Published: Friday, July 24, 2026, 10:22 [IST]
सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चली भूख हड़ताल के बाद आखिरकार अपना अनशन खत्म कर दिया। यह फैसला अचानक नहीं हुआ। इसके पीछे सरकार की तरफ से दिया गया लिखित आश्वासन सबसे बड़ी वजह बना। 23 जुलाई की देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ.जितेंद्र सिंह उनसे मिलने पहुंचे। कई दौर की बातचीत के बाद तीन ऐसे बिंदुओं पर सहमति बनी, जिनके बाद वांगचुक ने आंदोलन का अगला चरण शुरू करने का फैसला लिया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उनके अनशन खत्म करने से CJP का आंदोलन कमजोर होगा या फिर यह नए दौर में प्रवेश करेगा।
अनशन तोड़ने के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर अपना दूसरा वीडियो 24 जुलाई मैसेज पोस्ट किया। उन्होंने बताया कि सरकार ने लिखित तौर पर उनकी मांगों को मान लिया है। 26 दिन बाद खाना मिलने पर उन्होंने कहा कि भोजन का स्वाद बहुत बढ़िया लग रहा है, हालांकि भूख का कोई अपना स्वाद नहीं होता। उन्होंने साफ किया कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और आगे के आंदोलन के लिए जिंदा रहना बेहद जरूरी था।
सोनम वांगचुक की वो 3 बड़ी डिमांड्स जिन पर सरकार ने लगाई लिखित मुहर
सरकार और वांगचुक के बीच दो दिनों तक चली तीखी बातचीत के बाद जिस लिखित समझौते पर हस्ताक्षर हुए, उसमें तीन मुख्य शर्तें शामिल हैं,
- पहला, जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों और 20 जुलाई के संसद मार्च में शामिल लोगों पर कोई केस दर्ज नहीं किया जाएगा।
- दूसरा, संसद के मानसून सत्र में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार पर चर्चा होगी, ताकि लंबे समय का समाधान निकाला जा सके।
- तीसरा, हालिया NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के मुद्दे पर सरकार सकारात्मक तरीके से विचार करेगी।
यही तीन डिमांड्स सोनम वांगचुक के फैसले की सबसे बड़ी वजह बने।
अनशन तोड़ने के बाद वीडियो में क्या बोले?
अनशन खत्म करने के बाद जारी वीडियो में सोनम वांगचुक ने कहा कि पिछले दो दिन सरकार के साथ लगातार बातचीत हुई। उनका कहना था कि अगर लिखित भरोसा नहीं मिलता तो वे अनशन जारी रखते। सोनम वांगचुक ने कहा, "मेरी मांग सिर्फ इतनी थी कि जो बात हो, वह लिखित रूप में हो। अगर जरूरत पड़ती तो मैं और दिन भी अनशन जारी रखता। आखिरकार सरकार ने लिखित भरोसा दिया, इसलिए मैंने अनशन खत्म करने का फैसला लिया।"
उन्होंने लद्दाख की एपेक्स बॉडी के नेताओं, आंदोलन में साथ खड़े लोगों और उनसे मिलने आए सांसदों का भी धन्यवाद किया। अनशन खत्म करने के बाद उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "26 दिन बाद पहली बार कुछ खाया। स्वाद अच्छा लगा, लेकिन भूख का अपना कोई स्वाद नहीं होता।"
सोनम वांगचुक ने बताया कि अलग-अलग दलों के करीब 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की या संदेश भेजकर समर्थन दिया। इन सांसदों ने भरोसा दिलाया कि संसद में NEET पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया जाएगा।
22 जुलाई को विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल भी पहुंचा। इसमें कांग्रेस के विवेक तन्खा, तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष, CPI(M) के जॉन ब्रिटास और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह समेत कई सांसद शामिल थे। इन नेताओं ने संयुक्त पत्र देकर वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की। शुरुआत में करीब 55 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे। बाद में यह संख्या बढ़कर लगभग 65 हो गई।
सोनम वांगचुक की 5 बड़ी बातें: क्या कमजोर पड़ेगा CJP का आंदोलन?
अनशन समाप्त करते हुए वांगचुक ने 5 बेहद अहम बातें सामने रखी हैं।
- सांसदों का बड़ा समर्थन: विपक्षी दलों के 65 सांसदों ने संसद में नीट मुद्दा उठाने का पक्का वादा किया है।
- लिखित कागज के लिए 2 दिन का इंतजार: सरकार मौखिक तौर पर मान रही थी, लेकिन वे लिखित पेपर पर अड़े रहे। इसीलिए 2 दिन और अनशन खींचना पड़ा।
- इस्तीफे पर कोई सहमति नहीं: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार पीछे नहीं हटी, लेकिन वांगचुक ने इसे अनशन जारी रखने की मजबूरी नहीं बनाया।
- जान बचाना पहली प्राथमिकता: हजारों लोगों के कहने पर उन्होंने माना कि आगे लड़ने के लिए शरीर का सुरक्षित रहना जरूरी है।
- छात्रों का बचाव सबसे ऊपर: उनकी पहली प्राथमिकता बेकसूर छात्रों को पुलिस कार्रवाई से बचाना था, जो पूरी हो गई।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से पीछे हटने के बाद CJP का प्रदर्शन कमजोर पड़ेगा? वांगचुक के मुताबिक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे जैसे मुद्दों पर अब अलग रास्तों से दबाव बनाया जाएगा।
क्या अब CJP आंदोलन कमजोर पड़ जाएगा?
सोनम वांगचुक का अनशन खत्म होना आंदोलन का खत्म होना नहीं माना जा रहा। इसकी वजह भी साफ है। जिन तीन मांगों पर सरकार ने लिखित भरोसा दिया, उनमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मुद्दा शामिल नहीं है। खुद वांगचुक ने भी कहा कि इस मांग पर लड़ाई दूसरे तरीके से जारी रहेगी।
उधर CJP ने पहले ही साफ कर दिया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मुख्य मांग पूरी नहीं होती। ऐसे में अनशन जरूर खत्म हुआ है, लेकिन आंदोलन अभी खत्म नहीं माना जा सकता। अब इसकी दिशा सड़क से संसद और बातचीत की मेज, दोनों जगह दिखाई दे सकती है।