बृजभूषण सिंह के खिलाफ फिर कोर्ट पहुंचीं 4 महिला रेसलर: यौन उत्पीड़न केस में बरी करने के फैसले को चुनौती; दलील- आदेश पुरानी सोच वाला - Panipat News

Published on 25 सित॰ 2026

साल 2023 में जंतर-मंतर पर पुलिस के साथ धक्का-मुक्की के दौरान संगीता और विनेश फोगाट जमीन पर गिर पड़ीं थीं। इनसेट में बृजभूषण शरण सिंह का फाइल फोटो।

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और BJP नेता बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न मामले में बरी किए जाने के खिलाफ 4 महिला पहलवानों ने फिर कोर्ट का रुख किया है।

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न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, महिला पहलवानों ने राउज एवेन्यू कोर्ट में अपील दायर कर एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) के 3 अगस्त 2026 के फैसले को चुनौती दी है। निचली अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और WFI के तत्कालीन सहायक सचिव विनोद तोमर को सभी आरोपों से बरी कर दिया था।

महिला पहलवानों ने अपनी याचिका में इस फैसले को 'पुरानी सोच वाला' (archaic) बताया है। उनका कहना है कि फैसले में यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं के व्यवहार को लेकर बनी-बनाई धारणाओं को आधार बनाया गया है।

याचिका में तर्क दिया गया है कि फैसले में यह अपेक्षा की गई कि यौन हिंसा की पीड़िता को घटना के बाद किस तरह व्यवहार करना चाहिए। इस अपील पर राउज एवेन्यू कोर्ट में 26 सितंबर को सुनवाई हो सकती है।

याचिका में महिला पहलवानों ने ये तर्क गिनाए…

  • फैसला अनुमान और अटकलों पर आधारित: महिला पहलवानों ने याचिका में कहा कि निचली अदालत का फैसला कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। इसमें रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों का स्पष्ट रूप से गलत और चुनिंदा तरीके से आकलन किया गया है। निचली अदालत का फैसला अनुमान और अटकलों पर आधारित है। इसमें कानून के स्थापित और बाध्यकारी सिद्धांतों को लागू नहीं किया गया।
  • सबूतों का निष्पक्ष और तथ्यपरक आकलन नहीं: फैसले में यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं के ‘अपेक्षित’ व्यवहार को लेकर पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं को आधार बनाया गया, जबकि पीड़िताओं की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सबूतों का निष्पक्ष और तथ्यपरक आकलन किया जाना चाहिए था।
  • पीड़िताओं की लंबी चुप्पी को संदेह के रूप में देखा: ACJM ने अपने फैसले में पीड़िताओं की लंबे समय तक चुप्पी, आरोपी के साथ उनके लगातार मधुर संबंध और बयानों में विरोधाभास को अभियोजन पक्ष के मामले पर संदेह पैदा करने वाले आधार के रूप में देखा था। अदालत ने कहा था कि रिकॉर्ड पर मौजूद कई तस्वीरों से पता चलता है कि आरोपी को पीड़िताओं ने पारिवारिक कार्यक्रमों और शादी समारोहों में भी आमंत्रित किया था।
  • करियर को नुकसान पहुंचने का डर रहा होगा : अदालत ने यह भी कहा था कि यह बात समझ में आती है कि तत्कालीन WFI अध्यक्ष होने के नाते सिंह के खिलाफ शिकायत करने पर महिला पहलवानों को अपने करियर को नुकसान पहुंचने का डर रहा होगा। हालांकि, अदालत के मुताबिक यह समझना मुश्किल था कि इसके बावजूद उन्होंने वर्षों तक सिंह के साथ मधुर संबंध क्यों बनाए रखे।
बरी होने के के बाद बृजभूषण ने रैली निकाली थी, जिसमें एक हजार से अधिक गाड़ियां शामिल थीं। अयोध्या में संतों ने उनका स्वागत किया था।

बरी होने के के बाद बृजभूषण ने रैली निकाली थी, जिसमें एक हजार से अधिक गाड़ियां शामिल थीं। अयोध्या में संतों ने उनका स्वागत किया था।

निचली अदालत ने बृजभूषण को बरी किया था

ACJM ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354, 354A और 506 (भाग-I) के तहत बृजभूषण शरण सिंह को 3 अगस्त 2026 को बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। कोर्ट ने पूर्व WFI सचिव विनोद तोमर को भी IPC की धारा 506 (भाग-I) के आरोप से बरी कर दिया था। बरी होने के फैसले के बाद बृजभूषण ने कहा था-

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मेरे लिए खुशी का दिन है। होइहि सोइ जो राम रचि राखा।

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बेटे करण भूषण ने फेसबुक पर पोस्ट किया। लिखा- साजिश हुई नाकाम, सत्य की हुई जीत। पिताजी बाइज्जत बरी हुए। सत्यमेव जयते! वहीं, WFI के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने कहा- “बृजभूषण पर झूठे आरोप लगाए गए थे। आज उन्हें सम्मानपूर्वक बरी कर दिया है। इससे पूरे कुश्ती जगत में खुशी का माहौल है।”

दिल्ली पुलिस ने इन धाराओं में दर्ज किया था केस

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने दोनों के खिलाफ IPC की धारा 354 (महिला की गरिमा भंग करना), 354A (यौन उत्पीड़न), 354D (पीछा करना/स्टॉकिंग) और 506(1) (आपराधिक धमकी) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। तोमर के खिलाफ IPC की धारा 109 (उकसाने/सहायता करने) भी लगाई गई थी।

महिला पहलवानों ने सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कथित घटनाएं 2016 से 2019 के बीच WFI कार्यालय, बृजभूषण सिंह के आधिकारिक आवास और विदेशों में हुई थीं। हालांकि, एक नाबालिग महिला पहलवान की ओर से सिंह के खिलाफ दर्ज POCSO मामले में पुलिस ने क्लोजर/कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की थी।

कोर्ट से बरी होने के बाद बृजभूषण शरण सिंह घर पहुंचे तो समर्थकों ने उन पर फूल बरसाए थे।

कोर्ट से बरी होने के बाद बृजभूषण शरण सिंह घर पहुंचे तो समर्थकों ने उन पर फूल बरसाए थे।

पहलवान विनेश फोगाट ने कहा था- हमने उम्मीद नहीं छोड़ी है

उधर, इस फैसले पर विनेश ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा था- "हमें सड़क पर उतरने और सत्ताधारी पार्टी के एक बाहुबली नेता के खिलाफ FIR दर्ज करवाने के लिए बहुत हिम्मत जुटानी पड़ी थी। सत्ता और अपने बाहुबल के दम पर बृजभूषण ने कई लड़कियों को डराकर उनके नाम वापस करवाए हैं। पर कई महिला पहलवान खड़ी रहीं और कोर्ट में बृजभूषण के खिलाफ लड़ाई लड़ती रहीं।

हमें इस बात का बहुत दुख है कि अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन हिंसा के आरोपों में दोषी नहीं माना। शुरू दिन से ही सारा तंत्र, सरकार और ये सिस्टम बृजभूषण को बचाने के लिए लगा हुआ है।"