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बोड़ला तहसील क्षेत्र में सरकारी कामकाज की लापरवाही सामने आई है। यहां पुल का ठेका पहले दे दिया गया और एप्रोच रोड के लिए जरूरी जमीन का मुआवजा बाद में तय किया गया। अमेरा से सिल्ली मार्ग पर नीरा नदी में 117 मीटर का उच्चस्तरीय पुल अक्टूबर 2024 तक पूरा होना था। एप्रोच रोड के लिए जमीन नहीं मिलने से सितंबर 2026 तक भी प्रोजेक्ट अधूरा है।
"दैनिक भास्कर’ को मिले दस्तावेजों के मुताबिक, इस काम के लिए लोक निर्माण विभाग के सेतु निर्माण संभाग ने 23 सितंबर 2023 को ही बिलासपुर के ठेकेदार सुशील कुमार अग्रवाल को 478.96 लाख (4.78) का वर्क ऑर्डर दे दिया था। काम पूरा करने की समय सीमा 22 अक्टूबर 2024 रखी गई थी। लेकिन पुल के दोनों तरफ बनने वाले एप्रोच रोड के लिए अमेरा गांव की निजी जमीन की जरूरत थी। इस जमीन का मुआवजा तय करने की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हुई। अब जब पुल की डेडलाइन निकल चुकी है, तब वर्ष 2025-26 में मुआवजे का संशोधित प्रस्ताव तैयार किया गया। बोड़ला एसडीएम आशुतोष शर्मा का कहना है कि 5-6 किसानों की जमीन अधिग्रहण किया जाना है। उनमें से 2 किसान जमीन देने सहमत नहीं हो रहे हैं। इस कारण प्रक्रिया में देरी हो रही है। मैं दिखवा लेता हूं। अनिल प्रसाद, सब इंजीनियर, दुर्ग
अधिग्रहण को लेकर कुछ नियमों में बदलाव हो गया { अब तक काम पूरा क्यों नहीं हुआ? - भू- अर्जन की प्रक्रिया में देरी होने के कारण काम प्रभावित हुआ है। पुल के एक तरफ 7 लोगों की निजी जमीन आ रही है। { जब जमीन की जरूरत पहले से थी, तो सितंबर 2023 में ठेकेदार को वर्कआर्डर क्यों दिया गया? - उस समय भू-अर्जन की प्रक्रिया चल रही थी। बाद में जमीन अधिग्रहण को लेकर कुछ नियमों में बदलाव हो गया। { नियम बदलने से ऐसा क्या हुआ कि 2 साल बाद भी एप्रोच रोड नहीं बनी? - भू-अर्जन की प्रक्रिया में तकनीकी बदलाव हुए थे। इसी वजह से प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी। { पाथवे पहली बारिश में ही धंस गया? - इसकी जानकारी लेकर निर्माण की स्थिति देखी जाएगी।
पुल पर जो काम हो चुका है, उसकी गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुल के दोनों तरफ साइड शोल्डर में पचरी बनाई जा रही है। पचरी का काम भी अधूरा है। वहीं जो पचरी बन चुकी है, वह पहली बारिश में ही धंसने लगी है। इससे सेतु विभाग के निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब विभाग को हैंडओवर से पहले गुणवत्ता जांच और क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत करानी पड़ेगी। पुल बनने के बाद दोनों गांवों के बीच सीधा और सुरक्षित आवागमन शुरू होना था।