स-हेवी शो है और इसका वीएफएक्स कई महीनों तक चला। यहां तक कि जब रिलीज की तारीख तय हुई और अगस्त में रिलीज होना फाइनल हुआ, तब भी काफी वीएफएक्स का काम चल रहा था। यानी शूट खत्म होने के बाद भी पोस्ट-प्रोडक्शन का लंबा फेज रहा।
सवाल: रिलीज से कुछ महीने पहले आपके ताऊजी यानी कुशल के पिता का भी निधन हो गया। इस पूरे संयोग को आप किस तरह देखती हैं?
अंतरा: यह बहुत अजीब सा संयोग है। प्रोजेक्ट शुरू होने के तीन महीने बाद मेरे पापा नहीं रहे और जब प्रोजेक्ट खत्म होने वाला था, रिलीज से करीब तीन महीने पहले मेरे ताऊजी भी नहीं रहे। हमारे घर के दोनों भाई, यानी मेरे पापा और कुशल दादा के पापा, अब हमारे साथ नहीं हैं।
हम उन्हें बहुत मिस करते हैं। इसी वजह से शो के आखिर में पापा को स्पेशल थैंक्स दिया है। कहीं न कहीं लगता है कि यह उनकी ब्लेसिंग्स हैं। वह इस प्रोजेक्ट को पूरा होता देखना चाहते थे। जब मैं किसी को बताती हूं कि मैं राजू श्रीवास्तव की बेटी हूं तो लोग बहुत प्यार से मिलते हैं और उनके बारे में अपनी यादें बताते हैं। हमें लगता है कि उनकी अनसीन ब्लेसिंग्स हमारे साथ हैं।
सवाल: शो में राजू श्रीवास्तव को स्पेशल थैंक्स देने की पहल किसकी थी?
अंतरा: मैं मैचबॉक्स के प्रोड्यूसर्स संजय राउत्रे सर, सरिता पाटिल जी और दीक्षा राउत्रे जी का खास तौर पर धन्यवाद करना चाहूंगी। अगर उन्होंने हमें बैक और सपोर्ट नहीं किया होता तो यह इतना बड़ा प्रोजेक्ट नहीं बन पाता। जब हमने फिल्म को सीरीज में कन्वर्ट किया और पिच तैयार किया, तब कहानी मैचबॉक्स के पास लेकर गए।
उन्होंने हम पर विश्वास किया। संजय सर ने ही इस बात को सपोर्ट किया कि मेरे पापा राजू जी का नाम अंत में स्पेशल थैंक्स में आना चाहिए। इसके लिए मैं उनकी बहुत आभारी हूं। यह हमारे लिए बहुत मायने रखता है।

सवाल: इतने सालों की मेहनत के बाद जब आप आज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ को देखती हैं तो आपके लिए यह कितना खास है?
अंतरा: यह कुशल दादा और मेरा ब्रेनचाइल्ड था। एक तरह से यह हमारा कॉन्सेप्ट था। हमने इसे एक आइडिया के रूप में शुरू किया, रिसर्च की, एयरफोर्स और वास्तविक लोगों से मिले, फिल्म के रूप में डेवलप किया, कोविड के कारण यह रुका और फिर वेब सीरीज में कन्वर्ट हुआ। नई रिसर्च हुई, नए राइटर्स जुड़े, मैचबॉक्स और नेटफ्लिक्स जुड़े और धीरे-धीरे यह बड़ा प्रोजेक्ट बनता गया। इसलिए हमारे लिए यह सिर्फ एक सीरीज नहीं, बल्कि बहुत लंबी जर्नी है।
सवाल: क्या आप सिर्फ पर्दे के पीछे रहना चाहती हैं या कभी एक्टिंग के लिए भी कैमरे के सामने आने का मन है?
अंतरा: सच कहूं तो अभी कैमरे के सामने आने का कोई प्लान नहीं है। आगे जिंदगी किस दिशा में जाती है, यह नहीं जानती, लेकिन फिलहाल मैं अपने काम से खुश हूं। मेरा फोकस है कि इस काम में अपना एक सॉलिड मार्क बनाऊं और अपनी पहचान बनाऊं।
लोग मुझे पापा के नाम से जानते हैं और यह मेरे लिए गर्व की बात है। लेकिन मैं चाहती हूं कि लोग यह भी जानें कि राजू श्रीवास्तव की बेटी अपने दम पर क्या कर रही है। मेरे पास फिल्म और सीरीज दोनों का अनुभव है।
‘ऑपरेशन सफेद सागर’ को मिल रहा प्यार और हमारी मेहनत की सराहना मुझे बहुत पॉजिटिविटी देती है। मुझे लगता है कि सबके सपोर्ट और ब्लेसिंग्स के साथ आगे बड़ी चीजें हासिल कर सकती हूं।
सवाल: आपके पिता राजू श्रीवास्तव कॉमेडी के लिए जाने जाते थे। क्या उनका कोई गुण आपको भी मिला है?
अंतरा: मुझे लगता है कि कॉमेडी का सबसे बड़ा हिस्सा ऑब्जर्वेशन है और यह चीज मेरे अंदर और मेरे भाई दोनों में है। मेरा भाई आयुष्मान श्रीवास्तव सितार प्लेयर और म्यूजिशियन है और निलाद्री कुमार जी से सीखता है। हम दोनों में पापा के कुछ-कुछ गुण जरूर हैं ऑब्जर्वेशन और डेली लाइफ में थोड़ा सा ह्यूमर।
मेरे मामले में लगता है कि यह चीज फिल्मों के जरिए सामने आएगी। लोगों को ऑब्जर्व करने और समझने का सेंस शायद मेरी फिल्मों, सीरीज और कहानियों के जरिए बाहर आएगा। मेरे भाई के मामले में वही चीज उसके म्यूजिक के जरिए सामने आएगी। पापा से मिली चीजों को आगे ले जाने के हमारे अपने-अपने तरीके हैं।
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