Chhindwara News: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कफ सिरप कांड में 26 मासूमों की मौत के बाद अब दो अधिकारियों की बहाली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. जिन अधिकारियों को मामले की शुरुआती जांच के बाद निलंबित किया गया था, उन्हें करीब एक साल बाद बहाल कर दिया गया. बहाली का आदेश सामने आने के बाद दोनों अधिकारियों को फिलहाल मुख्यालय अटैच कर दिया गया है. इस पूरे मामले ने सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
26 बच्चों की मौत के बाद हुआ था निलंबन
छिंदवाड़ा के परासिया और आसपास के इलाकों में बच्चों को सर्दी-खांसी और बुखार के इलाज के दौरान Coldrif कफ सिरप दी गई थी. इसके बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी. बच्चों में पेशाब बंद होने से लेकर किडनी फेलियर तक की गंभीर समस्या सामने आई. मामले ने तूल पकड़ा तो दवा की गुणवत्ता के साथ-साथ सरकारी निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठे. इस मामले में शरद जैन और गौरव शर्मा को 6 अक्टूबर 2025 को निलंबित किया गया था. कार्रवाई के बाद दोनों अधिकारी करीब एक साल तक निलंबित रहे.
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23 सितंबर को जारी हुआ बहाली का आदेश
अब 23 सितंबर 2026 को जारी एक सरकारी आदेश के जरिए दोनों अधिकारियों की बहाली कर दी गई. आदेश सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठने लगे. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इस मामले में 26 बच्चों की मौत हुई थी और अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी तो करीब एक साल बाद उन्हें बहाल करने का फैसला किस आधार पर लिया गया मामले को लेकर यह बात भी सामने आई कि विभागीय मंत्री को बहाली के आदेश की जानकारी नहीं थी. आदेश सामने आने के बाद दोनों अधिकारियों को मुख्यालय अटैच कर दिया गया.
डिप्टी CM बोले- मंत्री से मांगी गई जानकारी
मामले में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि विभागीय मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने इस संबंध में जानकारी मांगी है. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी जानकारी के बिना बहाली का आदेश कैसे जारी हुआ, इसकी जानकारी मंत्री ही देंगे. वहीं, विभागीय मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने घर से बाहर आकर जवाब देने से इनकार कर दिया.
कांग्रेस ने सरकार पर उठाए सवाल
अब कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने छिंदवाड़ा के अलावा इंदौर के भागीरथपुरा मामले का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा में भी दूषित पानी की वजह से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई, जबकि छिंदवाड़ा में 26 बच्चों की जान चली गई. कांग्रेस का सवाल है कि इतनी मौतों के बाद जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
अब सबसे बड़ा सवाल- जिम्मेदार कौन?
छिंदवाड़ा में 26 मासूमों की मौत और इंदौर के भागीरथपुरा में हुई मौतों के बाद सरकार की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं. कफ सिरप कांड में निलंबित अधिकारियों की बहाली ने इन सवालों को और तेज कर दिया है. अब लोगों की नजर इस बात पर है कि सरकार इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने और बहाली के फैसले को लेकर क्या स्पष्टीकरण देती है.

शुभम गुप्ता
शुभम गुप्ता को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एक दशक से अधिक का अनुभव है. शुभम ने आरजीपीवी यूनिवर्सिटी से IT में इंजीनियरिंग की. इसके बाद ITMI से ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म सर्टिफिकेशन प्राप्त किया. उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली में “आज तक” से बतौर संवाददाता की, जहां आदर्श ग्राम योजना, नोटबंदी और मुद्रा योजना जैसी कई अहम रिपोर्ट्स ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी. दिल्ली में लगभग पांच साल काम करने के बाद शुभम ने अपने गृहप्रदेश मध्यप्रदेश का रुख किया और न्यूज़ नेशन से जुड़े. यहां उनकी कई खबरों ने व्यापक असर डाला, जैसे कृषि विस्तार अधिकारी परीक्षा घोटाले को उजागर करने के बाद सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी. साल 2020 में मध्यप्रदेश की राजनीति के ऐतिहासिक घटनाक्रम, कमलनाथ सरकार के पतन, को उन्होंने बेहद बारीकी से कवर किया. कोरोना काल में उन्होंने जान जोखिम में डालकर व्यवस्थाओं की कमियों को उजागर किया, जिसके बाद सरकार को कई महत्वपूर्ण फैसले लेने पड़े. साल 2023 में शुभम गुप्ता नई भूमिका में TV9 भारतवर्ष के एमपी-सीजी ब्यूरो प्रमुख बने. यहां भी उन्होंने कई बड़े घोटाले उजागर किए, जैसे- बर्तन घोटाला, सर्पदंश घोटाला, धान घोटाला और डामर घोटाला. उनकी रिपोर्टिंग के बाद मुफ्त शव वाहन योजना को तत्काल प्रभाव से शुरू करना पड़ा. मुख्यमंत्री ने महज़ 9 घंटे में इन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.
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