चिराग, मांझी-अशोक चौधरी जैसे दलित नेताओं की संपत्ति 400% बढ़ी: बिहार में 46% दलित 6000 भी नहीं कमा रहे, पासवान-मुसहर टोला के लोग बोले-मजदूरी करते मर जाएंगे - Bihar News

Published on 8 सित॰ 2026

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पूर्णिया के चांदी गांव के रहने वाले सुरेश ऋषि का घर आज भी फूस का है। 2 कमरे के इस मकान में उनका 16 सदस्यों का पूरा परिवार गुजर-बसर कर रहा है। बारिश आती है तो भागकर सरकारी बिल्डिंग के बरामदे में छिपना पड़ता है। कहते हैं, ‘मेरे दादा, पिता और मैं खुद तीन पीढ़ियों से मजदूरी करते आ रहे हैं। आगे मेरा बच्चा भी मजदूरी ही करेगा।’

हकीकत-2

इलेक्शन कमीशन के डॉक्युमेंट के मुताबिक SC के लिए आरक्षित सीटों से नुमाइंदगी करने वाले नेताओं की संपत्ति दिन दूनी और रात चौगुनी बढ़ी है। बिहार के टॉप-8 नेताओं की संपत्ति में केवल 10 वर्षों में ही औसतन 400 फीसदी का इजाफा हुआ है।

बिहार में एक बार फिर से आरक्षण पर हंगामा बरपा है। NDA के दलित नेता ही आपस में भिड़े हुए हैं। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी आरक्षण की रिव्यू की मांग कर रहे हैं तो चिराग पासवान अलग राग अलाप रहे हैं।

ऐसे में भास्कर ने दो तरह के आरक्षित लोगों की स्टडी की। एक SC वर्ग में आने वाले आम लोग और दूसरा इनकी नुमाइंदगी करने वाले नेता। हमने समझा कि 10 साल में आरक्षण का असली फायदा किसने उठाया। पढ़िए स्पेशल रिपोर्ट…।

सबसे पहले बिहार के 5 जिलों से SC समाज के लोगों का हाल जानिए

बरसात में रतजगा कर गुजरती है जिंदगी: जद्दू ऋषि

पूर्णिया के रहने वाले जद्दू ऋषि का 20 लोगों का परिवार है। कहते हैं, ‘हमारी जिंदगी में न आरक्षण के मायने हैं और न इसका लाभ मिल पा रहा है। अब हमारी जिंदगी कितनी बदली इसका अंदाजा इस बात से लगाइये कि बरसात की पूरी रात हमें जाग कर बितानी पड़ती है। हमारे घर की छत से पानी टपकता रहता है। जिस स्थिति में मेरे पिता ने जिंदगी गुजारी है, उससे भी ज्यादा गंदी हालत में हमलोग गुजारा कर रहे हैं।’

बाप-दादा ताड़ी बेचे, पढ़ाई से हमारा जीवन बदला: परमेश्वर पासवान

हाजीपुर के मथना मलिक गांव के परमेश्वर पासवान अब अपने पिता की तरह ताड़ी नहीं बेचते हैं। कहते हैं, 'मेरे बाप-दादा का जीवन ताड़ के पेड़ पर चढ़ने और ताड़ी बेचने में गुजर गया। मैंने ताड़ी बेचने की जगह खेती-किसानी की।’

'30 साल में अपनी जमीन नहीं खरीद पाया। दूसरों की जमीन बटाई लेकर खेती करता हूं। इसके अलावा घर खर्च के लिए प्राइवेट से जीविका में अकाउंटेंट की नौकरी करता हूं।’

परमेश्वर ने बताया, ’मैंने पढ़ाई को प्रथामिकता दी। पिछले 30 साल में हमारे परिवार की आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति में थोड़ा सुधार आया है। अपने 4 बच्चों को मैट्रिक से आगे की पढ़ाई कराई है। दो लड़की बीए तक की पढ़ाई कर चुकी। बहू बीए की पढ़ाई कर रही है। अभी तक किसी को सरकारी नौकरी नहीं मिली है।’

हमारे हिस्से बस मजदूरी करना है: रामवृक्ष मांझी

बोधगया के रामवृक्ष मांझी मजदूर हैं। राजमिस्त्री के साथ मजदूरी का काम करते हैं। उन्होंने कहा, ‘मेरे पिता मजदूरी करते-करते गुजर गए। मेरी आधी से ज्यादा जिंदगी मजदूरी करके कट गई। मेरे बाद मेरे बच्चे भी मजदूरी कर रहे हैं। हमारे हिस्से बस मजदूरी करना ही लिखा है।’

रामवृक्ष जीवन में बदलाव के बारे में पूछने पर बोलते हैं, ‘पहले दिहाड़ी कम मिलती थी। अब थोड़ा ज्यादा मिलने लगी है।'

हम समाज के गलीच लोग हैं, इज्जत कहां पाएंगे: पूजा देवी

दरभंगा के सिंघवाड़ा प्रखंड का भरवारा गांव। यहां की पूजा देवी जाति से डोम हैं। अपना घर दिखाती हैं। टीन शेड की दीवार, बांस से बना दरवाजा और प्लास्टिक से ढंका छत। इसी में उनके परिवार का जीवन बीत रहा है। उनके बाप-दादा भी इसी घर में रहकर गुजर गए। अब बच्चे का सहारा भी यही है।

गरीबों को आज भी कोई आरक्षण नहीं मिल रहा: विश्वकर्मा राम

भोजपुर जिले के रामनगर गांव के रहने वाले विश्वकर्मा राम कोर्ट में काम कर 11 लोगों के अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। इसी पैसे से चार बच्चों को ग्रेजुएशन से मास्टर्स तक की पढ़ाई कराई। उनके बच्चों को अभी तक नौकरी नहीं मिली है।

उन्होंने बताया, ’आरक्षण के नाम पर बस हंगामा है। जरूरतमंद आज भी इससे दूर हैं। जब मेरे पढ़े-लिखे बेटे को नौकरी नहीं मिल रही है तो काहे का आरक्षण।’

अब इनकी नुमाइंदगी करने वालों की स्थिति जानिए

पटना में 1 करोड़ का घर, लाख रुपए में बाल कटवाते हैं चिराग पासवान

आरक्षण को लेकर सबसे मजबूत आवाज उठाने वाले चिराग पासवान अपनी लग्जरी लाइफ के लिए जाने जाते हैं।

  • हेयर स्टाइल से लेकर डिजाइनर ड्रेस के शौकीन हैं। बॉलीवुड में एक्टिंग कर चुके हैं। नेता बनने के बाद भी उनकी लग्जरी जारी है।
  • आज भी वे मशहूर हेयर स्टाइलिस्ट आलिम हकीम से अपने बालों की कटिंग कराते हैं।
  • इनके पास पटना के पॉश इलाके श्रीकृष्णापुरी में एक करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत का मकान है। दिल्ली के सुनहरी बाग इलाके में महल जैसे सरकारी बंगले में रहते हैं।
  • चिराग दो सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। दोनों आरक्षित सीटें हैं। इन्होंने 2014 में अपनी पॉलिटिकल डेब्यू जमुई लोकसभा क्षेत्र से की।
  • यहां से दो चुनाव जीतने के बाद 2024 में अपने पिता की सीट हाजीपुर लौट आए।
  • हाजीपुर आरक्षित सीट है। चुनाव आयोग को दिए हलफनामे के मुताबिक 2014 में इनकी कुल संपत्ति 1.4 करोड़ रुपए की थी।
  • 2024 में जब इन्होंने अपना हलफनामा दिया तो संपत्ति बढ़कर 2.68 करोड़ रुपए हो गई। इनके पास फॉर्च्यूनर और जिप्सी गाड़ी है।

10 साल में मात्र 7 लाख बढ़ी जीतन राम मांझी की संपत्ति

जीतन राम मांझी बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। राज्य में अलग-अलग विभागों में मंत्री रहने के साथ फिलहाल केंद्र में मंत्री हैं।

  • इनका जन्म बेहद गरीब मुसहर परिवार में हुआ था। बचपन में मवेशी चराते थे। आज दिल्ली के 28 अकबर रोड स्थित सरकारी बंगले में रहते हैं।
  • Z+ सुरक्षा कवर है। CRPF के कमांडो से घिरे रहते हैं। बुलेट प्रूफ कार में सवार होकर पूरे काफिले के साथ निकलते हैं।
  • हलफनामे के मुताबिक मांझी की संपत्ति 50 लाख रुपए से कम है। 2014 के चुनाव में इन्होंने अपनी संपत्ति 23.60 लाख रुपए बताई थी।
  • 2019 में यह बढ़कर 35.94 लाख रुपए हुई। 2024 के चुनाव में घटकर 30.20 लाख रुपए रह गई।
  • मांझी गाय के साथ-साथ राइफल रखने के भी शौकीन हैं। गया के महकार में इनका आवास है।

17 साल में 526% बढ़ी अशोक चौधरी की संपत्ति

जदयू के भीतर अशोक चौधरी बड़ा चेहरा दलित हैं। दलित के मुद्दों पर लगातार मुखर रहे हैं। ब्लैक कमांडो की सुरक्षा में रहते और लग्जरी गाड़ियों की सवारी करते हैं।

  • विधायक, विधान पार्षद सदस्य रहने के साथ लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। 2009 से 2026 तक 17 साल में इनकी संपत्ति करीब 526% बढ़ी है।
  • हलफनामे में दी गई जानकारी के मुताबिक 2009 में इनकी संपत्ति 1.23 करोड़ रुपए थी। 2026 तक यह बढ़कर 7.70 करोड़ रुपए हो गई।
  • चल संपत्ति में इनके पास शेयर, बॉन्ड और शेयर में इन्वेस्टमेंट और बैंक डिपॉजिट है। पटना के बोरिंग रोड और कदम कुआं में अपना मकान है।

15 साल में 1545% बढ़ी शिवेश राम की संपत्ति

मौजूदा समय में बिहार बीजेपी में दलितों का सबसे बड़ा चेहरा शिवेश राम हैं। इन्हें पार्टी के SC मोर्चा का राषट्रीय अध्यक्ष भी बनाया गया है। इसी साल राज्यसभा का चुनाव जीते हैं। इससे पहले एक बार विधायक बने थे। लोकसभा का चुनाव हार गए थे।

  • 2010 से 2025 के बीच इनकी संपत्ति में 1545 फीसदी की वृद्धि हुई। हलफनामे के मुताबिक 2010 में इनकी संपत्ति 56.40 लाख रुपए थी। 2025 में इनकी संपत्ति बढ़कर 9.28 करोड़ रुपए हो गई है।
  • इनके पास भोजपुर, रांची, बोकारो, पटना, गुड़गांव में जमीन और फ्लैट हैं। रिवॉल्वर और राइफल रखने के शौकीन हैं। इनके नाम पर स्कॉर्पियो, इनोवा क्रिस्टा और मारुति की कार है।

10 साल में 5 करोड़ बढ़ी राजेश राम की संपत्ति

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दलित मुद्दों को लेकर लगातार मुखर रहते हैं। प्रदेश में कांग्रेस के सबसे बड़े नेता हैं। दो बार के विधायक रहे हैं। हालांकि 2025 का चुनाव हार गए। 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान हलफनामे में दी गई जानकारी के मुताबिक उनकी संपत्ति 1.50 करोड़ थी।

2025 के हलफनामे में बताया है कि इनकी चल-अचल संपत्ति 6 करोड़ की है। जमीन और बैंक बैलेंस के अलावा राजेश राम के नाम पर एक पेट्रोल पंप भी है।

इन दलित नेताओं की भी बढ़ी संपत्ति

20 साल में 25 गुना बढ़ी श्याम रजक की दौलत

बिहार सरकार में मंत्री रहे श्याम रजक की संपत्ति में 20 साल में भारी इजाफा हुआ है। 20 साल में 6 चुनाव लड़ने वाले श्याम रजक की संपत्ति 2005 में 20 लाख रुपए की थी। हर 5 साल में इनकी संपत्ति में लगातार इजाफा हुआ। 2025 विधानसभा चुनाव में दाखिल हलफनामे में इन्होंने बताया है कि इनकी कुल संपत्ति 5.14 करोड़ रुपए है।

12 साल में 10 गुना बढ़ी जनक राम की संपत्ति

जनक राम बीजेपी के सीनियर लीडर हैं। राज्य भर में दलित नेता के तौर इनकी छवि है। सांसद, विधायक और बिहार सरकार में मंत्री रहे हैं। 12 साल में इनकी संपत्ति में 10 गुना की बढोतरी हुई है।

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में जनक राम ने अपनी कुल संपत्ति लगभग ₹1.05 करोड़ घोषित की थी। 2021 में बिहार विधान परिषद (MLC) के चुनाव के दौरान इनकी कुल संपत्ति लगभग 1.5 करोड़ रुपए हो गई थी।

33% बढ़ी उदय नारायण चौधरी की संपत्ति

लंबे समय तक बिहार विधानसभा के अध्यक्ष रहे उदय नारायण चौधरी की संपत्ति 10 साल में 33 फीसदी बढ़ी है। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान इनकी संपत्ति 98.27 लाख रुपए थी। 2025 के विधानसभा चुनाव तक इनकी संपत्ति बढ़कर 1.31 करोड़ रुपए हो गई ।

10 साल में 2-10 करोड़ हुई महेश्वर हजारी की संपत्ति

सासंद, विधायक, मंत्री और विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे जदयू नेता महेश्वर हजारी की संपत्ति में पिछले 11 वर्षों में 404% से ज्यादा की वृद्धि हुई है। 2014 के लोकसभा चुनाव के हलफनामे में इन्होंने 2.15 करोड़ रुपए संपत्ति घोषित की थी। 2025 के विधानसभा चुनाव के हलफनामे के दौरान इन्होंने अपनी संपत्ति 10.85 करोड़ रुपए बताई थी।

इनपुट- दीपेश कुमार, अभिनय प्रकाश, राजन कुमार, प्रेम कुमार