संभल जिले की चंदौसी विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी की विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने बीते चार वित्तीय वर्षों में विधायक निधि (MLALAD) के जरिए अपने क्षेत्र में इंटरलॉकिंग सड़कें, शवदाह गृह और बारात घर जैसे बुनियादी ढांचागत कार्यों पर लगातार निवेश किया है। यह Chandausi MLA MLALAD Fund Report 2023-24 से लेकर चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 तक की पूरी तस्वीर सामने रखती है — किस साल कितने काम प्रस्तावित हुए, कितनों को मंजूरी मिली, और कितनी रकम खर्च हुई। आंकड़े बताते हैं कि चार वर्षों में कुल 343 विकास कार्य प्रस्तावित किए गए, जिनमें से 221 को औपचारिक स्वीकृति मिली और 105 पूरे भी हो चुके हैं।
यह रिपोर्ट कार्ड सिर्फ आंकड़ों का ढेर नहीं है, बल्कि यह बताती है कि चंदौसी में विकास कार्यों की प्राथमिकता क्या रही, पैसा किस मद में सबसे ज्यादा खर्च हुआ, और साल-दर-साल अनुशंसित, स्वीकृत व पूर्ण कार्यों के बीच का फासला कैसे बदलता गया। पूरा डेटा राज्य सरकार के विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि पोर्टल से लिया गया है, जहां हर विधायक के फंड इस्तेमाल का ब्यौरा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहता है। इस पोर्टल की खासियत यह है कि कोई भी नागरिक अपने विधायक द्वारा कराए गए कार्यों की स्थिति खुद जाकर देख सकता है, जो जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने का एक अहम माध्यम है।
चंदौसी विधानसभा और विधायक गुलाब देवी का परिचय
चंदौसी, संभल जिले की विधानसभा सीट संख्या 31 है। गुलाब देवी इस सीट से पांच बार विधायक चुनी जा चुकी हैं — उन्होंने पहली बार 1991 में यहां से जीत दर्ज की थी, फिर 1996 में दोबारा चुनी गईं, और 2022 में पांचवीं बार इस सीट से विजयी हुईं। पेशे से वे शिक्षिका रही हैं और चंदौसी कन्या इंटर कॉलेज में राजनीति शास्त्र पढ़ाने के साथ-साथ बाद में प्रधानाचार्या भी रहीं। लंबे राजनीतिक अनुभव और मंत्री पद की जिम्मेदारी के बावजूद, विधायक निधि के इस्तेमाल के आंकड़े उतने ही बारीकी से जांचे जाने चाहिए जितने किसी भी अन्य विधायक के — आखिर यह जनता का पैसा है, जो सीधे स्थानीय विकास में खर्च होना है।
भारत में सांसदों के लिए स्थानीय क्षेत्र विकास निधि योजना (MPLAD) की शुरुआत 1993 में हुई थी, और उसी की तर्ज पर बाद में राज्यों ने अपने विधायकों के लिए भी इसी तरह की योजनाएं शुरू कीं। उत्तर प्रदेश में इसे विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि योजना (MLALAD) कहा जाता है, जो ग्राम्य विकास विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित होती है। इस योजना के तहत हर विधायक को अपने निर्वाचन क्षेत्र में स्थानीय विकास कार्यों के लिए हर वित्तीय वर्ष में एक निश्चित बजट आवंटित किया जाता है।
उत्तर प्रदेश में यह राशि हमेशा एक जैसी नहीं रही। 2019 तक विधायक निधि महज डेढ़ करोड़ रुपये प्रति वर्ष हुआ करती थी। फरवरी 2020 में योगी आदित्यनाथ सरकार ने इसे बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये किया, और मई 2022 में इसे और बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया — यानी विधायकों की निधि अब सांसदों को मिलने वाली निधि के बराबर हो गई। यही वजह है कि गुलाब देवी को भी हर वित्तीय वर्ष में 5 करोड़ रुपये की मूल निधि आवंटित होती रही है, हालांकि पिछले वर्षों की अखर्ची (अवशेष) राशि जुड़ने से कुल उपलब्ध रकम इससे कहीं ज्यादा हो जाती है।
विधायक अपने क्षेत्र की जरूरतों के हिसाब से कार्यों की सिफारिश करते हैं, जिन्हें प्रशासनिक स्वीकृति के बाद जिला स्तर पर क्रियान्वित किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में चार चरण होते हैं — सिफारिश, स्वीकृति, व्यय और अंततः कार्य का पूर्ण होना। हर चरण में देरी संभव है, और यही वजह है कि “अनुशंसित”, “स्वीकृत” और “पूर्ण” कार्यों की संख्या में हर साल फासला देखने को मिलता है। हर वित्तीय वर्ष के खर्च और प्रगति की पूरी जानकारी यूपी विधायक निधि रिपोर्ट सेक्शन में जिलेवार देखी जा सकती है, जहां प्रदेश के सभी विधायकों के फंड उपयोग का ब्यौरा दर्ज है।
Chandausi MLA MLALAD Fund Report: चार साल का पूरा हिसाब
गुलाब देवी की विधायक निधि से जुड़े आंकड़ों को एक साथ रखकर देखें तो एक स्पष्ट पैटर्न उभरता है — अनुशंसित कार्यों की संख्या साल-दर-साल तेजी से बढ़ी, लेकिन स्वीकृति और पूर्णता की रफ्तार उस अनुपात में नहीं बढ़ सकी।
| वित्तीय वर्ष | अनुशंसित कार्य | स्वीकृत कार्य | कार्य पूर्ण | स्वीकृत धनराशि |
|---|---|---|---|---|
| 2023-24 | 48 | 48 | 48 | 3.87 करोड़ |
| 2024-25 | 77 | 32 | 23 | 3.16 करोड़ |
| 2025-26 | 189 | 112 | 34 | 8.25 करोड़ |
| 2026-27 (अब तक) | 29 | 29 | 0 | 2.54 करोड़ |
| कुल | 343 | 221 | 105 | 17.82 करोड़ (लगभग) |
2023-24 में जो भी काम प्रस्तावित हुए, वे सभी स्वीकृत भी हुए और उसी साल पूरे भी हो गए — यानी शत-प्रतिशत पूर्णता दर। लेकिन इसके बाद के वर्षों में अनुशंसित कार्यों की संख्या तो लगातार बढ़ती गई, मगर स्वीकृति और पूर्णता की रफ्तार उतनी तेज नहीं रह सकी, खासकर 2025-26 में जहां 189 कार्यों में से सिर्फ 34 ही पूरे हो पाए।
2023-24: शत-प्रतिशत पूर्णता दर के साथ मजबूत शुरुआत
2023-24 की विधायक निधि रिपोर्ट के अनुसार चंदौसी को इस वर्ष कुल 833.66 लाख रुपये उपलब्ध थे, जिसमें पिछले वर्ष की 333.66 लाख रुपये की अवशेष राशि और नई आवंटित 500 लाख रुपये (5 करोड़) शामिल थी। इतनी बड़ी अवशेष राशि खुद बताती है कि इससे पहले के वर्षों में भी फंड का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया था।
इस वर्ष कुल 48 कार्य प्रस्तावित हुए और सभी 48 को स्वीकृति मिली — शत-प्रतिशत स्वीकृति दर। स्वीकृत राशि 386.91 लाख रुपये रही, जिसके विरुद्ध 446.75 लाख रुपये अब भी स्वीकृति की प्रतीक्षा में रहे। सभी 48 स्वीकृत कार्य उसी वित्तीय वर्ष में पूरे भी हो गए — जो पूरी रिपोर्ट में सबसे बेहतर प्रदर्शन है। खर्च हुई राशि 350.27 लाख रुपये रही, यानी स्वीकृत राशि का करीब 90.5%। वर्षांत में 483.39 लाख रुपये का बड़ा अवशेष बचा, और 36.64 लाख रुपये प्रतिबद्ध राशि के तौर पर दर्ज हुए।
कार्यों की प्रकृति में इस वर्ष स्पष्ट रूप से इंटरलॉकिंग सड़कों पर सबसे ज्यादा जोर रहा।
| कार्य का प्रकार | संख्या |
|---|---|
| इंटरलॉकिंग रोड | 42 |
| शवदाह गृह | 6 |
48 में से 42 यानी करीब 87.5% कार्य सिर्फ इंटरलॉकिंग सड़कों से जुड़े रहे, जबकि बाकी 6 शवदाह गृह के निर्माण से संबंधित रहे। इतनी सीमित विविधता बताती है कि इस वर्ष सड़क निर्माण ही विधायक की मुख्य प्राथमिकता रहा।
2024-25: अनुशंसित कार्य बढ़े, लेकिन स्वीकृति दर घटी
2024-25 की विधायक निधि रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष पिछले साल की अवशेष राशि बढ़कर 488.64 लाख रुपये हो गई, जिसमें 500 लाख रुपये का नया आवंटन जुड़ने से कुल उपलब्ध राशि 988.64 लाख रुपये तक पहुंच गई। यह दिखाता है कि खर्च की रफ्तार आवंटन की रफ्तार से पीछे छूटती जा रही थी।
इस वर्ष अनुशंसित कार्यों की संख्या बढ़कर 77 हो गई — पिछले साल के 48 से करीब 60% ज्यादा। लेकिन इनमें से सिर्फ 32 कार्यों को ही स्वीकृति मिल सकी, यानी स्वीकृति दर घटकर महज 41.6% रह गई। स्वीकृत राशि 315.9 लाख रुपये रही, जबकि 672.74 लाख रुपये अब भी स्वीकृति की प्रतीक्षा में रहे — यह राशि खुद उस साल के नए आवंटन (500 लाख) से भी ज्यादा थी।
स्वीकृत 32 कार्यों में से सिर्फ 23 ही उसी वर्ष पूरे हो सके, यानी कार्य पूर्णता दर करीब 71.9% रही। खर्च हुई राशि 271.5 लाख रुपये रही — स्वीकृत राशि का करीब 85.9%। वर्षांत में अवशेष राशि बढ़कर 717.14 लाख रुपये हो गई, जो अब तक की सबसे बड़ी अवशेष राशि है, जबकि प्रतिबद्ध राशि 44.4 लाख रुपये दर्ज हुई।
| कार्य का प्रकार | संख्या |
|---|---|
| इंटरलॉकिंग रोड | 20 |
| बारात घर | 3 |
| सोलर लाइट/प्लॉट | 3 |
| पेयजल व स्वच्छता | 3 |
| शवदाह गृह | 2 |
| सी.सी. रोड | 1 |
इस वर्ष कार्यों की विविधता पिछले साल से बढ़ी — इंटरलॉकिंग रोड के अलावा बारात घर, सोलर लाइट और पेयजल जैसे नए कार्य भी सूची में शामिल हुए। फिर भी इंटरलॉकिंग रोड की हिस्सेदारी (20 में से कुल 32, यानी करीब 62.5%) सबसे ज्यादा बनी रही।
2025-26: अनुशंसित कार्यों में उछाल, लेकिन पूर्णता दर सबसे कम
2025-26 की जिलेवार विधायक निधि रिपोर्ट के अनुसार यह वर्ष चंदौसी के लिए अब तक का सबसे बड़ा और सबसे जटिल वर्ष रहा। पिछले वर्ष की अवशेष राशि 634.7 लाख रुपये और नया आवंटन 500 लाख रुपये मिलाकर कुल उपलब्ध राशि 1134.7 लाख रुपये (करीब 11.35 करोड़) तक पहुंच गई — जो चारों वर्षों में सबसे ज्यादा है।
अनुशंसित कार्यों की संख्या इस वर्ष उछलकर 189 हो गई, जो पिछले वर्ष के 77 से ढाई गुना से भी ज्यादा है। इनमें से 112 कार्यों को स्वीकृति मिली — स्वीकृति दर करीब 59.3%, जो 2024-25 से बेहतर तो है, लेकिन 2023-24 के शत-प्रतिशत स्तर से अब भी काफी दूर। स्वीकृत राशि 824.98 लाख रुपये रही — यह अकेले इस वर्ष की स्वीकृत राशि, चारों वर्षों में सबसे ज्यादा है।
लेकिन कार्य पूर्णता के मोर्चे पर तस्वीर सबसे कमजोर रही। स्वीकृत 112 कार्यों में से सिर्फ 34 ही पूरे हो सके — यानी पूर्णता दर घटकर महज 30.4% रह गई, जो चार वर्षों में सबसे कम है। खर्च हुई राशि 639.28 लाख रुपये रही, यानी स्वीकृत राशि का करीब 77.5%। वर्षांत में अवशेष राशि 495.42 लाख रुपये रही, जबकि प्रतिबद्ध राशि बढ़कर 185.7 लाख रुपये हो गई — यह भी चार वर्षों में सबसे ज्यादा प्रतिबद्ध राशि है।
| कार्य का प्रकार | संख्या |
|---|---|
| इंटरलॉकिंग रोड | 91 |
| मार्ग प्रकाश | 31 |
| पेयजल व स्वच्छता | 17 |
| शवदाह गृह | 6 |
| सी.सी. रोड | 4 |
| भवन निर्माण | 4 |
| रोगों से पीड़ितों हेतु सहायता | 3 |
| संपर्क मार्ग | 2 |
| अन्य कार्य | 1 |
| नाला/नाली | 1 |
नोट: इस वर्ष की कार्य-प्रकृति तालिका में दर्ज संख्याओं का योग (160) आधिकारिक तौर पर बताई गई स्वीकृत कार्यों की संख्या (112) से अधिक है। यह अंतर स्रोत डेटा में ही मौजूद है — संभव है कि कुछ कार्य आंशिक रूप से स्वीकृत हों या वर्गीकरण की प्रक्रिया में अलग-अलग चरणों के आंकड़े मिश्रित हो गए हों। पाठकों को यह आंकड़ा सांकेतिक रूप में ही लेना चाहिए।
इस वर्ष इंटरलॉकिंग रोड (91) के साथ-साथ मार्ग प्रकाश यानी स्ट्रीट लाइट (31) भी पहली बार बड़ी संख्या में सूची में शामिल हुआ। कुल मिलाकर देखा जाए तो यही वह वर्ष है जहां चंदौसी में विकास कार्यों की योजना सबसे ज्यादा महत्वाकांक्षी रही, लेकिन क्रियान्वयन की रफ्तार उस महत्वाकांक्षा के साथ तालमेल नहीं बिठा सकी।
2026-27: बड़ी अवशेष राशि के साथ चालू वित्तीय वर्ष
चूंकि 2026-27 का वित्तीय वर्ष अभी जारी है, इसलिए इसके आंकड़े पूरे साल की नहीं बल्कि अब तक की प्रगति दिखाते हैं। 2026-27 की जिलेवार विधायक निधि रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष की शुरुआत ही 557.77 लाख रुपये की भारी-भरकम अवशेष राशि के साथ हुई, जिसमें अब तक 250 लाख रुपये (2.5 करोड़) का नया आवंटन जुड़कर कुल उपलब्ध राशि 807.77 लाख रुपये हो गई है।
अब तक 29 कार्य प्रस्तावित हुए हैं और सभी 29 को स्वीकृति मिल चुकी है — यानी शत-प्रतिशत स्वीकृति दर, जो 2023-24 के बाद पहली बार देखने को मिली है। स्वीकृत राशि 253.87 लाख रुपये है, जबकि 553.9 लाख रुपये अब भी स्वीकृति की प्रतीक्षा में हैं — यह राशि खुद इस वित्तीय वर्ष के अब तक के नए आवंटन से दोगुने से भी ज्यादा है। खर्च फिलहाल 153.98 लाख रुपये हुआ है, यानी खर्च अनुपात करीब 60.7%। चूंकि वर्ष अभी चल रहा है, इसलिए एक भी कार्य पूर्ण के रूप में दर्ज नहीं हुआ है। वर्तमान में 653.79 लाख रुपये अवशेष के तौर पर और 99.89 लाख रुपये प्रतिबद्ध राशि के तौर पर दर्ज हैं।
| कार्य का प्रकार | संख्या |
|---|---|
| इंटरलॉकिंग रोड | 22 |
| बारात घर | 4 |
| रोगों से पीड़ितों हेतु सहायता | 2 |
| भवन निर्माण | 1 |
यहां भी इंटरलॉकिंग रोड (29 में से 22, यानी करीब 76%) की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा बनी हुई है। सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि 653.79 लाख रुपये की मौजूदा अवशेष राशि अकेले एक पूरे वित्तीय वर्ष के मानक आवंटन (500 लाख) से भी ज्यादा है — यानी चंदौसी के पास अभी इतना पैसा जमा है कि बिना कोई नया आवंटन मिले भी अगले साल का लगभग पूरा बजट कवर हो सकता है।
कार्यों की प्रकृति: इंटरलॉकिंग सड़कों पर सबसे ज्यादा जोर
चारों वित्तीय वर्षों को जोड़कर देखें तो एक बात बिल्कुल स्पष्ट हो जाती है — गुलाब देवी की विधायक निधि से हुए कार्यों में इंटरलॉकिंग रोड की हिस्सेदारी हर वर्ष सबसे ज्यादा रही है।
| कार्य का प्रकार | 2023-24 | 2024-25 | 2025-26 | 2026-27 (अब तक) | कुल |
|---|---|---|---|---|---|
| इंटरलॉकिंग रोड | 42 | 20 | 91 | 22 | 175 |
| मार्ग प्रकाश | 0 | 0 | 31 | 0 | 31 |
| पेयजल व स्वच्छता | 0 | 3 | 17 | 0 | 20 |
| शवदाह गृह | 6 | 2 | 6 | 0 | 14 |
| बारात घर | 0 | 3 | 0 | 4 | 7 |
| सी.सी. रोड | 0 | 1 | 4 | 0 | 5 |
| भवन निर्माण | 0 | 0 | 4 | 1 | 5 |
| रोगों से पीड़ितों हेतु सहायता | 0 | 0 | 3 | 2 | 5 |
| सोलर लाइट/प्लॉट | 0 | 3 | 0 | 0 | 3 |
| संपर्क मार्ग | 0 | 0 | 2 | 0 | 2 |
| अन्य कार्य | 0 | 0 | 1 | 0 | 1 |
| नाला/नाली | 0 | 0 | 1 | 0 | 1 |
चार वर्षों में दर्ज कुल कार्यों में इंटरलॉकिंग रोड की हिस्सेदारी करीब 63% रही है, जो साफ बताता है कि चंदौसी क्षेत्र में सड़क निर्माण ही विधायक की सबसे बड़ी और सबसे लगातार प्राथमिकता रही है। शवदाह गृह और बारात घर जैसे सामुदायिक ढांचे भी हर साल किसी न किसी रूप में सूची में शामिल रहे, जो बताता है कि इन सामाजिक-सांस्कृतिक जरूरतों को भी नजरअंदाज नहीं किया गया। मार्ग प्रकाश और पेयजल जैसे कार्य बाद के वर्षों में जुड़े, जो दिखाता है कि समय के साथ प्राथमिकताओं में थोड़ा विस्तार हुआ।
वित्तीय प्रबंधन: घटती पूर्णता दर और बढ़ती अवशेष राशि
आंकड़ों को करीब से देखें तो चंदौसी की विधायक निधि में एक चिंताजनक पैटर्न उभरता है — हर साल अवशेष राशि (यानी आवंटित होकर भी खर्च न हुआ पैसा) बढ़ती चली गई है।
| वित्तीय वर्ष | स्वीकृति दर | कार्य पूर्णता दर | खर्च अनुपात (व्यय/स्वीकृत) | वर्षांत अवशेष राशि |
|---|---|---|---|---|
| 2023-24 | 100% | 100% | 90.5% | 483.39 लाख |
| 2024-25 | 41.6% | 71.9% | 85.9% | 717.14 लाख |
| 2025-26 | 59.3% | 30.4% | 77.5% | 495.42 लाख |
| 2026-27 (अब तक) | 100% | 0%* | 60.7% | 653.79 लाख |
*2026-27 का वित्तीय वर्ष अभी चल रहा है, इसलिए पूर्णता दर का आंकड़ा वर्षांत तक बदल सकता है।
यह तालिका बताती है कि जहां 2023-24 में हर पैमाने पर बेहतरीन प्रदर्शन रहा, वहीं उसके बाद के वर्षों में खर्च अनुपात लगातार घटता गया — 90.5% से घटकर 60.7% तक। इसका सीधा असर अवशेष राशि पर पड़ा, जो शुरुआती 333.66 लाख रुपये से बढ़कर अब 653.79 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। दूसरे शब्दों में, हर साल जितना पैसा आवंटित हुआ, उससे कम खर्च होता गया, और बचा हुआ पैसा अगले साल की राशि में जुड़ता चला गया — जिससे उपलब्ध कुल राशि तो लगातार बढ़ती रही, लेकिन वास्तविक क्रियान्वयन की रफ्तार उस बढ़ोतरी के साथ कदमताल नहीं कर सकी।
यह पैटर्न किसी भी सरकारी योजना में असामान्य नहीं है — प्रशासनिक प्रक्रियाओं, ठेकेदारों की उपलब्धता और स्थानीय निकायों के साथ समन्वय जैसी वजहों से देरी हो सकती है। लेकिन जब अवशेष राशि किसी वित्तीय वर्ष के मानक आवंटन से भी ज्यादा हो जाए, तो यह जरूर संकेत देता है कि स्वीकृति और क्रियान्वयन की प्रक्रिया को तेज करने की गुंजाइश बनी हुई है।
यह रिपोर्ट कार्ड आम नागरिक के लिए क्यों मायने रखता है?
विधायक निधि का हिसाब-किताब सिर्फ प्रशासनिक कागजी कार्रवाई नहीं है — यह सीधे तौर पर आम नागरिक की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा है। इंटरलॉकिंग सड़कें, शवदाह गृह और बारात घर जैसी सुविधाएं किसी भी कस्बे या गांव की सामाजिक जरूरतों का अहम हिस्सा हैं। जब कोई नागरिक यह जानना चाहता है कि उसके क्षेत्र में कोई प्रस्तावित काम अब तक शुरू क्यों नहीं हुआ, तो यही आंकड़े उसे यह समझने में मदद करते हैं कि फंड की कमी है या स्वीकृति प्रक्रिया में देरी।
चंदौसी के मामले में आंकड़े साफ बताते हैं कि फंड की कोई कमी नहीं रही — बल्कि पैसा जरूरत से ज्यादा उपलब्ध रहा। असली सवाल यह है कि स्वीकृत कार्यों को समय पर पूरा करने और नई सिफारिशों को तेजी से मंजूरी दिलाने की रफ्तार कैसे बढ़ाई जाए। पारदर्शिता के लिहाज से यह भी अहम है कि हर वित्तीय वर्ष का डेटा सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है, जिससे कोई भी नागरिक, पत्रकार या शोधकर्ता इन आंकड़ों की जांच खुद कर सकता है और अपने प्रतिनिधि से जवाबदेही मांग सकता है।
चार वर्षों का सार: कितना काम हुआ, कितना अब भी बाकी?
कुल मिलाकर देखें तो गुलाब देवी ने चार वित्तीय वर्षों में चंदौसी विधानसभा क्षेत्र में 343 विकास कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें से 221 को औपचारिक मंजूरी मिली और 105 पूरे भी हो चुके हैं। यानी प्रस्तावित कार्यों में से करीब 31% ही अब तक पूरी तरह क्रियान्वित हो सके हैं, जबकि स्वीकृत कार्यों में से भी करीब आधे (105 में से 221, यानी 47.5%) ही पूर्ण हो पाए हैं — बाकी अब भी प्रगति पर हैं या स्वीकृति की प्रतीक्षा में हैं।
आर्थिक रूप से देखें तो चार वर्षों में कुल मिलाकर करीब 17.5 करोड़ रुपये नया आवंटन हुआ, जिनमें से करीब 17.8 करोड़ रुपये के कार्यों को स्वीकृति मिली (यह आंकड़ा नए आवंटन से भी ज्यादा है क्योंकि इसमें पिछले वर्षों की अवशेष राशि का इस्तेमाल भी शामिल है) और करीब 14.15 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। मौजूदा अवशेष राशि 653.79 लाख रुपये है, जो आने वाले महीनों में जारी कार्यों को पूरा करने में इस्तेमाल होने की उम्मीद है।
इंटरलॉकिंग रोड इस पूरी अवधि में सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी रही, जिसके बाद मार्ग प्रकाश और पेयजल व स्वच्छता से जुड़े कार्यों का स्थान रहा। यह पैटर्न बताता है कि चंदौसी क्षेत्र में बुनियादी सड़क ढांचे की मांग अब भी सबसे ज्यादा बनी हुई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
विधायक निधि (MLALAD) क्या है? यह उत्तर प्रदेश सरकार की एक योजना है, जिसके तहत हर विधायक को अपने निर्वाचन क्षेत्र में स्थानीय विकास कार्यों के लिए हर वित्तीय वर्ष में एक निश्चित धनराशि (आमतौर पर 5 करोड़ रुपये) आवंटित की जाती है।
चंदौसी की वर्तमान विधायक कौन हैं? गुलाब देवी, जो भारतीय जनता पार्टी से चंदौसी विधानसभा (सीट संख्या 31, संभल जिला) का प्रतिनिधित्व करती हैं और उत्तर प्रदेश सरकार में माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भी हैं।
चार वर्षों में कुल कितने विकास कार्य पूरे हुए? 2023-24 से 2026-27 (अब तक) के बीच कुल 105 कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि 221 कार्यों को स्वीकृति मिली और 343 कार्य प्रस्तावित किए गए थे।
चंदौसी में विधायक निधि से सबसे ज्यादा कौन से काम हुए? इंटरलॉकिंग रोड यानी सड़क निर्माण के काम सबसे ज्यादा हुए — चार वर्षों में कुल 175, जो सभी दर्ज कार्यों का करीब 63% है।
चंदौसी में विधायक निधि की अवशेष राशि इतनी ज्यादा क्यों है? हर साल आवंटित राशि की तुलना में खर्च की रफ्तार धीमी रही, जिससे अखर्ची राशि अगले वित्तीय वर्ष में जुड़ती चली गई। वर्तमान में यह अवशेष राशि 653.79 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।
विधायक निधि के खर्च की जानकारी कहां देखी जा सकती है? हर विधायक के फंड इस्तेमाल का पूरा ब्यौरा आधिकारिक MLALAD पोर्टल और यूपी विधायक निधि रिपोर्ट सेक्शन पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।
चंदौसी विधायक गुलाब देवी की विधायक निधि का यह चार वर्षों का रिपोर्ट कार्ड एक दोहरी तस्वीर पेश करता है। एक तरफ 2023-24 का शत-प्रतिशत पूर्णता दर वाला प्रदर्शन दिखाता है कि जब इच्छाशक्ति और प्रशासनिक तालमेल दुरुस्त हो, तो काम तेजी से पूरे हो सकते हैं। दूसरी तरफ, बाद के वर्षों में लगातार बढ़ती अवशेष राशि और घटती पूर्णता दर यह संकेत देती है कि फंड की उपलब्धता कभी समस्या नहीं रही — बल्कि स्वीकृति और क्रियान्वयन की रफ्तार ही सबसे बड़ी चुनौती बनी रही। जैसे-जैसे 2026-27 का वित्तीय वर्ष आगे बढ़ेगा, यह देखना अहम होगा कि 653.79 लाख रुपये की भारी-भरकम अवशेष राशि आखिरकार जमीन पर ठोस विकास कार्यों में तब्दील होती है या नहीं।
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