ग्वालियर बस अग्निकांड...: केंद्रीय एजेंसी से अप्रूवल जरूरी, फिर भी 22-बी के आधार पर बनी बॉडी - Gwalior News

Published on 8 सित॰ 2026

मप्र की 2440 बसें बिना टाइप अप्रूवल देश में दौड़ रहीं, यहां कड़ाई तो यूपी-राजस्थान पहुंचे ऑपरेटर शहर में 5 सितंबर को वीडियोकोच बस में लगी आग के बाद परिवहन तंत्र में बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। ग्वालियर की 36 और मध्य प्रदेश की 2440 बसें बिना ‘बॉडी टाइ

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मप्र रोडवेज एसोसिएशन के सहसचिव विनोद शर्मा ने बताया सालभर में प्रदेश में करीब एक हजार नई बसें बनी हैं, लेकिन इनमें पास बॉडी टाइप अप्रूवल नहीं है। इससे मप्र में ऐसी बसों के पंजीयन पर रोक लग गई, इसलिए दूसरे राज्यों में रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं। मप्र की 2440 बसें बिना टाइप अप्रूवल देश में दौड़ रहीं, मप्र में कड़ाई तो यूपी-राजस्थान पहुंचे ऑपरेटर...

छत पर सामान इसलिए हादसे का बढ़ा खतरा... ग्वालियर से भोपाल, इंदौर और हरिद्वा र जाने वाली कई लग्जरी बसों में यात्रियों के सामान के लिए बस के अंदर लगेज स्पेस के अलावा छत पर भी सामान लोड किया जा रहा है। दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने झांसी रोड स्थित बस स्टैंड पर जाकर लग्जरी बसों पर सामान लोड होते हुए देखा। बस ड्राइवर का कहना था कि माल लोडकर वे रोज ले जाते हैं। नियमों के विपरीत इस तरह सामान रखने से बस का वजन और उसका सेंटर ऑफ ग्रेविटी प्रभावित हो सकता है। यही नहीं, सामान ठीक तरह से बांधा नहीं गया तो अचानक ब्रेक या दुर्घटना में उसके गिरने का खतरा रहता है। आग लगने की स्थिति में खतरा और बढ़ जाता है। छत पर सामान होने से बस के ऊपरी हिस्से पर अतिरिक्त भार पड़ता है, जबकि यात्रियों को आपात स्थिति में खिड़कियों और इमरजेंसी एग्जिट से बाहर निकलना पड़ सकता है।

आरटीओ- एसी बसों पर अप्रूवल दस्तावेज अधूरे, छत भी ओवरलोड... चिह्नित कर रहे ग्वालियर से भोपाल, इंदौर और हरिद्वार जाने वाली लग्जरी बसों की छतों पर ओवरलोडिंग से हादसे का खतरा बढ़ा है। 36 बसें चिन्हित हुई हैं, जिनके बॉडी टाइप अप्रूवल दस्तावेज अधूरे हैं। आरटीओ विक्रमजीत सिंह कंग ने कहा कि 1 सितंबर 2025 के बाद बिना अप्रूवल रजिस्टर्ड बसों को चिन्हित कर कार्रवाई होगी।

बस ऑपरेटर- प्रदेश में एक भी अप्रूव्ड बॉडी मेकर नहीं... फिर कैसे स्वीकार-रजिस्ट्रेशन बस ऑपरेटरों का कहना है कि मध्यप्रदेश में एक भी अप्रूव्ड बॉडी मेकर नहीं है। ऐसे में 2440 बसों की बॉडी किस आधार पर स्वीकार हुई और रजिस्ट्रेशन कैसे हुआ? उनका दावा है कि गलती उनकी नहीं है। अब परिवहन विभाग ने समिति बनाई है जो तय करेगी कि ऐसी बसें आगे सड़क पर चलेंगी या नहीं।

बॉडी अप्रूवल सिर्फ प्रमाण नहीं, सुरक्षा की तकनीकी जांच बस बॉडी टाइप एप्रूवल केवल दस्तावेज नहीं, बल्कि मजबूती, डिजाइन, आयाम, वजन, भार-वहन क्षमता, सीटिंग और आपात निकास जैसे सुरक्षा मानकों का परीक्षण है। बिना अप्रूव्ड बॉडी और छत पर ओवरलोडिंग यात्री सुरक्षा का संयुक्त जोखिम है। ग्वालियर हादसे के बाद 2440 बसों की बॉडी, फिटनेस, फायर सेफ्टी, वायरिंग, इमरजेंसी एग्जिट और ओवरलोडिंग की एकीकृत जांच जरूरी है। हर 6 माह में सड़क पर परिचालन, फिटनेस सुनिश्चित होगा।- एमपी सिंह, रिटायर्ड आरटीओ

घटनाओं की स्टडी कर रहे 1 सितंबर 2025 के बाद बिना बॉडी टाइप अप्रूवल वाली बसों पर जांच कमेटी काम कर रही है। BS-6 बसों में आग की घटनाओं की स्टडी हो रही है। फायर ऑडिट अभियान से छत पर माल लोडिंग और सुरक्षा नियम उल्लंघन पर कार्रवाई होगी। -किरण शर्मा, डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर