Published: Sunday, August 16, 2026, 16:03 [IST]
Shraddha Walkar Murder Case: दिल्ली के चर्चित श्रद्धा वालकर हत्याकांड को सामने आए करीब चार साल हो गए हैं, लेकिन श्रद्धा के परिवार का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है। हत्या के मामले में आरोपी आफताब अमीन पूनावाला जेल में है और मुकदमे की सुनवाई दिल्ली की साकेत कोर्ट में जारी है। दूसरी ओर, श्रद्धा के बचे हुए अवशेष अब भी पुलिस के मालखाने में केस प्रॉपर्टी के तौर पर रखे हैं।
श्रद्धा के पिता विकास वालकर बेटी के अंतिम संस्कार की इच्छा पूरी किए बिना दुनिया से चले गए। अब उनके भाई श्रीजे वालकर केस लड़ रहे हैं और मुंबई से दिल्ली के चक्कर लगा रहे हैं। सवाल यह है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा यह मुकदमा आखिर इतने लंबे समय से क्यों जारी है?
18 मई 2022 को हुई थी श्रद्धा की हत्या
पुलिस के मुताबिक, श्रद्धा वालकर की हत्या 18 मई 2022 को दिल्ली में उसके लिव-इन पार्टनर आफताब अमीन पूनावाला ने की थी। जांच में सामने आया कि हत्या के बाद आफताब ने शव के टुकड़े किए और उन्हें कुछ समय तक किराये के घर में रखे फ्रिज में रखा। इसके बाद वह कई दिनों तक उन्हें महरौली के जंगलों में अलग-अलग जगहों पर फेंकता रहा।
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मामला 12 नवंबर 2022 को सामने आया, जब पुलिस ने आफताब को गिरफ्तार किया। लंबे समय तक शव नहीं मिलने के कारण जांच काफी मुश्किल रही। बाद में पुलिस को श्रद्धा के कुछ अवशेष मिले। DNA जांच के जरिए इनकी पहचान श्रद्धा के तौर पर हुई।
छोटे बक्से में रखे हैं श्रद्धा के अवशेष
श्रद्धा की हत्या के बाद मिले अवशेष फिलहाल महरौली थाने के मालखाने में केस प्रॉपर्टी के तौर पर रखे गए हैं। बताया जाता है कि इन्हें छोटे प्लास्टिक के बक्से में सुरक्षित रखा गया है। महरौली थाना साकेत कोर्ट से करीब चार किलोमीटर दूर है। मुकदमे की सुनवाई शुरू होने के बाद कई बार इन अवशेषों को कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश किया जा चुका है। श्रद्धा के भाई श्रीजे के लिए यह पल बेहद मुश्किल होता है, जब उनकी बहन के अवशेष अदालत में लाए जाते हैं।
पिता की आखिरी इच्छा भी अधूरी रह गई
श्रद्धा के पिता विकास वालकर को नवंबर 2022 में बेटी की मौत की जानकारी मिली थी। वह लगातार चाहते रहे कि केस जल्दी खत्म हो और उन्हें बेटी के अंतिम संस्कार का मौका मिले। विकास वालकर ने अपनी मौत से पहले दिए एक इंटरव्यू में भी कहा था कि वह अपनी बेटी के अवशेष तभी देख पाते हैं, जब उन्हें अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया जाता है। फरवरी 2025 में विकास वालकर का निधन हो गया। बेटी के अंतिम संस्कार की उनकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। अब श्रद्धा के भाई श्रीजे ने केस की जिम्मेदारी संभाल ली है।
भाई ने हाई कोर्ट में लगाई थी अर्जी
श्रद्धा के भाई ने पिछले महीने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख करते हुए मुकदमे की सुनवाई जल्द पूरी कराने की मांग की थी। उनकी कोशिश थी कि फास्ट ट्रैक कोर्ट को ट्रायल जल्दी खत्म करने का निर्देश दिया जाए। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस मामले में ऐसा आदेश देने से इनकार कर दिया। अब श्रीजे की इच्छा है कि मुकदमा जल्द खत्म हो और उन्हें बहन के अंतिम संस्कार के लिए उसके अवशेष सौंपे जा सकें।
24 जनवरी 2023 को दाखिल हुई चार्जशीट
श्रद्धा हत्याकांड में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तारी के करीब 75 दिन बाद 24 जनवरी 2023 को चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद आरोप तय करने की प्रक्रिया में भी करीब तीन महीने लगे। 9 मई 2023 को कोर्ट ने आफताब के खिलाफ आरोप तय किए। इसके बाद करीब एक महीने बाद 1 जून 2023 से साकेत कोर्ट में ट्रायल शुरू हुआ।
उस समय उम्मीद थी कि फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामला कुछ महीनों में पूरा हो सकता है। निर्भया मामले में भी फास्ट ट्रैक कोर्ट ने करीब नौ महीने में फैसला सुना दिया था। लेकिन श्रद्धा केस में तीन साल बाद भी गवाही की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में क्यों लग रहा इतना समय?
मुकदमे में देरी की एक वजह यह भी बताई गई कि शुरुआत में कोर्ट को मामले की रोजाना सुनवाई करने का स्पष्ट निर्देश नहीं था। ट्रायल शुरू होने के करीब दो साल बाद डे-टू-डे सुनवाई का फैसला हुआ। लेकिन रोजाना सुनवाई के लिए भी कोर्ट में केवल दो घंटे का समय तय किया गया। बताया जाता है कि सुनवाई का समय दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक रखा गया था।
श्रद्धा पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि आरोपी के वकील कई बार देरी से कोर्ट पहुंचते थे। इससे निर्धारित दो घंटे में भी पूरी सुनवाई नहीं हो पाती थी। हालांकि, ये आरोप मुकदमे की प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम स्थिति अदालत के रिकॉर्ड से ही तय होगी।
आफताब की वजह से भी टली सुनवाई
मामले में आरोपी आफताब पूनावाला की वजह से भी कुछ मौकों पर सुनवाई टलने की बात सामने आई है। हाल ही में 20 जुलाई को सुनवाई इसलिए नहीं हो सकी क्योंकि आफताब को MA की परीक्षा देनी थी। आफताब जेल में रहते हुए इग्नू से पढ़ाई कर रहा है। इससे पहले डेंटिस्ट के पास जाने और स्वास्थ्य से जुड़ी वजहों के कारण भी सुनवाई टलने की जानकारी सामने आई थी।
कोर्ट में श्रीजे और आफताब का आमना-सामना
मुकदमे की सुनवाई के दौरान श्रद्धा के भाई श्रीजे और आफताब का कई बार आमना-सामना भी हुआ है। दोनों के बीच बातचीत नहीं हुई, लेकिन श्रीजे ने कई मौकों पर आफताब को देखकर अपना गुस्सा जाहिर किया है। श्रद्धा की ओर से पैरवी कर रहीं वकील ने यह आरोप भी लगाया कि कुछ मौकों पर आफताब आरोपी के कटघरे की जगह वकीलों के बैठने वाली अगली बेंच पर जाकर बैठ गया था। इस बारे में जज के सामने शिकायत किए जाने की बात भी सामने आई।
अभी इन अहम गवाहों की गवाही बाकी
मुकदमे में अभी कई महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही पूरी होना बाकी बताई जा रही है। इनमें केस के जांच अधिकारी और डीएनए जांच से जुड़े डॉक्टर भी शामिल हैं। गवाही के बाद क्रॉस एग्जामिनेशन की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। यही वजह है कि तीन साल से सुनवाई चलने के बावजूद ट्रायल अभी अंतिम चरण में नहीं पहुंचा है।
क्या आफताब को मिलेगी फांसी?
श्रद्धा के भाई श्रीजे का कहना है कि उन्हें आरोपी के लिए कड़ी से कड़ी सजा चाहिए। वहीं, श्रद्धा की वकील को उम्मीद है कि इसी साल ट्रायल कोर्ट का फैसला आ सकता है। लेकिन ट्रायल कोर्ट का फैसला आने के बाद भी मामला खत्म होना जरूरी नहीं है। अगर आफताब को मौत की सजा सुनाई जाती है, तो ऐसे मामले में हाई कोर्ट की पुष्टि जरूरी होगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील, रिव्यू और दूसरी कानूनी प्रक्रियाएं भी हो सकती हैं।
यानी ट्रायल कोर्ट का फैसला आने के बाद भी अंतिम कानूनी फैसला आने में समय लग सकता है। इस बीच श्रद्धा के परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि उन्हें बहन के अंतिम संस्कार के लिए उसके अवशेष आखिर कब मिलेंगे।
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