शिक्षक दिवस के अवसर पर धार में जिला शिक्षक सम्मान समारोह समिति की ओर से सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच सेवानिवृत्त हुए शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के 208 शिक्षकों, व्याख्याताओं और प्राचार्यों को सम्मानित
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शिक्षक और मां कभी रिटायर नहीं होते
मुख्य वक्ता डॉ. स्वाति तिवारी ने कहा कि शिक्षक और मां कभी रिटायर नहीं होते। शिक्षक का जीवन हमेशा समाज को ज्ञान और संस्कार देने के लिए समर्पित रहता है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी शिक्षक अपने अनुभव और ज्ञान से समाज और नई पीढ़ी का मार्गदर्शन कर सकते हैं।
शिक्षक समाज की दिशा बदलता है
कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने कहा कि शिक्षक समाज की दिशा और दशा बदलने का काम करता है। व्यक्ति के संस्कारों को बनाने वाला असली रचयिता शिक्षक ही होता है। उन्होंने सेवानिवृत्त शिक्षकों से अपील की कि वे अपने लंबे अनुभवों को नई पीढ़ी और नए शिक्षकों के साथ साझा करते रहें।
एसपी सचिन शर्मा ने कहा कि जहां बुजुर्ग, गुरु और स्त्री का सम्मान होता है, वहां ईश्वर का वरदान रहता है। उन्होंने शिक्षकों को समाज और देश का भविष्य बनाने वाला बताया।

13 खास प्रतिभाओं को भी सम्मान
समारोह में शिक्षा, साहित्य, कला, संस्कृति, खेल, समाजसेवा और पर्यावरण के क्षेत्र में धार का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करने वाली 13 प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया गया। इनमें बबनलाल अग्रवाल, अनिमेष जैन, प्रक्षाल जैन, गौरव जाट, श्रावणी विभूते, मुकुंद आगिवाल, डॉ. सीमा अलावा, अभिनव अग्रवाल, राधा शर्मा, विशाल दामके, अश्मित अरोड़ा, सोनालिका निगम और चेतन वसुनिया शामिल रहे।
सरस्वती वंदना से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। मुक्ता और हिमानी पालीवाल ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। हरजीत सिंह होरा ने गुरु वंदना, राजेश सक्सेना ने श्लोक और लोकेश पिपरकर ने गीत प्रस्तुत किया।

ब्रजकिशोर बोडा ने स्वागत भाषण दिया, जबकि रमेश सोलंकी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद् डॉ. श्रीकांत द्विवेदी ने किया।
43 साल में 6 हजार शिक्षक सम्मानित
समिति के प्रवक्ता आशीष गोयल ने बताया कि पिछले 43 सालों में करीब 6 हजार सेवानिवृत्त शिक्षकों को सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि समिति के इस आयोजन को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन की ओर से भी सम्मान मिल चुका है।