By: Shailendra Dixit | Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 19:23:51 (IST)
नई दिल्ली(इंटरनेट डेस्क): भारत सरकार के बिजली मंत्रालय ने यात्री वाहन बनाने वाली ऑटो कंपनियों के लिए नई कारपोरेट एवरेज फ्यूल इकॉनमी यानी सीएएफई (केफ) मानदंड नोटिफाई कर दिए हैं। इन नियमों के जरिये सरकार का लक्ष्य है कि पांच साल में भारत में जो यात्री वाहन बनें उनकी औसत ईंधन खपत करीब 25 किलोमीटर प्रति लीटर हो। जो फिलहाल लगभग 18 किलोमीटर है। यह भारत में बिकने वाली सभी चौपहिया गाड़ियों का औसत है। नए नियम एक अप्रैल, 2027 से लागू होंगे और 31 मार्च 2032 तक लागू रहेंगे। ये नियम उन नए यात्री वाहनों पर लागू होंगे जो भारत में बिक्री के लिए बनाए या आयात किए जाएंगे।
बढ़ेंगी कारों की कीमतें
आम ग्राहकों के लिए इसका असर दो तरह से हो सकता है। एक तरफ जहां पेट्रोल-डीजल वाली नई कारों की कीमत कुछ बढ़ सकती है, क्योंकि कंपनियों को बेहतर इंजन, अच्छे एसी, विशेष पेंट और ग्लेजिंग जैसी तकनीकें लगानी होंगी। दूसरी ओर लंबे समय में ईंधन खर्च घटेगा और इलेक्ट्रिक तथा हाइब्रिड विकल्प ज्यादा उपलब्ध होंगे। इस तरह से सरकार चाहती है कि आने वाले सालों में कारें कम पेट्रोल-डीजल खपत करें, प्रदूषण कम हो और देश तेल आयात पर कम निर्भर रहे। इस फैसले से आटोमोबाइल बाजार में कंपनियों को इंजन, हाइब्रिड, इलेक्ट्रिक और वैकल्पिक ईंधन वाली गाड़ियां तेजी से लानी पड़ेंगी। छोटे निर्माताओं पर बोझ कम करने के लिए सालाना 1,000 यूनिट से कम बिक्री वालों को बेड़े के औसत दायित्व से छूट दी गई है।
कई तरह के विकल्प
नए ढांचे में इस बात का ख्याल रखा गया है कि आटो कंपनियों के पास कई तरह के विकल्प रहे। नवीकरणीय और कम कार्बन वाले ईंधन जैसे एथनाल मिश्रित पेट्रोल, बायोफ्यूल और सीबीजी के लिए कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर जोड़ा गया है। मान्यता प्राप्त ईंधन बचत तकनीकों की सूची चार से बढ़ाकर बारह कर दी गई है। बैटरी इलेक्ट्रिक और रेंज-एक्सटेंडेड वाहनों को तीन गुना, प्लग-इन हाइब्रिड तथा स्ट्रांग हाइब्रिड को ढाई गुना सुपर क्रेडिट मिलेगा। कंपनियां निर्धारित दो या तीन साल के पूरे लक्ष्य को हासिल कर सकती हैं। एक वर्ष में लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन किया तो उसे आगे ले जा सकती हैं। दूसरे निर्माताओं से क्रेडिट खरीद-बेच सकती हैं या ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के जरिए क्रेडिट खरीद सकती हैं।
यूरोप और अमेरिका में भी औसत माइलेज पर सख्त नियम
यूरोप और अमेरिका में भी कंपनियों के पूरे बेड़े के औसत माइलेज पर सख्त नियम हैं। यूरोपीय संघ में यात्री कारों के लिए 2025-29 का बेड़े का औसत माइलेज लक्ष्य करीब 93।6 ग्राम कार्बन डाइआक्साइड प्रति किलोमीटर और 2030-34 का लक्ष्य 49।5 ग्राम है। पहले 2035 से नए वाहनों का औसत शून्य करने का लक्ष्य था, हालांकि हाल के संशोधनों में कुछ ढील दी गई है। 2024 के नियम के अनुसार 2031 तक कार और लाइट ट्रक मिलाकर उद्योग औसत करीब 50।4 मील प्रति गैलन यानी लगभग 20 किलोमीटर प्रति लीटर था।